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अब्बास सिद्दीकी और ओवैसी की मुलाकात से बंगाल की राजनीति में भूचाल क्यों?

फुरफुरा शरीफ
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AIMIM के सुप्रीमो असदुद्दीन ओवैसी ने बंगाल चुनाव लड़ने का ऐलान किया है। इसी सिलसिले में वो रविवार को हुगली जिले में मशहूर धार्मिक स्थल फुरफुरा शरीफ पहुंचे। यहां उन्होंने ममता बनर्जी के धुर विरोधी माने जाने वाले मुस्लिम युवा नेता अब्बास सिद्दीकी से मुलाकात की।

अब्बास सिद्दीकी और ओवैसी की मुलाकात से बंगाल की राजनीति में हलचल दिखाई दी। टीएमसी के सौगत रॉय ने इस मुलाकात पर टिप्पणी करते हुए कहा कि ओवैसी बीजेपी के एजेंट हैं। ओवैसी जानते हैं कि उनका बंगाल में कोई भविष्य नहीं है। अब्बास सिद्दीकी से गठबंधन करने के बाद भी उन्हें कोई फायदा नहीं होगा। बंगाल के मुस्लिम ममता बनर्जी के साथ एकजुटता के साथ खड़े हैं।

बीजेपी ने भी इस मुलाकात पर टिप्पणी करते हुए कहा कि अगर ममता बनर्जी ने मुस्लिमों के लिए काम किया है तो उनको डरने की क्या ज़रुरत है। ममता बनर्जी मुस्लिम वोटों को अपनी जागीर समझती आई हैं।

असदुद्दीन ओवैसी ने टीएमसी की ओर से आई प्रतिक्रिया पर जवाब देते हुए कहा कि हमने बंगाल में लोकसभा चुनाव नहीं लड़ा था। फिर भी बीजेपी 18 सीटें जीतने में कामयाब हो गई। टीएमसी के नेता भाजपा में शामिल हो रहे हैं। ममता बनर्जी अपनी पार्टी नहीं संभाल पा रहीं। हमारा उद्देश्य केवल भाजपा को रोकना है।

कौन हैं अब्बास सिद्दीकी?

अब्बास सिद्दीकी बंगाल के प्रभावशाली मुस्लिम नेता है। पिछले कुछ समय में वो ममता बनर्जी के मुखर विरोधियों के रुप में उभरे हैं। सिद्दीकी के अनुयायी पूरे दक्षिण बंगाल में फैले हुए हैं। बंगाल में 30 प्रतिशत मुस्लिम मतदाता है जो 90 विधानसभा सीटों पर नतीजे प्रभावित कर सकते हैं। सिद्दीकी करीब 45 सीटों पर चुनाव लड़ने वाले हैं। ऐसे में मुस्लिम वोटों को विभाजित करने में सिद्दीकी अहम भूमिका निभा सकते हैं।

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अब्बास सिद्दीकी के परिवार के अन्य सदस्य टीएमसी और लेफ्ट पार्टियों की मदद करते रहे हैं। सिद्दीकी परिवार के अन्य सदस्यों, विशेष रूप से टोह सिद्दीकी, ने ओवैसी की यात्रा पर चुप्पी बनाए रखी। फुरफुरा शरीफ में अगर कहें की केवल अब्बास सिद्दीकी के ओवैसी के साथ जाने से सारे वोट उनको मिल जाएंगे यह नहीं कहा जा सकता।

हाल ही में बिहार चुनाव में अच्छा प्रदर्शन करने वाली ओवैसी की पार्टी AIMIM ने बंगाल में चुनाव लड़ने का ऐलान किया। बंगाल में यह पहली दफा होगा जब ओवैसी की पार्टी चुनाव लड़ेगी। ऐसे में उन्होंने बंगाल के जमे जकड़े मुस्लिम नेता की शरण में जाना ज्यादा फायदेमंद समझा।

अब्बास सिद्दीकी भी 2021 में विधानसभा का चुनाव लड़ने के लिए अपनी पार्टी का ऐलान करने वाले थे जो उन्होंने अभी तक नहीं किया है। ओवैसी ने कहा है कि उनकी पार्टी अब्बास सिद्दीकी के नेतृत्व में ही चुनाव लड़ेगी और इसकी रणनीति भी अब्बास ही तय करेंगे।

बंगाल में मुस्लिम वोटों का गणित

बंगाल की मुस्लिम आबादी 2011 की जनगणना के दौरान 27.01% थी और अब बढ़कर लगभग 30% होने का अनुमान है। मुस्लिम आबादी मुख्य रूप से मुर्शिदाबाद (66.28%), मालदा (51.27%), उत्तर दिनाजपुर (49.92%), दक्षिण 24 परगना (35.57%), और बीरभूम (37.06%) जिलों में केंद्रित है। दार्जिलिंग, पुरुलिया और बांकुरा में, जहां भाजपा ने पिछले साल लोकसभा सीटें जीती थीं, मुसलमानों की आबादी 10% से भी कम है।

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ममता बनर्जी का प्रभाव मुस्लिम बहुल सीटों पर अधिक रहा है। साथ ही लेफ्ट पार्टियों को भी मुस्लिमों का समर्थन मिलता रहा है। ऐसे में ओवैसी की ऐंट्री और सिद्दीकी जैसे प्रभावी नेता के साथ आने के बाद मुस्लिम वोटों में सेंध लग सकती है। जो सीधे तौर पर टीएमसी को प्रभावित करेगा। भाजपा हिंदू वोटों पर अपना दांव चल रही है ऐसे में ममता के वोटों में सेंध से सीधा फायदा बीजेपी को होगा।

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