Pradeep Mehra की मेहनत का सर्कस बनाने वाले न्यूज़ चैनलों को कब शर्म आएगी?

फिल्ममेकर विनोद कापड़ी उत्तराखंड के अल्मोरा के रहने वाले प्रदीप मेहरा (Pradeep Mehra) की मेहनत को दुनिया के सामने लेकर आए। उन्होंने अपने वीडियो में दिखाया कैसे प्रदीप आर्मी जाने की तैयारी कर रहे हैं लेकिन उनके पास फिज़ीकल एक्सरसाईज़ का समय नहीं है, क्योंकि उन्हें परिवार की मदद करने के लिए काम पर जाना होता है। इसलिए प्रदीप रात में काम से घर हर रोज़ दौड़ते हुए जाते हैं।

यह वीडियो जैसे ही वायरल हुआ, न्यूज़ चैनलों का प्रदीप (Pradeep Mehra) को इंटर्व्यू के लिए फोन आने लगा। देखते ही देखते एक गरीब के संघर्ष की कहानी न्यूज़ चैनल के लिए टीआरपी का मसाला बन गई। वो उसे स्टूडियो में दौड़कर दिखाने को कहने लगे, जैसे जनता ने कभी देखा न हो कि एक गरीब कैसे दौड़ता है?

न्यूज़ 18 उत्तरप्रदेश ने इस युवा को अपने स्टूडियो में बुलाया और उसकी पूरी मेहनता का सर्कस बनाकर जनता को परोसा। उसे स्टूडियो में दौड़ाया गया और उस फूटेज को लूप पर लगा कर बार बार दिखाने लगे। इस वीडियो को देखने के बाद फिल्मेकर विनोद कापड़ी ने न्यूज़ चैनलों से अपील की इस बच्चे की मेहनत का सर्कस न बनाएं। प्रदीप (Pradeep Mehra) का फोन कई घंटों से बंद है, उसका भाई परेशान है, उसे काम पर जाना है। न्यूज चैनलों ने घंटों उसे अपने स्टूडियो में बैठाए रखा है।

विनोद कापड़ी ने न्यूज़ चैनलों को कहा कि वो प्रदीप का शोषण करना बंद करें। उसे स्टूडियो में न दौड़ाएं उसका वीडियो सोशल मीडिया पर मौजूद है चाहे तो मीडिया वाले बिना क्रेडिट दिए इसका इस्तेमाल कर सकते हैं। इस बच्चे को अपनी ज़िंदगी जीने दें। मैं सभी चैनलों से विनम्र निवेदन करता हूं।

हमारे देश के न्यूज़ चैनलों की यही दिक्कत है कि वो किसी भी खबर को संजीदगी से न लेकर उसे केवल टीआरपी का खेल समझ लेती हैं। गरीबी उनके लिए पॉर्न बन जाती है जिसका वो बेतहाशा इस्तेमाल करते हैं और फिर टीआरपी घट जाने पर अगले शिकार पर निकल जाते हैं।

जिस तरह से भारत के न्यूज़ चैनलों का स्तर गिर रहा है वो निराशाजनक है। हर खबर को बस सेंशेशन बनाकर पेश करना उनकी आदत बन चुकी है, चाहे उससे किसी की ज़िंदगी ही क्यों न खराब होती हो। यह हमने सुशांत सिंह राजपूत वाले केस में देखा, बुराड़ी मास सुसाईड और बाबा का ढाबा वाले केस में भी देखा। मीडिया से संजीदगी गायब है, खबर गायब है, संवेदना गायब है केवल और केवल तमाशा सर चढ़ कर बोल रहा है।

इस ह्यूमिलियेशन के बाद प्रदीप ने चैनलों से अपील की है कि वो उसे लक्ष्य हासिल करने में मदद करें। वो और इंटर्व्यू नहीं देना चाहता, उसे फेम नहीं चाहिए, वो बस अपना लक्ष्य हासिल करना चाहता है।

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