इंजीनियरिंग करने का ख़र्चा हर महीने बढ़ रहा साथ ही हर महीने घट रही इंजीनियरिंग में नौकरी

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ग्राउंड रिपोर्ट | न्यूज़ डेस्क

हमारे देश में सबसे ज़्यादा युवा आबादी है। हर साल एक नई खेप नौकरी के बाज़ार में उतरती है और उनमें से ज़्यादातर के हाथ मायूसी ही लगती है। अक्टूबर माह में बेरोज़गारी दर 8.5 फीसदी रही जो 3 साल में सबसे ज़्यादा है।

केअर रेटिंग एजेंसी के मुताबिक भारत में आने वाले समय में बेरोज़गारी और बढ़ेगी क्योंकि ज़्यादातर छात्र इंजीनियरिंग और आईटी सेक्टर में ही दाखिला ले रहे हैं जो कि बुरे दौर से गुज़र रहा है। भारत में सलाना हर छात्र औसतन 8331₹ शिक्षा पर खर्च करता है। प्रोफेशनल कोर्स में एडमिशन लेने वाले हर छात्र पर अब सालाना 72000₹ का खर्च आएगा। यानी शिक्षा पर खर्च बढ़ जाएगा। इसमें ज़्यादातर खर्च ट्यूशन फीस और परीक्षा फीस पर खर्च होता है इसमें किताबों और स्टेशनरी पर होने वाला खर्च अलग है। यानी फ्रोफेशनल कोर्स का खर्च 52% बढ़ चुका है। नौकरियां है नहीं, प्रतिस्पर्धा और खर्च दोगुना हो गए। फिर भी जब छात्र फीस बढ़ने पर विरोध करते हैं तो उन्हें देशविरोधी कह दिया जाता है। ज़रा सोचिए अगर नौकरियां नहीं दे रही सरकार तो शिक्षा का बजट ही घटा दे।

गिरावट की पांचवी तिमाही

भारत की जीडीपी लगातार गिरावट पर है। यह पांचवी तिमाही है जब विकास दर गिरी है। ऐसे माहौल में रोज़गार के अवसर पैदा होना नामुमकिन है उल्टा कंपनियां खर्च घटाने के लिए लोगों को निकालने लगेंगी या फिर नए लोगों को नौकरियां नहीं देंगी। शिक्षा पर खर्च 4 गुना बढ़ गया है। कई छात्र लोन लेकर महंगी शिक्षा हासिल करते हैं अगर उन्हें नौकरी नहीं मिली तो वो कहाँ जाएंगे।

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हर महीने घट रही आईटी और इंजीनियरिंग नौकरियां

IT and Staffing Techserve Alliance द्वारा किये गए एक सर्वे के अनुसार इंजीनियरिंग में हर माह नौकरियां घट रही हैं। सितंबर में 2.7 मिलियन नौकरियां मिली जो अक्टूबर में 0.18 फीसदी तक गिर गई। बेरज़गारी दर अक्टूबर माह में 8.5% रही जो तीन साल में सबसे अधिक है।

देश में प्रोफेशनल कोर्स में बच्चे दाखिला बेहतर भविष्य के लिए लेते हैं। क़र्ज़ लेकर इंजीनियरिंग करते हैं ताकि बेहतर नौकरी मिल सके लेकिन गिरती अर्थव्यवस्था और रोज़गार के अवसर मायूस करने वाले हैं।

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