चीन नहीं कर पाएगा भारतीय बाज़ार पर कब्ज़ा, मोदी सरकार का मास्टरस्ट्रोक

China FDI in India
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Ground Report | News Desk

लॉकडाउन की वजह से देश की बड़ी-बड़ी कंपनियां आर्थिक तौर पर चुनौतियों का सामना कर रही हैं, इसी का फायदा उठा कर चीन भारतीय कंपनियों के अधिग्रहण की कोशिश में लगा था। वह भारतीय कंपनियों में निवेश कर उसमें बड़ी हिस्सेदारी खरीद रहा था ताकि भारत के बाज़ार पर कब्ज़ा जमा सके। मोदी सरकार ने इसे रोकने के लिए एफडीआई यानी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के नियम बदल दिए हैं।

केंद्र सरकार ने अवसरवादी अधिग्रहण पर अंकुश लगाने के लिए मौजूदा FDI नीति की समीक्षा की है। सरकार ने एफडीआई पॉलिसी, 2017 के पारा 3.1.1 में संशोधन का फैसला किया है। इसके तहत भारत की सीमा से सटे देशों की कंपनी या इंडिविजुअल केवल उन्हीं कंपनियों और सेक्टर्स में निवेश कर सकते हैं जिसकी इजाजत सरकार ने दी है। इसका सीधा असर पाकिस्तान, चीन और बांग्लादेश जैसे देशों के निवेशकों पर होगा। पाकिस्तान और बांग्लादेश की कोई कंपनी या इंडिविजुअल केवल सरकारी रास्ते से भारत में निवेश कर सकते हैं। पाकिस्तान का निवेशक भारतीय डिफेंस, स्पेस, एटॉमिक एनर्जी और अन्य सेक्टर्स जहां इसकी पाबंदी है, उसमें निवेश नहीं कर सकते हैं।

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पिछले दिनों चाइनीज सेंट्रल बैंक ने HDFC के करोड़ों शेयर खरीदे थे जिससे उसकी हिस्सेदारी कंपनी में 1 फीसदी को पार कर गई। उस समय ऐसी रिपोर्ट आई थी कि चीन पूरी दुनिया में अपना निवेश तेजी से बढ़ा रहा है। कोरोना के कारण पूरी दुनिया का शेयर मार्केट क्रैश कर गया है और शेयर के भाव में भारी गिरावट आई है। चीन इसे अपने लिए अवसर के रूप में देख रहा है और तेजी से निवेश बढ़ा रहा है।

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