क्या पाकिस्तान में आया भूकंप भारत के लिय एक चेतावनी?

Sharing is Important
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

पाकिस्तान में मंगलवार शाम 4.33 बजे आए शक्तिशाली भूकंप से भारी तबाही हुई है. पाकिस्तानी मीडिया के अनुसार अब तक  22 लोगों के मारे जाने की ख़बर है और करीब 300 लोगों के घायल होने की सूचना है.

भूकंप से पाकिस्‍तान के पंजाब, खैबर पख्तूनख्वा प्रांतों और इस्‍लामाबाद के कई हिस्सों में तेज झटके को महसूस किया गए. यूनाइटेड स्टेट्स जियोलॉजिकल सर्वे (USGS) के अनुसार इस भूकंप का केंद्र POK का मीरपुर, जातलां था. यह भूकंप 10 किलोमीटर की उथली गहराई पर 5.8 तीव्रता का था.

फोटो- सोशल मीडिया

भूकंप के झटके हरियाणा, पंजाब, दिल्ली, कश्मीर, हिमाचल प्रदेश की अलग-अलग जगहों पर भी महसूस किया गया है. 8 अक्टूबर 2005 को पाकिस्तान में आए 7.6 तीव्रता के भूकंप से पाकिस्‍तान अधिक प्रभावित हुआ था, जिसमें 73,000 से अधिक लोग मारे गए थे और लगभग 35 लाख लोग बेघर हो गए थे.

फोटो- सोशल मीडिया

भारत में मौजूद भूकंपीय जोन देश के लिए कितना बड़ा ख़तरा

भूकंप का खतरा देश में हर जगह अलग-अलग है. इस खतरे के हिसाब से देश को चार हिस्सों में बांटा गया है. जोन-2, जोन-3, जोन-4 तथा जोन-5. सबसे कम खतरे वाला जोन 2 है तथा सबसे ज्यादा खतरे वाला जोन-5 है. नार्थ-ईस्ट के सभी राज्य, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड तथा हिमाचल प्रदेश के कुछ हिस्से जोन-5 में आते हैं. उत्तराखंड के कम ऊंचाई वाले हिस्सों से लेकर उत्तर प्रदेश के ज्यादातर हिस्से, दिल्ली जोन-4 में आते हैं. मध्य भारत अपेक्षाकृत कम खतरे वाले हिस्से जोन-3 में आता है, जबकि दक्षिण के ज्यादातर हिस्से सीमित खतरे वाले जोन-2 में आते हैं, लेकिन यह एक मोटा वर्गीकरण है.

फोटो- सोशल मीडिया

दिल्ली में कुछ इलाके हैं जो जोन-5 की तरह खतरे वाले हो सकते हैं.इस प्रकार दक्षिण राज्यों में कई स्थान ऐसे हो सकते हैं जो जोन-4 या जोन-5 जैसे खतरे वाले हो सकते हैं. दूसरे जोन-5 में भी कुछ इलाके हो सकते हैं जहां भूकंप का खतरा बहुत कम हो और वे जोन-2 की तरह कम खतरे वाले हों.इसके लिए भूकंपीय माइक्रोजोनेशन की जरूरत होती है. माइक्रोजोनेशन वह प्रक्रिया है जिसमें भवनों के पास की मिट्टी को लेकर परीक्षण किया जाता है और मिट्टी के प्रकार के आधार पर मकानों का डिजाइन तैयार किया जाता है.

फोटो- सोशल मीडिया

अभी तक क्यों संभव नहीं भूकंप की भविष्यवाणी?

अभी तक वैज्ञानिक पृथ्वी की अंदर होने वाली भूकंपीय हलचलों का पूर्वानुमान कर पाने में असमर्थ रहे हैं. इसलिए भूकंप की भविष्यवाणी करना फिलहाल संभव नहीं है. वैसे विश्व में इस विषय पर सैकड़ों शोध चल रहे हैं. भारत में ज्यादातर भूकंप टैक्टोनिक प्लेट में होने वाली हलचलों के कारण आते हैं क्योंकि भारत इसी के ऊपर बसा है, इसलिए खतरा और बढ़ जाता है. लेकिन इन हलचलों का आकलन संभव नहीं है, लेकिन शोध में वैज्ञानिकों ने पाया कि इस टैक्टोनिक प्लेट का हिस्सा आयरलैंड में सतह के करीब है.