प्रसव के लिए अस्पताल में मौजूद नहीं डॉक्टर, तो कैसे जन्म लेगा बच्चा इस नए भारत में?

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ग्राउंड रिपोर्ट । वसीमुद्दीन । अहमदपुर

स्वास्थ सेवा मुहैया कराने के लिए सरकार ने कई प्राथमिक स्वास्थ केंद्र खोले। गांवो और कस्बों में लोगों को अस्पताल में प्रसव कराने के लिए प्रेरित करने को सरकार ने करोड़ों रुपए विज्ञापनों पर फूंक दिए। अब देश में अस्पताल भी खुल गए, लोग प्रसव कराने अस्पताल भी पहुंचने लगे। लेकिन उनके हाथ लगा बिना डॉक्टर वाला खाली खंडहर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र। कहीं डॉक्टर नहीं हैं, जहां है वहां डॉक्टर मौजूद नहीं रहते। हालिया मामला है मध्यप्रदेश के अहमदपुर स्वास्थ्य केंद्र का, जहां प्रसव कराने पहुंची महिला दिन भर दर्द से कराहती रही लेकिन उसकी गुहार सुनने को अस्पताल में कोई मौजूद नहीं था। जो दो स्टाफ नर्स अस्पताल में नियुक्त थी उनमें से एक खुद गर्भवती होने की वजह से गैरमौजूद थी, तो दूसरी बेटी की तबीयत खराब होने की वजह से घर चली गई थी। ऐसे में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में कोई वैकल्पिक सुविधा मौजूद नहीं थी। नतीजा महिला को दूसरे स्वास्थ्य केंद्र रेफर करना पड़ा। मध्यप्रदेश में कमलनाथ सरकार जल्द ही दिल्ली की तर्ज पर मोहल्ला क्लीनिक खोलने की योजना बना रही है, अच्छी बात है। लेकिन उनसे सवाल यह कि जो पहले से मौजूद प्राथमिक स्वास्थ केंद्र हैं, वहां की व्यवस्था कब ठीक होगी?

क्या है पूरा मामला?

सीहोर जिले के श्यामपुर तहसील के अहमदपुर के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में अजीब नजारा देखने को मिला। अस्पताल तो खुला था लेकिन अस्पताल को भगवान भरोसे खुला छोड़कर डॉक्टर घर चले गए थे। जब प्रसव के लिए प्रसूता चतुर बाई पति जसवंत सिंह, उम्र 26 वर्ष, ग्राम उमरझिर को प्रसव के लिए स्वास्थ केंद्र अहमदपुर लाया गया तो दर्द से तड़पती प्रसूता को प्रसव कराने के लिए अस्पताल के अंदर कोई मौजूद नहीं मिला। जब प्रसव के लिए महिला को लाया गया था, तो स्वास्थ्य केंद्र अहमदपुर का स्टाफ परिजनों को नदारद मिला। दर्द के मारे तड़प रही चतुर बाई की सुनने वाला कोई वहां मौजूद नहीं था। जब इस संबंध में दूरभाष द्वारा हमारे संवाददाता ने बीएमओ एचपी सिंह को पूरे घटनाक्रम से अवगत कराया तो उन्होंने कहा कि मैं 2 मिनट में पूछ कर बताता हूं क्या परेशानी है। वहीं स्वास्थ केंद्र अहमदपुर के प्रभारी केसी मुनिया को भी दूरभाष से चर्चा की गई तो उनका कहना है कि-

स्टाफ नर्स अपने इलाज के लिए चली गई हैं एक और ए एनएम दो प्रसव कराके घर चली गई है उनके बच्चों का स्वास्थ्य ठीक नहीं था। हमारे पास दो पुरुष स्टाफ मौजूद हैं अगर कोई महिला सहयोग करें तो डिलीवरी करा देते हैं। नहीं तो उसे रिफर कर देते हैं।

केसी मुनिया , स्वास्थ केंद्र प्रभारी, अहमदपुर

प्रसव के लिए आई महिला चतुर बाई को स्थानीय लोगों की मदद से 108 द्वारा दूसरे स्वास्थ्य केंद्र भेज दिया गया।

देश में बदहाल है स्वास्थ व्यवस्था

1.कैग की रिपोर्ट के मुताबिक देश के कई राज्यों द्वारा राष्ट्रीय स्वास्थ मिशन का 29 प्रतिशत फंड इस्तेमाल ही नहीं किया गया।

2.भारत की मातृ मृत्यु के वैश्विक बोझ में अभी भी 17% हिस्सेदारी है।

3.भारत में ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों में मानव संसाधन और बुनियादी ढांचे की कमी से जूझ रहे हैं। प्राथमिक स्वास्थ केंद्रों में 20% कर्मचारियों की कमी है, 29% में नियमित रूप से पानी की आपूर्ति नहीं होती, 26% में बिजली की आपूर्ति की कमी है और 11% स्वास्थ केंद्र सड़कों से नहीं जुड़े हैं।

ऐसी स्थिति में स्वास्थ्य केंद्रों की बदहाली होना तो तय है। भारत में सरकार ने लोगों को झाड़ फूंक और घरेलू उपचार से बाहर निकालने के लिए कई योजनाएं चलाई, लोगों को जागरुक किया। लोगों की मानसिकता में भी काफी बदलाव हुआ है। लेकिन आज भी हमारे देश के कई लोग प्राथमिक स्वास्थ सेवाओं से वंचित हैं। आए दिन हम खबरें पड़ते हैं, जब अस्पतालों में मरीज़ों के लिए बिस्तर नहीं होता तो कहीं ऑक्सीज़न खत्म हो जाती है, कई बार महिलाओं की सही समय पर प्रसव न होने की वजह से मौत भी हो जाती है। इस मामले पर सरकार को संज्ञान लेने की सख्त ज़रुरत है।

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