Fri. Dec 13th, 2019

groundreport.in

News That Matters..

महिलाओं के खिलाफ हिंसा में उत्तर प्रदेश नंबर वन, 1 साल में 28 हज़ार लोगों की हत्या : NCRB

1 min read
alwar gangrape case, rajasthan, rajasthan police, cm ashok gehlot, gangrape

प्रतीकात्मक फोटो।

Sharing is Important
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

Ground report । Nehal Rizvi

लंबे इंतजार के बाद आखिरकार सरकार ने अपराध के आंकड़े जारी कर दिए हैं। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (एनसीआरबी) ने अपना डेटा जारी किया है। इसमें लगभग सभी तरह के अपराधों का ब्यौरा दिया गया है, लेकिन क्राइम के इन आंकड़ों में लिंचिंग, धर्म के नाम पर हत्या और खाप पंचायतों के फैसले पर दी गई मौत के आंकड़े शामिल नहीं हैं।

अधिकारियों ने कहा कि मॉब लिंचिंग, प्रभावशाली लोगों द्वारा हत्या, खाप पंचायत द्वारा आदेशित हत्या और धार्मिक कारणों से की गई हत्या के नए सब-हेड के तहत एकत्र किए गए आंकड़े प्रकाशित नहीं किए गए हैं, जिसके परिणामस्वरूप 2017 की एजेंसी की रिपोर्ट में आंशिक देरी हुई है। साल 2017 की एनसीआरबी रिपोर्ट पूरे एक साल की देरी से जारी की गई है। इस रिपोर्ट में महिलाओं के खिलाफ अत्याचार के सबसे अधिक मामले उत्तर प्रदेश में दर्ज किए गए हैं।

इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, नई रिपोर्ट ने बड़े पैमाने पर 2016 के संस्करण के तरीके का पालन किया है। हालांकि, एनसीआरबी ने राज्य के खिलाफ अपराधों और साइबर अपराधों की श्रेणी में सुधार को रोक दिया है।

एक अधिकारी ने कहा, ‘यह चौंकाने वाला है कि मॉब लिंचिंग आदि से जुड़े आंकड़ों को जारी नहीं किया गया। ये आंकड़े पूरी तरह से तैयार थे। केवल शीर्ष अधिकारियों को पता होगा कि ये आंकड़े क्यों नहीं जारी किए गए।’

एनसीआरबी के निदेशक ईश कुमार ने देश भर में मॉब लिंचिंग और हत्याओं की घटनाओं के कारण इन नए उप-वर्गों के तहत आंकड़ों को वर्गीकृत करने का फैसला किया था। मवेशियों की चोरी या तस्करी के संदिग्ध सामान, बच्चे को उठाने की अफवाहों, आदि सहित कई कारणों से लिंचिंग की घटनाएं हुई हैं। बहुसंख्यक मामलों में विशेष रूप से स्वयंभू गौ रक्षकों ने मुस्लिमों और दलितों को अपना शिकार बनाया।

एनसीआरबी की रिपोर्ट में कहा गया है कि 2017 में हत्या के मामलों में 5.9 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। 2017 में 28,653 हत्याएं दर्ज की गईं, जो कि साल 2016 के 30,450 से कम है। हत्या के सबसे अधिक मामले विवाद (7,898 मामले) के कारण हुए जिसके बाद व्यक्तिगत प्रतिशोध या दुश्मनी (4,660) और लाभ (2,103) के मामले सामने आए।

एनसीआरबी के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, 2017 में देशभर में संज्ञेय अपराधों के 50 लाख से अधिक मामले दर्ज किए गए जो कि साल 2016 के आंकड़ों से 3.6 अधिक हैं जब जब 48 लाख प्राथमिकी दर्ज की गई थी।

एनसीआरबी के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, 2017 में देशभर में संज्ञेय अपराधों के 50 लाख से अधिक मामले दर्ज किए गए जो कि साल 2016 के आंकड़ों से 3.6 अधिक हैं जब जब 48 लाख प्राथमिकी दर्ज की गई थी। 2017 में अपहरण के मामलों में 9 फीसदी की वृद्धि देखी गई जब 95,893 मामले दर्ज किए गए थे जबकि 2016 में 88,008 मामले के दर्ज किए गए।

2017 में देश भर में महिलाओं के खिलाफ अपराध के 3,59,849 मामले दर्ज किए गए, जिसमें लगातार तीसरे साल भी वृद्धि हुई. 2015 में महिलाओं के खिलाफ अपराधों के 3,29,243 मामले और 2016 में 3,38,954 मामले दर्ज किए गए थे। महिलाओं के खिलाफ अपराध के रूप में वर्गीकृत मामलों में हत्या, बलात्कार, दहेज हत्या, आत्महत्या, तेजाब हमले, महिलाओं के खिलाफ क्रूरता और अपहरण आदि शामिल हैं।

एनसीआरबी के आंकड़ों के अनुसार, महिलाओं के खिलाफ हिंसा अत्याचार के सबसे अधिक मामले उत्तर प्रदेश (56,011) में दर्ज किए गए हैं। यूपी के बाद महाराष्ट्र में 31,979 मामले दर्ज किए गए। आंकड़े के मुताबिक, पश्चिम बंगाल में 30,992, मध्य प्रदेश में 29,778, राजस्थान में 25,993 और असम में 23,082 महिलाओं पर हुए अपराध के मामले दर्ज किए गए हैं।

हालांकि, दिल्ली में लगातार तीसरे साल महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामलों में कमी आई।साल 2017 में 13076 एफआईआर दर्ज किए गए जो कि साल 2016 में 15310 और 2015 में 17222 से कम हैं। असम ने 2017 में देश में उच्चतम अपराध दर 143 दर्ज की। अपराध दर प्रति एक लाख लोगों पर दर्ज अपराध होती है।

अपराध दर के मामले में ओडिशा और तेलंगाना दूसरे स्थान पर रहे जिनकी अपराध दर 94 रही, उसके बाद हरियाणा (88) और राजस्थान (73) का स्थान रहा।

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Copyright © All rights reserved. Newsphere by AF themes.