JNU छात्रों पर हुए जानलेवा अटैक के विरोध में कानपुर में मुस्लिम महिलाओं ने निकाला कैंडिल मार्च

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ग्राउंड रिपोर्ट । कानपुर

रविवार को जवाहर लाल नेहरु विश्वविद्यालय ( JNU) में हुए हमले और केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गये नागरिकता संशोधन कानून एवं एनआरसी के विरुद्ध आज कानपुर उत्तर प्रदेश में एक कैंडिल मार्च का आयोजन किया गया जिसमें बड़ी संख्या में मुस्लिम महिलाओं समेत समाज के सभी वर्गों ने भाग लिया और सरकार से इस लोकतंत्र एवं सविधान को बचाने की अपील की तथा इस विभाजनकारी नागरिकता संशोधन कानून को तुंरत वापस लेने की भी अपील की।

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कैण्डिल मार्च का शुभारंभ मोहम्मद अली पार्क, चमनगंज से शुरु होकर पूर्व निर्धारित मार्ग, हलीम कॉलेज चौराहा, रुपम चौराहा से होता हुआ लाल कुआं तक शांति पूर्ण तरीके से संपन्न हुआ। जुलूस में शामिल सभी लोग अपने हाथों में प्लेकार्ड लिये हुए थे। जिनमें नो सीए.ए.ए, नो एन.पी.आर, नो एनआरसी, जेएनयू हिंसा की न्यायिक जांच करो, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद पर प्रतिबंध लगाओ, हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई आपस में भाई आई, जेएनयू ब्लीडिस इत्यादि स्लोगन लिखे हुए थे।

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इस अवसर पर लोकतंत्र बचाओ आंदोलन कानपुर द्वारा लोगों से मोदी सरकार की जन विरोधी नीतियों के प्रतिरोध में 8 जनवरी 2020 को भारत बंद को सफल बनाने की अपील की गई। कैंण्डिल मार्च में मुख्य रुप से संयोजक कुलदीप सक्सेना, छोटे भाई नरोना, विष्णु शुक्ला, देवकुमार, विजय चावला, प्रदीप यादव, पी.सी. कुरील, मोहम्मद सुलेमान, नजमुस्साकिब, मो. खालिद अंसारी, अब्दुल हई, डॉ. नफ़ीस अख्तर आदि उपस्थित रहे।

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इस कैण्डिल मार्च में सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि प्रशासन द्वारा भी भरपूरप सहयोग देखने को मिला जबकि अभी कुछ दिन पूर्व इसी नागरिकता कानून के विरोध में हो रहे प्रदर्शन में कानपुर समेत यूपी के कई जिलों में हिंसा भड़क उठी थीं और दर्जनभर से अधिक जानें चली गयी थीं साथ ही यूपी पुलिस की भूमिका पर भी प्रश्न उठने लगे थे।

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