NEET PG Counseling कराने का आदेश जारी हुआ तो अब आरक्षण पर बवाल

लंबे समय से NEET PG Counseling कराने के लिए रेज़ीडेंट डॉक्टर्स दिल्ली की सड़कों पर विरोध कर रहे थे। सुप्रीम कोर्ट ने अब काउंसलिंग कराने का आदेश दे दिया है, लेकिन एक तबका है जिसे काउंसलिंग कराने के साथ आए आरक्षण के निर्णय पर आपत्ती है, उनका कहना है कि इस फैसले के बाद जनरल कैटेगरी के छात्रों के लिए 37 फीसदी सीट कम हो जाएंगी जिससे भेदभाव बढ़ेगा। आईये समझते हैं की मामला है क्या?

शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया ने साल 2021-22 के लिए NEET PG Counseling शुरु कराने का अंतरिम आदेश दिया और इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। इस सत्र से एडमिशन में 10 प्रतिशत EWS और 27 फीसदी OBC आरक्षण लागू करने का भारत सरकार का जो अनुरोध था उसे भी सुप्रीम कोर्ट ने मान लिया।

साल 2021-22 में मैडिकल के पीजी कोर्स में जो छात्र एडमिशन लेंगे उनको आरक्षण का फायदा मिल सकेगा। यानि वो छात्र जिनकी सालाना पारिवारिक आय 8 लाख से कम हैं वो 10% EWS कोटे के तहत पीजी कोर्स में एडमिशन ले सकेंगे और 27 फीसदी ओबीसी छात्र भी फायदा उठा सकेंगे।

क्यों उठ रहे हैं सवाल?

जो एक्सपर्ट्स और अकेडमिशियन हैं उनका कहना है कि रिज़र्वेशन कोटा पहले से चल रहे ऑल इंडिया रिजर्वेशन कोटे पर कैसे लागू हो सकता है। इससे जनरल कैटेगरी के छात्रों के लिए अवसर और कम हो जाएंगे। इनका कहना है कि वित्तीय रुप से कमज़ोर छात्रों को आरक्षण देने का कदम सही है लेकिन यह कोटा देने के लिए जनरल कैटेगरी के छात्रों की सीटें कम करना गलत होगा। इसकी जगह मैडिकल संस्थानों में सीट बढ़ाई जानी चाहिए ताकि जनरल की सीटें कम न हो।

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दो स्तर पर रिजर्वेशन का विरोध

दरअसल नीट में अंडर ग्रेजुएशन में एडमिशन के दौरान छात्रों को रिजर्वेशन का फायदा मिलता ही है। लेकिन पीजी कोर्स में यह आरक्षण अभी तक लागू नहीं था। जो विरोध कर रहे हैं उनका कहना है कि जिन छात्रों को ज़रुरत थी उन्हें अंडर ग्रेजुएशन में तो फायदा मिल ही चुका है, फिर दो स्तर पर आरक्षण लागू करने से न सिर्फ जनरल कैटेगरी के छात्रों के अवसर छिन जाएंगे बल्कि इससे भेदभाव भी बढ़ेगा। नई आरक्षण नीति से जनरल की 37 फीसदी सीटें कम हो जाएंगी।

NEET PG Counseling विवाद

आपको बता दें की वर्ष 2021-22 की नीट पीजी काउंसलिंग जल्द से जल्द करवाने के लिए रेज़ीडेंट डॉक्टर्स लंबे समय से विरोध कर रहे थे। यह मामला कई दिनों से आरक्षण की वजह से अटका हुआ था। डॉक्टर्स का कहना था कि काउंसलिंग न होने की वजह से नए डॉक्टर्स नहीं आ पा रहे हैं और मौजूदा स्वास्थ्य कर्मियों पर कोरोना की वजह से काम का प्रेशर बढ़ रहा है। विरोध के बाद भारत सरकार ने डॉकटर्स को आश्वासन दिया था कि वो इस मामले को जल्द से जल्द निबटा लेंगे। अब सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम आदेश देते हुए नीट पीजी काउंसलिंग आरक्षण के साथ शुरु करने का फैसला लिया है। लेकिन अब इसका भी विरोध एक तबके में देखा जा रहा है।

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