निवार तूफान और जलवायु परिवर्तन

Nivar Cyclone: जलवायु परिवर्तन से जुड़े हैं निवार के तार?

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कल रात पुडुचेरी के तटों से टकराता हुआ चक्रवाती तूफान निवार (Cyclone Nivar) आज उत्तर-पश्चिम की ओर फ़िलहाल रुख कर चुका है। लेकिन पुडुचेरी और तमिलनाडु में कई हिस्सों में लगातार बारिश का दौर जारी है और इस तूफ़ान ने इस क्षेत्र में काफी नुकसान पहुंचाया है। तमिलनाडु के एडिशनल चीफ सेक्रेट्री अतुल्य मिश्रा के मीडिया को दिए बयान के मुताबिक़, इस तूफान (Nivar Cyclone) की वजह से राज्य में अब तक 3 लोगों की मौत हो गई है और 3 और लोगों के घायल होने की फ़िलहाल सूचना है।

विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन से जुड़े हैं निवार (Nivar Cyclone) के तार, और इसकी वजह से घातक हो रहा है इसका वार।

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मानव ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन के कारण ग्लोबल वार्मिंग द्वारा लाया गया महासागर का गर्म तापमान, ट्रॉपिकल (उष्णकटिबंधीय) चक्रवातों के गठन और तेज़ तीव्रता का समर्थन करते हैं। हाल के दशकों में सबसे मज़बूत तूफानों की तीव्रता में वैश्विक वृद्धि हुई है: जून में प्रकाशित एक अध्ययन में पाया गया कि सबसे ताक़तवर तूफानों का अनुपात एक दशक में लगभग 8% बढ़ रहा है।

जलवायु परिवर्तन से कैसे जुड़े हैं (Nivar Cyclone) के तार

हाल ही में एक अध्ययन में निष्कर्ष निकाला गया है कि “समुद्र की सतह और उपसतह परिस्थितियों ने चक्रवात ओखी (Ockhi) के उत्पत्ति और गहनता में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई”, एक बहुत ही समान चक्रवात जो लगभग तीन साल पहले उसी क्षेत्र में पड़ा था, जिससे 844 मौतें हुई थीं। दुनिया के अन्य हिस्सों की तरह, बंगाल की खाड़ी में समुद्री सतह का तापमान पिछले दशकों में लगातार बढ़ रहा है।

रैपिड इंटेंसीफिकेशन (तेज़ तीव्रता)। कई अध्ययनों के अनुसार, ट्रॉपिकल (उष्णकटिबंधीय) चक्रवातों का बढ़ता अनुपात तेज़ी से विकसित हो रहा है, जिसे रैपिड इंटेंसीफिकेशन (तेज़ तीव्रता) के रूप में जाना जाता है – ये बदलाव जलवायु परिवर्तन से जुड़े हैं। गर्म समुद्र का पानी एक कारक है जो रैपिड इंटेंसीफिकेशन (तेज़ तीव्रता) गति को बढ़ाता है, तो मानव ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन के कारण समुद्र के उच्च तापमान इसकी अधिक संभावना बनाता है। रैपिड इंटेंसीफिकेशन (तेज़ तीव्रता) एक खतरा है क्योंकि यह पूर्वानुमान लगाना मुश्किल बना देता है कि एक तूफान कैसे व्यवहार करेगा और इसलिए तूफान की लैंडफॉल से पहले  तैयार होना भी मुश्किल कर देता है।

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गर्म वातावरण और अधिक तीव्र वर्षा। कार्बन उत्सर्जन की वजह से धरती का वातावरण गर्म हो रहा है। गर्म माहौल अधिक पानी पकड़ सकता है, जो चक्रवातों के दौरान अत्यधिक वर्षा का कारण बनता है, जिससे बाढ़ का खतरा बढ़ जाता है। वैज्ञानिकों ने वायुमंडलीय नमी में वृद्धि को सीधे मानव जनित जलवायु परिवर्तन के साथ जोड़ा है। ग्लोबल वार्मिंग की वजह से वैश्विक स्तर पर हाल के दशकों में रिकॉर्ड तोड़ बारिश की घटनाओं में काफी वृद्धि हुई है, और वैज्ञानिकों का अनुमान है कि निरंतर जलवायु परिवर्तन के साथ चक्रवातों से वर्षा बढ़ेगी।

उच्च समुद्र का स्तर और बढ़े तूफान महोर्मि। चक्रवात से संभावित तूफान महोर्मि अक्सर तूफान से सबसे खतरनाक जोखिम होते हैं। जलवायु परिवर्तन से संबंधित तूफान महोर्मि में वृद्धि ,समुद्र के बढ़ते स्तर, बढ़ते आकार और बढ़ती तूफानी हवा की गति की वजह से हो सकती है। वैश्विक समुद्र का स्तर पहले से ही मानव कार्बन उत्सर्जन के परिणामस्वरूप लगभग 23 cm बढ़ गया है – गंभीर रूप से उस दूरी को बढ़ाते हुए जिस तक तूफान पहुच सकता है।

इसके अलावा, बंगाल की खाड़ी में ट्रॉपिकल (उष्णकटिबंधीय) चक्रवात एल नीनो-दक्षिणी दोलन (El Niño–Southern Oscillation) (ENSO) से प्रभावित होते हैं, एक मौसम संबंधी घटना जो पेसिफ़िक (प्रशांत) महासागर के कुछ क्षेत्रों में हवा के पैटर्न और समुद्र की सतह के तापमान को दुनिया के विभिन्न हिस्सों में परिणाम के साथ प्रभावित करता है।

वैज्ञानिकों ने ENSO के शीतक (कूलर) चरण, जो ला नीना (La Niña) के नाम से जाना जाता है, और बंगाल की खाड़ी में बढ़ती ट्रॉपिकल (उष्णकटिबंधीय) चक्रवात गतिविधि के बीच संबंध पाया है। क्योंकि हम वर्तमान में ला नीना (La Niña) अवधि का अनुभव कर रहे हैं, यह चक्रवात निवार की रचना के अंतर्निहित कारणों में से एक हो सकता है।

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए डॉ. रॉक्सी मैथ्यू कोल्ल, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रॉपिकल मीटिरोलॉजी में साइंटिस्ट और IPCC (आईपीसीसी) ओशन्स एंड क्रायोस्फीयर रिपोर्ट के प्रमुख लेखक, कहते हैं “अभी पेसिफ़िक (प्रशांत) क्षेत्र में ला नीना (La Niña) है, जो कि पेसिफ़िक (प्रशांत) की शीतक (कूलर) स्थिति है जो बंगाल की खाड़ी में स्थानीय पर्यावरणीय परिस्थितियों को साइक्लोजेनेसिस के लिए योग्य बनाती है।“ वो आगे कहते हैं, “पिछले 40 वर्षों के दौरान, छह चक्रवात – गंभीर चक्रवात श्रेणी में – नवंबर में तमिलनाडु तट से टकराये। इन छह में से पांच पेसिफ़िक (प्रशांत) में ला नीना (La Niña) जैसी स्तिथियों के दौरान घटित हुए। तो इसका मतलब है कि कुछ हद तक हम इस समय के दौरान बंगाल की खाड़ी में एक चक्रवात के मौसम की अपेक्षा कर रहे थे – और यह कोई आश्चर्य की बात नहीं है।

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अब अगर स्थानीय परिस्थितियों को देखें तो जलवायु परिवर्तन की भूमिका दिखाई दे रही है। चक्रवात निवार का मामला कई तरह से चक्रवात ओखी (Ockhi) के समान है। नवंबर 2017 में, चक्रवात ओखी (Ockhi) ने मध्यम चक्रवात से 24 घंटों में बहुत ही गंभीर-चक्रवात में तेजी से वृद्धि की, जिसके परिणामस्वरूप भारत और श्रीलंका में 844 लोगों की मौत हो गई। हमने पाया कि असामान्य रूप से गर्म समुद्र के तापमान ने 9 घंटे में एक अवसाद से लेकर चक्रवात तक इसके विकास का समर्थन किया और फिर 24 घंटे में इस को एक बहुत गंभीर-चक्रवात तक पौहचाया।

“बंगाल की खाड़ी गर्म पूल क्षेत्र का हिस्सा है, जहां तापमान नवंबर में लगभग 28-29 डिग्री सेल्सियस और कभी-कभी 30 डिग्री सेल्सियस से अधिक होता है। ये उच्च तापमान आमतौर पर साइक्लोजेनेसिस के लिए सहायक होते हैं। इसके शीर्ष पर ग्लोबल वार्मिंग तत्व है – इस समय तापमान विसंगतियाँ लगभग 0.5-1 ° C होती हैं और कुछ क्षेत्रों में बॉय (buoy) और सैटेलाइट अनुमानों के आधार पर 1.2 ° C तक पहुँच जाती हैं। हर 0.1 ° C का मतलब चक्रवात को बनाए रखने और विकसित करने के लिए अतिरिक्त ऊर्जा है। हम पाते हैं कि चक्रवात ओखी (Ockhi) के मामले की तरह इस तरह की गर्म स्थिति चक्रवात निवार के रैपिड इंटेंसीफिकेशन (तेज़ तीव्रता) का समर्थन कर सकती है।

“स्थानीय रूप से, हवाएँ भी चक्रवात गठन के पक्ष में हैं। मैडेन जूलियन ऑसिलेशन (MJO) – जो कि पूर्व की ओर बढ़ते हुए बादलों का एक बैंड है – वर्तमान में बंगाल की खाड़ी के दक्षिण में सक्रिय है। इसलिए समुद्र के अनुकूल वायुमंडलीय परिस्थितियों के कारण साइक्लोजेनेसिस और जलवायु परिवर्तन से रैपिड इंटेंसीफिकेशन (तेज़ तीव्रता) लाने में मददगार है, नतीजतन हमारे पास अधिल तीव्र चक्रवात निवार है।”

भारती इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक पॉलिसी, इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस में अनुसंधान निदेशक और सहायक एसोसिएट प्रोफेसर और महासागरों के IPCC (आईपीसीसी) और क्रायोस्फीयर पर विशेष रिपोर्ट के कोऑर्डिनेटिंग लीड लेखक , डॉ. अंजल प्रकाश, कहते हैं, “जैसा कि हम चक्रवात निवार के विकास का अनुसरण कर रहे हैं, तटीय और उत्तर आंतरिक तमिलनाडु, पुदुचेरी, दक्षिण तटीय आंध्र प्रदेश और रायलासीमा जैसे स्थानों को लाल श्रेणी में डाला दिया गया है, जिसका अर्थ है कि ये क्षेत्र गंभीर रूप से प्रभावित होने की अपेक्षा है।

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“2020 की शुरुआत के बाद से, यह हिंद महासागर और बंगाल की खाड़ी में इस तरह की 8-वीं घटना है। चक्रवातों के इन आठ रिकॉर्डेड घटनाओं में से, अम्फान और निसर्ग सुपर साइक्लोन थे, जबकि गति और निवार को बहुत गंभीर चक्रवाती घटनाएँ माना जाता है। इस साल चार अपेक्षाकृत छोटे अवसाद थे जिन्होंने भी भारी बारिश और हवा को बढ़ाया।

“IPCC(आईपीसीसी) के वैज्ञानिक इस तरह की घटनाओं के बारे में चेतावनी देते रहे हैं। सबसे हालिया रिपोर्ट जिसमें ओशन्स और क्रायोस्फीयर को कवर किया गया था, ने स्पष्ट रूप से चेतावनी दी थी कि अगर ग्लोबल वार्मिंग को नहीं रोका गया, तो इन घटनाओं की संख्या और चक्रवातों की गंभीरता में वृद्धि होगी।

“2019 में, इस तरह के 12 घटनाएं दर्ज की गईं , जबकि 2020 में चक्रवात निवार 8-वीं ऐसी घटना है जो प्रमुख तरीकों से जीवन को प्रभावित करने वाली है।

(Nivar Cyclone) के वास्तविक प्रभाव

चक्रवात निवार (Nivar Cyclone) के वास्तविक प्रभाव को तभी बाद में मापा जा सकता है जब यह 25 नवंबर को लैंडफॉल बनाएगा, पिछले अनुभवों से पता चलता है कि शहरों और बस्तियों में अत्यधिक बारिश से बाढ़ आ जाएगी। इस तरह की गंभीर जलवायु घटनाओं से निपटने की दिशा में हमारा बुनियादी ढांचा नहीं बना है। निचले क्षेत्रों और डेंजर जोन से लोगों को निकालने के किये प्राथमिकता दी जाएगी ताकि उनकी जान बच सके। इससे भी बड़ी बात यह है कि हमें इस तरह की जलवायु संबंधी घटनाओं की ओर अपना बुनियादी ढाँचा सहमत बनाना चाहिए और भविष्य की घटनाओं के लिए एडाप्ट करने के लिए योजना बनानी चाहिए।

“बदलती जलवायु परिस्थितियां हर साल अधिक चक्रवाती घटनाओं को जोड़ रहीं है और इसलिए इन घटनाओं के प्रति एडाप्टेशन से हम लाखों लोगों के जीवन को बचा सकते हैं, विशेष रूप से गरीब और हाशिए पर रहने वाले लोग।”

Contributor: Nishant, a Lucknow-based journalist and environment enthusiast working towards prioritization of issues like climate change and environment in Hindi and vernacular media.

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