LOC के गाँव वालों का दर्द, ‘अपना गांव और घर छोड़कर भागना पड़ता है’

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उत्तरी कश्मीर(North Kashmir) के बारामूला ज़िले का चुरंडा गाँव उरी(Uri Sector) इलाके में एलओसी(LOC) के पास है। अब्दुल हमीद खटाना, जो अपने घर के अन्दर लगने वाली गोलियों से बड़ी मुश्किल से बचे थे। उन्होनें GROUND REPORT से बात करते हुए अपना दर्द साझा किया। उनका दर्द उनकी आंख़ों में और उनकी बातों में ज़िंदगी को लेकर फ़िक्र थी।

खटाना ने बताया कि पिछले हफ्ते भारत-पाकिस्तान(LOC) के बीच हुई गोलाबारी में उन्हें अपना गांव और घर छोड़कर भागना पड़ा था। और अब वो अस्थायी रूप से उरी के कैम्प में रहते हैं। आगे उन्होनें बताया कि दोनों देशों के बीच लगातार तनाव बढ़ रहा है और आलम यह है कि हम लगातार डर के साये में ज़िंदगी ज़ी रहे हैं।

यह दर्द केवल खटाना का नहीं है बल्कि उन सैकड़ों ग्रामीणों का जो बॉर्डर के पास वाले क्षेत्रों में रहते हैं। उनका कहना है कि दोनों देशों के बीच की गोलाबारी को ख़ामियाज़ा उनको उठाना पड़ रहा है और इसी का नतीज़ा ये रहा है कि सैकड़ों लोगों को अपनी ज़िंदगी और ज़मीन दोनों से हाथ धोना पड़ा। वहीं अधिकारियों का कहना है कि ये अब तक की सबसे भीषण गोलाबारी थी जिससे करीब 3000 लोग प्रभावित हुए है।

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बच्चों और महिलाओं को एम्बुलेंस से ले जाना पड़ा। वहीं कैम्प में रह रहे ग्रामीणों ने Ground Report को बताया कि सभी लोगों ने गांव को पूरा खाली कर दिया है। हालांकि यह साफ नहीं हुआ की इस गोलाबारी में कुल कितने ग्रामीणों को चोट आई है या मारे गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वो अपने जानवरों और ज़रुरी सामानों को लेकर परेशान है जिनको वह पीछे छोड़ आये है ।

आपको बता दें कि चुरांडा गांव भारतीय सीमा में एलओसी(LOC) के पास स्थित है और यही वज़ह है कि यहां रहने वाले लोगों को दोनों देशों के बीच दुश्मनी का खामियाज़ा उठाना पड़ रहा है। 63 साल के ज़हूर अहमद, जो अभी की गोलाबारी में अपनी पत्नी को गवां चुके हैं, उन्होंने बताया कि हम आग के दरिये के पास रहते हैं कब कौन सी गोली आ कर ज़ान ले ले पता नही। ज़हूर ने इशारे में कश्मीर के पाकिस्तान हिस्से को भी दिखाया और कहा कि उस गांव का नाम ख्वाज़ा बांधी है।

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उसी गांव के यूनिस मलिक ने बताया कि पाकिस्तानी सेना लंबे समय से ग्रामीणों को निशाना बना रही है। पाकिस्तानी सेना को लगता है कि यहां भारतीय सेना का कैम्प है और उसका नतीज़ा हम निर्दोषों को उठाना पड़ता है। दूसरी तरफ गांव के बुजुर्गों का कहना है कि हमनें अपनी सुरक्षा के लिए अधिकारियों से बात की थी और तत्काल उन्होनें इस पर अमल करते हुए बंरक बनाने के आदेश दे दिए है।

आपको बता दें कि भारत-पाक 2003 में संघर्ष विराम के लिए राज़ी हुए थे लेकिन पाकिस्तानी सेना आये दिन इसका उल्लंघन करती है । देश के रक्षा मंत्री ने संसद में बताया था कि इस 9 महीनों में 3000 बार समझौते का उलंल्घन पाक आर्मी ने किया है। वैसे तो नियंत्रण रेखा आपको नक्शे पर कहीं नज़र नही आएगी । नियंत्रण रेखा 650 मील लंबा और 25 मील चौंड़ा क्षेत्र है जिसके दोनों तरफ हजारों लोग रहते है ।

यह लेख ग्राउंड रिपोर्ट के संस्थापक ललित कुमार सिंह द्वारा लिखा गया है।

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