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कई घरों में बुज़ुर्ग अकेले रह गए हैं, लॉकडाउन में उनका ख्याल कौन रखेगा?

Old Age People In Lockdown
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विचार । पल्लव जैन

बच्चे बड़े शहरों में नौकरी करते हैं, कभी-कभी वीडियो कॉल कर लेते हैं, फोन पर हाल भी जान लेते हैं, वे उनसे दूर हैं लेकिन मॉं-बाप को यह भरोसा था कि कोई भी दिक्कत हुई तो बेटा या बेटी झट से उनके पास आ जाएंगे। लेकिन यह लॉकडाउन उनके लिए बड़ी चिंता बन गया है। बच्चों को भी मां-पिता की चिंता सताने लगी है। क्योंकि इस लॉकडाउन ने उन्हें असहाय बना दिया है। चिंता उन घरों की सबसे ज़्यादा है जहां घर के बुज़ुर्ग अकेले रहते हैं और उनकी देखभाल के लिए कोई नहीं है। अपने दोस्तों और मौहल्ले के बुज़र्गों के साथ समय काट लेने वाले बुज़ुर्गों के लिए यह लॉकडाउन अकेलापन लेकर आया है। कोरोनावायरस का सबसे अधिक खतरा भी 60 वर्ष से अधिक उम्र के बुज़ुर्गों के लिए है। ऐसे में चिंता और बढ़ जाती है।

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देश के हर छोटे बड़े शहर के यही हालात हैं। नौकरी की तलाश में बेटे-बेटियां बड़े शहरों में चले गए हैं और घर पर केवल मां बाप रह गए हैं। यह समय जब उन्हें देखभाल की सबसे अधिक ज़रुरत है, बच्चे उनसे दूर हैं। यह लॉकडाउन हमारी भलाई के लिए है। कोरोना से बचने के लिए घरों में रहना एकमात्र उपाय है। अगर आपके घर भी आपके मां बाप अकेले हैं तो रोज़ाना उनका हाल चाल पूछें। अगर आपके आस पड़ोस में भी ऐसे बुज़ुर्ग रहते हैं तो उनका ध्यान रखें।

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