National Education Policy: क्या है शिक्षा नीति 2020? समझिये

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भारत सरकार ने नई शिक्षा नीति (National Education Policy) को मंजूरी दे दी है. इससे पहले 1986 में राष्ट्रीय शिक्षा नीति बनाई गई थी और 1992 में इसमें संशोधन किया गया था. एक लम्बे वक्त के बाद यह उम्मीद की जा रही है कि यह नई शिक्षा नीति देश के शिक्षा क्षेत्र में नए और बेहतर परिवर्तनों की शुरुआत करेगी. नई शिक्षा नीति में स्कूल एजुकेशन से लेकर हायर एजुकेशन तक कई बड़े बदलाव किए गए है. आइये मुख्य दस बिंदुओं में आपको नई शिक्षा नीति के बारे में बताते है.

नई शिक्षा नीति 2020 : शिक्षा नीति की दस ज़रूरी बातें

  • बोर्ड परीक्षाओं में होगा बदलाव: 10 वीं और 12 वीं कक्षा के छात्रों के लिए बोर्ड परीक्षा जारी रहेंगी. छात्रों को कोचिंग की आवश्यकता समाप्त करने के लिए बोर्ड और प्रवेश परीक्षाओं की मौजूदा प्रणाली में सुधार किया जाएगा. छात्रों के समग्र विकास को प्रोत्साहित करने के लिए बोर्ड परीक्षा को फिर से डिजाइन किया जाएगा. छात्र अब नई नीति के अनुसार उन विषयों का खुद चुनाव कर सकेंगे जिनके लिए वह बोर्ड परीक्षा देने जा रहे हैं.
  • स्कूलों में 10+2 खत्म, अब शुरू होगा 5+3+3+4 फॉर्मेंट: स्कूलों में 10+2 को खत्म कर छात्रों की पढ़ाई सरल बनाने के लिए 5+3+3+4 का फॉर्मेट लागू किया जाएगा. शुरू के पांच सालों की पढ़ाई के लिए एक नया पाठ्यक्रम तैयार होगा. अगले तीन साल का स्टेज कक्षा 3 से 5 तक का होगा. इसके बाद 3 साल का मिडिल स्टेज आएगा यानी कक्षा 6 से 8 तक का स्टेज. अब छठी से बच्चे को प्रोफेशनल और स्किल की शिक्षा दी जाएगी. स्थानीय स्तर पर इंटर्नशिप भी कराई जाएगी। चौथा स्टेज (कक्षा 9 से 12वीं तक का) 4 साल का होगा। इसमें छात्रों को विषय चुनने की आजादी रहेगी। साइंस या गणित के साथ फैशन डिजाइनिंग भी पढ़ने की आजादी होगी. पहले कक्षा एक से 10 तक सामान्य पढ़ाई होती थी. कक्षा 11 से विषय चुन सकते थे.
  • एमफिल पाठ्क्रम होगा बन्द: नई शिक्षा नीति के तहत एमफिल पाठ्यक्रम को बन्द कर दिया जाएगा. इसकी जगह पर छात्र मास्टर डिग्री या चार साल की बैचलर डिग्री प्रोग्राम के बाद सीधा पीएचडी कर सकते हैं. जो छात्र शोध के क्षेत्र में जाना चाहते हैं उनके लिए चार साल का डिग्री प्रोग्राम होगा, जबकि जो लोग नौकरी में जाना चाहते हैं वो तीन साल का ही डिग्री प्रोग्राम करेंगे. वहीं शोध को बढ़ावा देने के लिए और गुणवत्ता में सुधार के लिए नेशनल रिसर्च फाउंडेशन की भी स्थापना की जाएगी.
  • SC, ST, OBC , SEDG के छात्रों के लिए राष्ट्रीय छात्रवृति पोर्टल शुरू किया जाएगा: नई शिक्षा नीति में सुधार के साथ-साथ एससी, एसटी, ओबीसी और अन्य छात्रों के लिए छात्रवृत्ति पोर्टल की शुरूआत की जाएगी जिसमें छात्रों की योग्यता को प्रोत्साहित करने का प्रयास किया जाएगा. निजी HEI को अपने छात्रों को बड़ी संख्या में छात्रवृति प्रदान का भी प्रयास किया जाएगा.
  • शिक्षा नीति (National Education Policy) में बढ़ती फीस पर लगेगी लगाम: नई शिक्षा नीति के तहत 2030 तक शत-प्रतिशत बच्चों को स्कूली शिक्षा में नामांकन कराने का लक्ष्य है. इसका मतलब हर बच्चे को शिक्षा से जोड़ना है. इसके अलावा राज्य स्कूल मानक प्राधिकरण में अब सभी सरकारी और निजी स्कूल शामिल होंगे. इससे निजी स्कूलों की मनमानी और फीस पर लगाम लगेगी.
  • थ्री लैंग्वेज बेस्ड स्कूली शिक्षा होगी: थ्री लैंग्वेज फॉर्मूले के बारे में NEP द्वारा हिंदी और अंग्रेजी के संदर्भ को अंतिम नीति दस्तावेज से हटा दिया गया है. नीति में कहा गया है, “बच्चों द्वारा सीखी जाने वाली तीन भाषाएं राज्यों, क्षेत्रों और छात्रों की पसंद होगी. तीन में से कम से कम दो भाषाएं भारतीय मूल की होनी चाहिए.
  • ग्रेजुएशन में 3-4 साल की डिग्री, मल्टीपल एंट्री और एग्जिट सिस्टम: नई नीति में मल्टीपल एंट्री और एग्जिट (बहु स्तरीय प्रवेश एवं निकासी) व्यवस्था लागू किया गया है. यदि छात्र किसी कारणवश पढ़ाई आगे नहीं कर सकता तो मल्टीपल एंट्री और एग्जिट सिस्टम में एक साल के बाद सर्टिफिकेट, दो साल के बाद डिप्लोमा और 3-4 साल के बाद डिग्री मिल जाएगी. 3 साल की डिग्री उन छात्रों के लिए है जिन्हें हायर एजुकेशन नहीं लेना है और शोध में नहीं जाना है। वहीं शोध में जाने वाले छात्रों को 4 साल की डिग्री करनी होगी. नई शिक्षा नीति के मुताबिक यदि कोई छात्र  इंजीनियरिंग कोर्स को 2 वर्ष में ही छोड़ देता है तो उसे डिप्लोमा प्रदान किया जाएगा. पांच साल का संयुक्त ग्रेजुएट-मास्टर कोर्स लाया जाएगा.
  • एमएचआरडी का नाम बदला गया: बुधवार को मानव संसाधन विकास मंत्रालय का नाम बदलकर शिक्षा मंत्रालय कर दिया गया है. केंद्रीय केबिनेट से इस नाम को मंजूरी भी मिल गई है.
  • 4 वर्ष की होगी बी.एड. की डिग्री: शिक्षण शिक्षा के लिए एक नया और व्यापक नेशनल करिकुलम तैयार किया जाएगा, जिसे NCFTE 2021, NCERT द्वारा NCERT के परामर्श से बनाया जाएगा.2030 तक शिक्षण के लिए न्यूनतम डिग्री योग्यता 4 वर्षीय एकीकृत बी. एड. डिग्री हो जाएगी. 2-वर्षीय बी.एड. कार्यक्रम केवल उन लोगों के लिए भी प्रस्तुत किए जाएंगे जिन्होंने पहले से ही अन्य विशिष्ट विषयों में स्नातक डिग्री प्राप्त की है.
  • जीडीपी का 6% हिस्सा शिक्षा के क्षेत्र में लगाया जाएगा: सरकार ने लक्ष्य निर्धारित किया है कि GDP का 6% शिक्षा में लगाया जाए जो कि अभी 4.43% है. इसमें बढ़ोतरी करके शिक्षा के क्षेत्र को बढ़ाया जाएगा.
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ये लेख स्वाति गौतम ने लिखा है. स्वाति ग्राउंड रिपोर्ट में शिक्षा, राजनीति व किसानो से जुड़े मुद्दों पर लिखती हैं.

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