क्या निजीकरण के ज़रिए आरक्षण खत्म करना चाह रही है सरकार?

No reservation in jobs after privatisation
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मोदी सरकार ने निजी कंपनियों को यह भरोसा दिलाया है कि अगर वे सरकारी कंपनियों को खरीदेंगे तो उन्हें लोगों की भर्ती के लिए जातिगत आरक्षण का पालन करने की ज़रुरत नहीं होगी। यानि देश की नामी सरकारी कंपनियां जैसे ही निजी हाथों में जाएंगी आरक्षण से मुक्त हो जाएंगी। (No Reservation after Privatisation).

हालांकि लाईव मिंट के अनुसार अनुसूचित जाति और जनजाति के जो कर्मचारी पहले से काम कर रहे हैं उनकी नौकरी को कोई खतरा नहीं होगा। केवल नई भर्तियों में आरक्षण लागू नहीं होगा।

सरकारी कंपनी के निजी हाथों में सौंपने के बाद सरकार यह सुनिश्चित करेगी की मौजूदा कर्मचारियों को सुरक्षित वातावरण मिले। प्राईवेट कंपनियों में आरक्षण लागू करवाना कानूनी तौर पर अभी संभव नहीं है।

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तो क्या धीरे-धीरे खत्म हो जाएगा आरक्षण?

सरकार धीरे-धीरे सभी सरकारी कंपनियों का नजीकरण कर रही है। निजी कंपनियों में नौकरियों में आरक्षण की व्यवस्था नहीं है। जिन बड़ी-बड़ी पब्लिक सेक्टर कंपनियों में लोग सरकारी नौकरी करने का ख्बाब देखते थे अब वह खत्म हो जाएगा।

निजीकरण हो जाने से आरक्षित सरकारी नौकरियों की संख्या भी कम हो जाएगी। हालांकि पब्लिक सर्विस सेक्टर में मौके उपलब्ध होते रहेंगे।

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सरकारी नौकरी लोगों को एक सुरक्षा का भाव देती है, इसीलिए देश में युवाओं की पहली पसंद सरकारी नौकरी ही होती है। निजीकरण के बाद ऐसी नौकरियां घट जाएंगी।

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विपक्षी दल लगातार प्राईवेट सेक्टर में भी आरक्षण की मांग कर रहे हैं लेकिन अभी तक इस कानून पर आम राय नहीं बन पाई है।

आरक्षण का विरोध करने वाले लोग इस कदम को अच्छा बता रहे हैं।

सोशल मीडिया पर इसको लेकर काफी प्रतिक्रियाएं आ रही हैं-

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