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Oxygen Concentrator क्या है? ऑक्सीजन कंसंट्रेटर के बारे में वो सब कुछ जो आप जानना चाहते हैं

oxygen concentrator: What is oxygen concentrator? How it works, know everything about it क्या है ऑक्सीजन कॉन्सेंट्रेटर कौन सा खरीदना बेस्ट ?
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oxygen concentrator: कोरोना की दूसरी लहर ने भारत के हेल्थ सिस्टम की नाकामी की पोल खोल दी है। संक्रमण के मामलों में हुई अचनाक वृद्धि की वजह से मेडिकल ऑक्सीजन (oxygen concentrator) की कमी सामने आयी है, जिसके कारण देश में हज़ारों लोग की मृत्यु हो रही है। देश की स्वस्थ्य सेवाएं बढ़ती मांग के सामने संघर्ष करती नज़र आ रही हैं। ऐसे में, ऑक्सीजन कंसंट्रेटर (oxygen concentrator) काफी मददकारी साबित हो रहा है। इनकी सबसे ख़ास बात ये है की इन्हे घर पे भी आसानी से इस्तेमाल किया जा सकता है।

क्या होते है ऑक्सीजन कंसंट्रेटर? What is an oxygen concentrator?
कॉन्सेंट्रेटर एक छोटी सी मशीन (यंत्र) होती है जो की पूरक ऑक्सीजन-समृद्ध हवा रोगी को प्रदान करती है। इसे आम-तौर पर उन लोगों के लिए इस्तेमाल किया जाता है जिन्हें फेफड़ो (lungs) की या अन्य कोई भी सांस लेने से जुड़ी बीमारी हो। ब्लड सैचुरेशन लेवल 94 फीसदी से कम होने पर साँस लेने की दिक्क्त हो सकती है, ऐसे में रोगी को तुरंत हॉस्पिटल में भर्ती कराये जाने की सलाह दी जाती है पर कोरोना मामलो में हुई वृद्धि की वजह से इस वक़्त कही भी हॉस्पिटल बेड मिलना बहुत मुश्किल हो गया है, ऐसे में अगर ब्लड लेवल 88-92 हो जाये तो कॉन्सेंट्रेटर का इस्तेमाल किया जा सकता है। विशेषज्ञों की माने तो ब्लड लवेल 94 फीसदी कम होते ही ऑक्सीजन थेरेपी करनी चाहिए वरना शरीर के बाकी अंगों में भी कई प्रकार की दिक्क्तें आ सकती हैं।

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ऑक्सीजन कंसंट्रेटर क्या करता है ? What does an oxygen concentrator do ?
यह एक बिजली से चलने वाला उपकरण है जो की हवा में से ऑक्सीजन को अलग करके रोगी को नाक के द्वारा ऑक्सीजन प्रदान करता है। हवा में 78 फीसदी नाइट्रोजन और 21 फीसदी ऑक्सीजन मौजूद है, कॉन्सेंट्रेटर रोगी को ऐसी हवा देता जो की 95 फीसदी ऑक्सीजन होती है। हालाकीं गंभीर मामलों में 99 फीसदी तक शुद्ध (pure) ऑक्सीजन की ज़रूरत पड़ सकती है जिसमे की कॉन्सेंट्रेटर का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है। इनमे एक सेंसर भी लगा होता है जो की ऑक्सीजन की शुद्धता कम होने पर सूचित है। ब्लड लेवल 90 फीसदी से कम होने पर कॉन्सेंट्रेटर का इस्तेमाल करने से, फेफड़ो पर बोझ काम पड़ता है और सांस लेने में आसानी होती है। इन कॉन्सेंट्रेटर का इस्तेमाल वहां होता है जहा लिक्विड (liquid) ऑक्सीजन या प्रेशर ऑक्सीजन का इस्तेमाल खतरनाक हो या वहाँ तक पहुंचना मुश्किल हो, जैसे की घरों या क्लीनिकों में।

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ऑक्सीजन कंसंट्रेटर कैसे काम करता है ? How does an oxygen concentrator work ?
कॉन्सेंट्रेटर में एक कंप्रेसर और छलनी (फिल्टर) लगी होती है। कंप्रेसर हवा को खींच कर निचोड़ता है और प्रेशर को भी कंट्रोल करता है, तो वही फ़िल्टर जो की ‘जिओलाइट’ नामक धातु से बना होता है वह हवा से नाइट्रोजन को अलग करके, दूसरे फिल्टर की मदद से सिर्फ ऑक्सीजन को रोगी की नाक तक पहुंचाता है। यह दोनों फ़िल्टर नाइट्रोजन को बाहर निकल कर शुद्ध ऑक्सीजन के बहाव को बनाये रखते हैं। क्लीनिकल रिसर्चों में ऐसा साबित हुआ है की कॉन्सेंट्रेटर भी बाकी ऑक्सीजन प्रदान करने वाले यंत्रो के बराबर ही हवा को साफ़ करता है।

कितने प्रकार के ऑक्सीजन कंसंट्रेटर होते है और कौनसा खरीदें ? Types of oxygen concentrator and which one to buy?
दो प्रकार के कॉन्सेंट्रेटर उपलब्ध होते है – पहला(कॉन्टिनियस फ्लो) वह जिसमे की ऑक्सीजन एक ही बहाव में रहती है और खुद से एडजस्ट करना पड़ता है  तो दूसरा (पल्स डोज़) जिसमे की उपकरण खुद ही सांस लेने के पैटर्न को पहचान कर ऑक्सीजन का बहाव करती है।

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यह उपकरण कई तरह के फीचर और कैपेसिटी में उपलब्ध होते है, इन्हे ऑक्सीजन आउटपुट लेवल के सिद्धांत से अलग किया जाता है। कोरोना संक्रमित रोगियों के लिए 5 से 10 लीटर आउटपुट वाले ही कॉन्सेंट्रेटर का इस्तेमाल किया जाता है। इनकी कीमत ₹ 40000 – 90000 रूपए के बीच होती है। हालाकीं ऑक्सीजन सिलेंडर ₹ 8-20000 तक होती है और इनसे बहुत सस्ते होते है पर कॉन्सेंट्रेटर में मेंटेनेंस की लागत बहुत कम होती है (फ़िल्टर को समय समय और उपयोग के अनुसार बदलना होता है )। सबसे अच्छी बात ये है की ये छोट होते हैं, और इन्हे कहीं पर भी रख के इस्तेमाल कर सकते है। इन्हें ऑक्सीजन सिलेंडर की तरह रिफिल नहीं कराना पड़ता और बिजली से संचालित होते है।

भारत में कोविड आने से पहले इसका मार्केट कैपिटल मात्र 40000 यूनिट का था, अब अचानक से बढ़ी मांग की वजह से इनके दाम भी बढ़े हैं और इनकी उपलब्धता भी पहले के मुकाबले कम और कठिन हो गयी है।

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