#MPElection2018: सीहोर विधानसभा में किस करवट बैठेगा ऊंट, बागी उम्मीदवारों से मिल रही जोरदार टक्कर

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सीहोर- मध्यप्रदेश। प्रदेश की राजनीति को लेकर मुख्य सीट माने जाने वाली सीहोर विधानसभा में इस बार चुनाव रोमांचक स्थिती में आ पहुंचा है। इस विधानसभा से अब कांटे की टक्कर देखने को मिल रही है। यहां बीजेपी में दो तीन फाड़ के बाद से कयास लगाए जा रहे हैं कि कोई भी विधायक की कुर्सी पर विराजित हो सकता है।

दरअसल सीहोर जिला इसलिए प्रदेश की राजनीति में मायनेे रखाता है क्योंकि इसी जिले की विधानसभा सीट बुधनी से प्रदेश के मुखिया शिवराज सिंह चौहान प्रदेश की राजनीति में चुनकर आते हैं। आपको बता दें यहां से बीजेपी के कई कद्दावर नेताओं ने पार्टी से बगावत की हैैै। वहीं कांग्रेस ने भी इस विधानसभा की राजनीति में अपनी प्रमुख पहचान बनाने वाले सुरेन्द्र ठाकुर को टिकट दिया है।

2003

मतदान की तारीख में अब सप्ताह से भी कम का समय बचा है। मतदान की तारीख नजदीक आते ही यहां उम्मीदवारों के चुनाव प्रचार भी तेज हो गए हैं। फिलहाल इलाके मतदाता यह बताने में सक्षम नहीं कि राजनीति का ऊंट किस तरफ करवट लेगा। मतदाताओं कि मानें तो मुख्य दावेदारों में चार उम्मीदवार हैं और चारों का अपना अपना जनाधार है।

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बीजेपी से बगावत कर निर्दलीय उम्मीदवार ऊषा सक्सेना पिछले चुनाव में कुल 1600 वोट से चुनाव हार गईं थी। वहीं कांग्रेस से बगावत करके आए निर्दलीय विधायक चुनने के बाद सुदेश राय को 5 साल के अंदर ही बीजेपी का उम्मीदवार बनाकर मैदान में उतारा है।

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सुदेश राय को बीजेपी से टिकट मिला तो पार्टी से दो बड़े जनसमर्थन के नेता सन्नी महाजन और रमेश सक्सेना ने बगावत कर दी थी। इसके अलावा सन्नी महाजन इस बार खुद निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर मैदान में हैं। वहीं कांग्रेस से 2003  में दमदारी के साथ चुनाव लड़ चुके सुरेन्द्र सिंह ठाकुर मैदान में हैं। कांग्रेस पार्टी ने यह टिकट बहुत सोच समझकर दिया है। लेकिन अब तक कांग्रेस प्रचार में पिछड़ती नजर आई है।

आंकड़ों पर नजर डालें तो ऊषा सक्सेना 4 बार विधायक रहे रमेश सक्सेना की पत्नी हैं। वहीं पिछली बार 1600 वोट के अंतर से हार का सामना करना पड़ा था।  इससे पहले भी सुरेन्द्र सिंह ठाकुर ने 2003  में बीजेपी को चुनौती दी थी। उस वक्त उन्होंने बीजेपी के उम्मीदवार रमेश सक्सेना को उनके गढ़़ में खूब टक्कर दी थी। लेकिन कुल 10000 के लंबे अंतर से चुनाव हार गए थे पर वोट समर्थन अच्छा रहा था।

 

इसके अलावा सन्नी महाजन भी एक बार उमा भारती की जनशक्ति पार्टी से मैदान मेंं  उतरे थे। इस बार  कई पार्टियां ने भी अपने उम्मीदवार मैदान में उतारे हैं। हालांकि यह तय करना मुश्किल होगा कि कौन उम्मीदवार कितना भारी है।

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फिलहाल बीजेपी पर इस सीट का खतरा मंडराने लगा है। वहीं कांग्रेस अगर अपने ही वोट बचा ले गई तो यह सीट अपने पास रख सकती है। खैर सीहोर विधानसभा का राजनीतिक गणित का गुणा भाग नतीजों के बाद ही जाहिर होगा। अभी फिलहाल सभी इंतजार में हैं कि इस ऊंट किस करवट अपनी गवाही देगा।

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बुधनी की जनता शिवराज से नाराज ? 

वहीं सीहोर जिले की बुधनी विधानसभा से शिवराज सिंह चौहान को जनता की नाराजगी झेलनी पड़ रही है।मुख्यमंत्री की कुर्सी संभाल रहे शिवराज सिंह चौहान अपनी परंपरागत सीट बुधनी से चुनाव लड़ रहे हैं । चुनाव प्रचार की जिम्मेदारी अपनी पत्नी साधना सिंह और पुत्र कार्तिकेय को सौंप रखी है।

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चुनाव प्रचार के दौरान साधना सिंह और कार्तिकेय दोनों को ही जनता की नाराजगी का सामना करना पड़ रहा है। नाराजगी की वजह वे स्थानीय नेता हैं, जिन्हें क्षेत्र की जनता की समस्याओं को सुलझाने की जिम्मेदारी शिवराज सिंह चौहान ने दी थी। कांग्रेस उम्मीदवार जनता की इस नाराजगी को अपनी सफलता के तौर पर देख रहे हैं।

कलेक्टर और एसपी ने किया ईवीएम कमिश्निंग का निरीक्षण

विधानसभा निर्वाचन-2018 को लेकर कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी तरुण कुमार पिथोड़े एवं पुलिस अधीक्षक  राजेश चंदेल द्वारा इछावर विधानसभा के ईवीएम कमिश्निंग का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान जिला निर्वाचन अधिकारी व पुलिस अधीक्षक द्वारा संबंधित अधिकारी व कर्मचारियों को आवश्यक निर्देश दिये गये।

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