हम उन पर नस्लीय टिप्पणी करते हैं, उनपर थूकते हैं, क्या उत्तरपूर्वी लोग हमारे अपने नहीं हैं?

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विचार | पल्लव जैन

“हिन्द देश के निवासी सभी जन एक हैं, रंग रूप वेश-भाषा चाहे अनेक हैं”

इस गीत के बोल हम बचपन से गुनगुना रहे हैं, हमें गर्व महसूस होता है कि भारत विविधताओं से भरा देश है। यहां अलग-अलग धर्म, संस्कृति के लोग एक साथ रहते हैं, लेकिन यह सब कहने मात्र को है। हमारा व्यवहार हमारा आचरण इसके उलट है, हम नस्लीय टिप्पणी करते हैं, रंग रूप के आधार पर हम अपने ही लोगों से भेदभाव करते हैं। उनके साथ हिंसा और दुर्व्यवहार करते हैं। हम अपने ही देश के लोगों को विदेशी बता देतें हैं सिर्फ उनका रूप देखकर।

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देश कोरोना संकट से जूझ रहा है। चीन से शुरू हुई इस बीमारी ने दुनियाभर के लोगों अपनी चपेट में ले लिया है। भारत में कई जगह नस्लीय टिप्पणी और हमले के मामले सामने आए। चीन का गुस्सा लोगों ने हमारे उत्तर पूर्व के भाइयों पर निकालना शुरू कर दिया। शॉपिंग मॉल में उत्तर पूर्व के छात्रों को जाने से रोका गया तो कहीं उत्तर पूर्व के लोगों के चेहरे पर थूका गया। आखिर क्यों? क्या वे इंसान नहीं है, हमारे अपने नहीं हैं?

उत्तर पूर्व के लोग कोरोना वायरस नहीं है, वे इंसान हैं हमारे अपने हैं। आपके मज़ाक में कहे गए शब्द लोगों के दिलों को आहत कर सकते हैं। मशहूर गायक लियांग चेंग ने एक वीडियो साझा किया है जिसमें वे अपने साथ हुई घटना के बारे में बता रहे हैं। समय निकालकर ज़रूर सुनिए वे क्या कह रहे हैं।

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Courtesy: liyang Chang