जंजीरों में जकड़ी जा रही पत्रकारिता, आज़ादी को छटपटा रहे पत्रकार, क्या ये संकेत है अघोषित इमरजेंसी के?

Punya Prasun Bajpai, Abhisar Sharma, Milin Khandekar, Ajit Anjum, Pranay Roy, Radhika Roy, Amit Shah, Ravish Kumar, NDTV, NDTV India, Aaj Tak, ABP News, TV9 Bharatvarsh, BJP, Modi sarkar, prime minister narendra modi, BJP,
Sharing is Important
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

कोमल बड़ोदेकर | नई दिल्ली

कई बार इस्तीफे बिना कुछ कहे ही बहुत कुछ कह जाते हैं। चुप्पी साधे ये इस्तीफे अपने पीछे कई गंभीर सवाल खड़े कर जाते हैं। टीवी न्यूज़ के दर्शकों को सबसे ज्यादा दुख तब होता है जब उनके पसंदीदा कार्यक्रम का एंकर या टीवी जर्नलिस्ट अचानक चैनल छोड़ दें या यूं कहें कि मैनेजमेंट उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दे। दर्शकों से ज्यादा दुख शायद उन पत्रकारों को होता है जो जनता से जड़े हए मुद्दों पर सरकार के वादों और उनकी हकीकत बयां करते हैं और अचानक दबाव में या तो इस्तीफा देते हैं या खुद ही अलविदा कह जाते हैं। आज हम आपको ऐसे पत्रकारों के बारे में बता रहे हैं जिन्होंने सत्ता के दबाव में घुटने टेकने की जगह चैनल छोड़ना बेहतर समझा।

1.सीनियर टीवी जर्नलिस्ट अजीत अंजुम
ऐसे ही पत्रकारों में इन दिनों चर्चा का विषय बने हुए हैं सीनियर टीवी जर्नलिस्ट अजीत अंजुम। टीवी 9 भारतवर्ष से अजीत अंजुम का अचानक इस्तीफा देना अपने पीछे कई सवाल खड़े करता है, जैसे क्या अजीत अंजुम की पत्रकारिता सरकार को रास नहीं आ रही थी? क्या मोदी सरकार को अपनी आलोचना बर्दाश्त नहीं हो रही थी? आखिर क्या कारण थे जो अजीत अंजुम को इस्तीफा देना पड़ा?

पहले विनोद कापड़ी फिर अजीत अंजुम को बनाया निशाना
वरिष्ठ टीवी पत्रकार अजीत अंजुम ने अपने साथियों विनोद कापड़ी और हेमंत शर्मा के साथ खरी बात कहने के लिए जिस जोश-ओ-खरोश के साथ ‘टीवी 9 भारतवर्ष’ लॉन्च किया था उसी चैनल में पहले विनोद कापड़ी को टारगेट किया गया फिर अजीत अंजुम को निशाना बनाया गया। ऐसी कई बातें मीडिया गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई है कि हैदराबाद स्थित मैनेजमेंट को मोदी सरकार की आलोचना रास नहीं आ रही थी।

वर्तमान में पत्रकारों की व्यथा पर शिवमंगल सुमन की कविता ये पंक्ति पर गौर फरमाएं…

“हम पंछी उन्‍मुक्‍त गगन के
पिंजरबद्ध न गा पाएँगे,
कनक-तीलियों से टकराकर पुलकित पंख टूट जाऍंगे।
हम बहता जल पीनेवाले
मर जाएँगे भूखे-प्‍यासे,
कहीं भली है कटुक निबोरी
कनक-कटोरी की मैदा से”

सरकार की आंख की चुभन बन गया था अजीत अंजुम का शो
टीवी 9 भारतवर्ष पर 7 बजे प्रसारित होने वाला अजीत अंजुम का पॉपुलर शो ‘राष्ट्रीय बहस’ सरकार की आंख की चुभन बन गया था। अचानक शो का समय एक घंटे से घटाकर आधा घंटा करने का फैसला लिया गया। इसके बाद अजीत अंजुम ने भारी मन से इस्तीफा दे दिया।

ALSO READ:  Delhi Election 2020 : पूर्वांचली संघर्ष समिति के माध्यम से संजय सिंह को आगे कर रही बीजेपी

कापड़ी और अंंजुम को मोदी से सवाल पूछना पड़ा भारी
हांलाकि इस बात की भी चर्चा-ऐ-आम है कि विनोद कापड़ी और अजीत अंजुम को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से एक सवाल पूछना भारी पड़ गया। टीवी 9 भारतवर्ष की लॉन्चिंग के वक्त एक सवाल का जवाब देते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने देते हुए कहा था कि ‘आप लोगों के तो खून में ही मुझे गाली देना है’। हांलाकि मैनेजमेंट का कहना है कि अजीत अंजुम का कॉन्ट्रेक्ट पूरा हो चुका था।

2.सीनियर टीवी जर्नलिस्ट पुण्य प्रसून बाजपेयी
कुछ ऐसी ही कहानी टीवी दुनिया के दिग्गज पत्रकारों में से एक पुण्य प्रसून वाजपेयी की है। एक इंटरव्यू में पतंजलि प्रमुख बाबा रामदेव से सीधे और खरे सवाल पूछने पर पहले आज तक फिर मोदी सरकार के दावों की पड़ताल करता ABP न्यूज़ पर ‘मास्टर स्ट्रोक’ पुण्य के इस्तीफे की प्रमुख वजह रहा। इतना ही नहीं इस दौरान ABP न्यूज़ के ही अभिसार शर्मा और मिलिंद खांडेकर भी निशाने पर ले लिए गए जिनका जिक्र हम आगे करेंगे।

प्रसून से नाराज थे कई केन्द्रीय मंत्री
ABP न्यूज से बाजपेयी के इस्तीफे की खबर के दौरान इस तरह की चर्चा भी आम रही कि मास्टर स्ट्रोक पर छत्तीसगढ़ की एक महिला किसान की ‘दोगुनी आय’ पर प्रधानमंत्री मोदी के दावे की पोल खोल रिपोर्टिंग का प्रसारण मोदी सरकार को रास नहीं आया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस खबर से मोदी सरकार के कई मंत्री नाराज़ थे। इस दौरान बाजपेयी के इस्तीफे पर कांग्रेस दिग्गज नेता राहुल गांधी ने मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए ट्वीट कर कहा था, PM जी अपनी मन की बात सुनाते हैं यह तो सभी जानते थे। आज यह मालूम पड़ रहा है कि वह सिर्फ अपने ही मन की बात सुनना भी चाहते हैं।

3.न्यूज़ एंकर अभिसार शर्मा
ABP न्यूज़ चैनल के सीनियर न्यूज़ एंकर रहे अभिसार शर्मा को इस्तीफे से पहले 15 दिन के लिए अचानक ‘ऑफ एयर’ रहने के लिए कहा गया था। इस बात की मुख्य वजह यह रही कि उन्होंने अपने कार्यक्रम में सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना कर दी थी। सवाल यह है कि क्या पीएम मोदी को अपनी आलोचना बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं है? या सरकार सच या अपने खिलाफ कुछ भी नहीं सुनना चाहती है? खैर…

ALSO READ:  Delhi Elections: दिल्ली में क्या है मुस्लिम मतदाता का समीकरण, समझिये...

“स्‍वर्ण-श्रृंखला के बंधन में
अपनी गति, उड़ान सब भूले,
बस सपनों में देख रहे हैं
तरू की फुनगी पर के झूले।
ऐसे थे अरमान कि उड़ते
नील गगन की सीमा पाने,
लाल किरण-सी चोंचखोल
चुगते तारक-अनार के दाने।”

पीएम मोदी की आलोचना बनी अभिसार के इस्तीफे की वजह-
अभिसार के खिलाफ चैनल प्रबंधन की इस कार्रवाई के पीछे की वजह यह रही कि उन दिनों प्रधानमंत्री मोदी ने उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में प्रदेश की कानून व्यवस्था में हुए सुधार का दावा किया था। इसके ठीक अगले दिन अभिसार शर्मा ने यूपी में दो बर्बर हत्याओं का ज़िक्र करते हुए पीएम मोदी के दावों की पोल खोल दी थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, जैसे ही अभिसार शर्मा ने पीएम मोदी का जिक्र किया वैसी ही न्यूज़रूम में खलबली मच गयी थी। इसके बाद मैनेजमेंट ने अभिसार को आगे से पीएम मोदी की आलोचना न करने के निर्देश दिए थे।

पत्रकार मिलिंद खांडेकर-
इस फेहरिस्त में अगला नाम एबीपी न्यूज़ में एक लंबी पारी खेलने वाले पत्रकार मिलिंद खांडेकर का है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक ऑन एयर शो के दौरान एंकर अभिसार शर्मा ने एक न्यूज़ के दौरान प्रधानमंत्री मोदी की आलोचना की। द वायर की रिपोर्ट के मुताबिक, सीईओ अतिदेब सरकार ने प्रसारण रोकने के लिए कहा लेकिन मिलिंद खांडेकर ने मना करते हुए कहा कि, 5 मिनट का बुलेटिन जा चुका है ऐसे में प्रसारण नहीं रोका जा सकता। इसके कुछ दिन बाद ही एबीपी में एडिटर इन चीफ रहे खांडेकर के इस्तीफे की घोषणा खुद प्रबंधन ने की। टीवी न्यूज़ जगत में एक लंबी पारी खेलने वाले मिलिंद खांडेकर ने अब बीबीसी इंडिया डिजिटल से एक नई पारी की शुरूआत की है।

ALSO READ:  बीजेपी के खिलाफ आवाज मंहगी पड़ेगी, राज ठाकरे ईडी के रडार पर !

पुण्य प्रसून, अभिसार मिलिंद के इस्तीफे के पीछे शाह का हाथ-
वहीं इन सब से इतर, 3 अगस्त 2018 को द वायर में छपी एक खबर के मुताबिक, तत्कालीन बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने मीडिया को सबक सिखाने की बात कही थी। एबीपी न्यूज़ से पुण्य प्रसूून बाजपेयी, मिलिंद खांडेकर और अभिसार की हुई छुट्टी के पीछे अमित शाह का हाथ समझा जाता है। द वायर की खबर के अनुसार, एबीपी में हुए इन बदलावों के बीच भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को संसद भवन में कुछ पत्रकारों से चर्चा करते सुना गया था कि वे ‘एबीपी को नया सबक सिखाएंगे।’

मीडिया के अधिकारों का उल्लंघन-
वहीं बीते दिनों एनडीटीवी के प्रमुख प्रणय रॉय और राधिका रॉय को विदेश जाने से रोक दिया गया। इस कार्रवाई को एनडीटीवी ने मीडिया के अधिकारों का उल्लंघन बताते हुए एक खबर भी जारी की। एनडीटीवी ने कहा, बुनियादी अधिकारों का पूरी तरह उल्लंघन करते हुए और मीडिया को लगातार शर्मनाक ढंग से ये चेतावनी देते हुए कि पूरी तरह दंडवत होने से कम उन्हें कुछ भी मंज़ूर नहीं है, एनडीटीवी के संस्थापकों राधिका और प्रणय रॉय को आज देश से बाहर जाने से रोक दिया गया। उन्हें एक सप्ताह बाहर रहना था और 15 तारीख़ को उनकी वापसी का टिकट था।

होती सीमाहीन क्षितिज से
इन पंखों की होड़ा-होड़ी,
या तो क्षितिज मिलन बन जाता
या तनती साँसों की डोरी।
नीड़ न दो, चाहे टहनी का
आश्रय छिन्‍न-भिन्‍न कर डालो,
लेकिन पंख दिए हैं, तो
आकुल उड़ान में विघ्‍न न डालो।

…तो मोदी सरकार को आलोचना पसंद नहीं-
सिलसिलेवार तरीके से देश के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों पर सीबीआई के छापे, खुफिया एजेंसियों का दबाव, विदेश जाने पर प्रतिबंध और सीनियर टीवी न्यूज़ जर्नलिस्टों के कार्यक्रमों के प्रसारण की समय सीमा, कंटेंट तय कर फिर उन्हें प्रतिबंधित और अंत में उन पर मैनेजमेंट का दबाव बनाकर इस्तीफा लेना क्या ये संकेत है कि मोदी सरकार को अपनी आलोचना या अपने दावों की पोल-खोल रिपोर्टिंग ज़रा भी पसंद नहीं है।

आडवाणी का अघोषित इमरजेंसी वाला बयान-
वहीं जुलाई 2015 में बीजेपी के सबसे वरिष्ठतम नेताओं में से एक लाल कृष्ण आडवाणी ने इंडियन एक्सप्रेस को “अघोषित आपातकाल” वाला एक इंटरव्यू दिया तो तत्कालीन राजनीति गरमा गई थी। विपक्ष के निशाने पर सरकार थी और सरकार हर बात पर सफाई देते नजर आ रही थी। लालकृष्ण आडवाणी ने इंडियन एक्सप्रेस को दिए इंटरव्यू में कहा था कि, “वो ये नहीं मानते कि भारत में दोबारा इमरजेंसी नहीं लगाई जाएगी। राजनीतिक नेतृत्व में कमियों के कारण विश्वास नहीं होता। मैं ये नहीं कह सकता कि इमरजेंसी फिर नहीं लगेगी।”

  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

Leave a Reply

Your email address will not be published.

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.