नेशनल मेडिकल कमीशन बिल- स्वायत्ता और एकाधिकार की लड़ाई

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न्यूज़ डेस्क।। देश में सरकार बदलती है, नई योजनाएं बनती हैं, पुरानी योजनाओं को नया कवर पहनाया जाता है। नए आयोग गठित किए जाते हैं, समीतियों पर समीतियां बैठाईं जाती हैं। दिखाया जाता है की सरकार बैठी नहीं है, 24 घंटे बिना रुके जनहित में काम कर रही है। कमीशन को खत्म कर आयोग बनाए जाते हैं, आयोगों को खत्म कर कमीशन बैठाए जाते हैं। जनता आश्वस्त रहती है की सरकार वाकई बैठी नहीं है। फिर क्यों समस्याएं जस की तस रहती है? कागज़ों पर दिखता विकास धरातल पर क्यों नहीं दिखाई देता?

योजना आयोग को खत्म कर नीति आयोग बनाने वाली सरकार एक बार फिर तैयार है, देश की एक और संस्था के नवीनीकरण के लिए। नेशनल मेडिकल कमीशन 2017 बिल के पारित हो जाने के बाद भारत की स्वास्थ शिक्षा व्यवस्था को रेगुलेट करने वाली मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया बन जाएगी नेशनल मेडिकल कमीशन, जिसका नियंत्रण खुद सरकार के पास होगा।

बिल के विरोध में इंडियन मेडिकल असोसिएशन की देश्वयापी हड़ताल

इंडियन मेडिकल असोसिएशन (IMA) नए नेशनल मेडिकल कमीशन बिल के विरोध में देशव्यापी हड़ताल कर रही है। देश भर में इस हड़ताल की वजह से चिकित्सीय सेवाएं बाधित रहीं। इंडियन मेडिकल असोसिएशन ने सरकार के नए बिल को गैर लोकतांत्रिक और गरीबों के खिलाफ बताया। ‘धिक्कार दिवस’ मना कर इस बिल का विरोध कर रहे डॉक्टरों ने कहा की देश भर के डॉक्टरों के विरोध के बावजूद सरकार यह बिल पास करवाना चाहती है, यह बहुत ही शर्मनाक है। सरकार अगर यह बिल पास करवाने में कामयाब हो जाती है, तो एमसीआई (MEDICAL COUNCIL OF INDIA) चिकित्सा शिक्षा को रेगुलेट करने वाली स्वायत्त संस्था को समाप्त कर नेशनल मेडिकल कमीशन का गठन किया जाएगा जिसकी कमान पूरी तरह सरकार के हाथों में होगी। विरोध कर रहे डॉक्टरों का कहना है की सरकार उनकी स्वायत्ता छीनकर भारतीय स्वास्थ क्षेत्र को बर्बाद करने जा रही है।

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मॉनसून सत्र में बिल पास करवाना चाहती है सरकार, विरोध बढ़ने के आसार..

सरकार संसद के मॉनसून सत्र के अंत तक नेशनल मेडिकल कमीशन बिल को पास करवाना चाहती है। 2016 में संसदीय समिति स्वास्थ ने सरकार को एक रिपोर्ट सौंपी थी जिसमें मौजूदा मेडिकल कांउंसिल ऑफ इंडिया के कामकाज पर उंगली उठाते हुए उसे पूरी तरह बदलने की सिफारिश की गई थी। स्वास्थ मंत्रालय और कानून मंत्रालय द्वारा तैयार किए गए बिल को केंद्रीय मंत्रीमंडल ने 15 दिसंबर 2017 को स्वीकृति दे दी थी। नए कानून में मौजूदा मेडिकल काउंसिल को भंग कर एक नई संस्था नेशनल मेडिकल कमीशन के गठन का प्रावधान है, जिसके अध्यक्ष और सदस्य का चुनाव सरकार खुद करेगी। इस बिल का उद्देश्य भारतीय स्वास्थ शिक्षा व्यवस्था को विश्वस्तरीय बनाना है।

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क्या हैं बिल के अन्य प्रावधान..

  • देश के किसी भी मेडिकल कॉलेज में एडमिशन के लिए केवल एक ही नीट की परीक्षा पास करनी होगी।
  • ग्रेजुएशन के बाद एक्ज़िट टेस्ट भी देश भर में एकसाथ आयोजित करवाए जाएंगे, जिससे डॉक्टरों की कमी को पूरा किया जा सके।
  • प्राईवेट और डीम्ड युनिवर्सिटी की 40 फीसदी सीटों पर फीस नया आयोग तय करेगा, जिससे प्राईवेट कॉलेजों की मनमानी फीस पर लगाम लगाई जा सकेगी।
  • 25 सदस्यीय आयोग में 21 डॉक्टर्स होंगे, अध्यक्ष की नियुक्ति कैबिनेट सेक्रेटरी द्वारा होगी।
  • पहले इस बिल में ब्रिज कोर्स का भी प्रावधान था जिसके ज़रिए आयुर्वेदिक, युनानी और होम्योपैथिक डॉक्टर्स को ऐलोपैथिक दवाईंयां लिखने का अधिकार दिया गया था। लेकिन मेडिकल असोसिएशन के विरोध के बाद फिलहाल इस प्रावधान को हटा लिया गया है।

मेडिकल काउंसिल को स्वायत्ता से ज़्यादा एकाधिकार खत्म होने की चिंता?

मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया में कुछ लोगाों का एकाधिकार है, जो पूरी चिकित्सा व्यवस्था को प्रभावित करते हैं। यह संस्था चिकित्सीय शिक्षा से जुड़े सभी अहम फैसले लेती है। जिसमें सरकार का कोई दखल नहीं होता। सरकार का मत है की मौजूदा मेडिकल काउंसिल शिक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने में सक्षम नहीं है। क्योंकि सभी सदस्य चिकित्सक है वे जनता का हित देखने से ज़्यादा खुद का हित देखते हैं। यह संस्था बेलगाम होकर फैसले ले रही है। कुछ विशेष लोगों का प्रभाव होने की वजह से यह संस्था भ्रष्टाचार का अड्डा बन गई है।

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सवाल जो पूछे जाने चाहिए-

  • क्या मेडिकल असोसिएशन को स्वायत्ता से ज़्यादा एकाधिकार खत्म होने का डर सता रहा है?
  • क्या सरकार धीरे-धीरे सभी स्वायत्त संस्थाओं को खत्म करती जा रही है?
  • क्या नया बिल देश की स्वास्थ व्यवस्था को बेहतर बना पाएगा?
  • क्या राज्य स्तरीय परीक्षा खत्म करवाकर एक ही एंट्रेंस एक्ज़ाम करवाना सही फैसला है?
  • क्या प्राईवेट कॉलेजों की फीस पर नियंत्रण देश में प्राईवेट मेडिकल सेक्टर को हतोत्साहित नहीं करेगा?
  • यूजीसी को स्वायत्त करना चाहती है सरकार, क्या फिर मेडिकल काउंसिल की स्वायत्ता खत्म करना, विरोधाभास नहीं दिखाता ?

फिलहाल सरकार इस कानून को पास कराने के फुल मूड में है। कानून के पास हो जाने के बाद एक और संस्था पर सरकार का पूरा नियंत्रण होगा। इसके बाद हम उम्मीद कर सकते हैं की देश के हर गांव में डॉक्टर पहुंच जाएंगे। 0.6 डॉक्टर प्रति 1000 व्यक्ति का अनुपात 1 डॉक्टर प्रति हज़ार व्यक्ति पर पहुंच जाएगा। सरकार की आयुष्मान भारत योजना की मदद से भारत के गरीब, मेडिकेयर के तले आ जाएंगे।