MP Election: क्या आप मध्यप्रदेश के पहले मुख्यमंत्री के बारे में जानते हैं ?

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डेस्क।भोपाल.  मध्यप्रदेश की राजनीति रविशंकर शुक्ल के बिना शुरू नहीं होती। एक ऐसा शख्स जिसने सबसे पहले इस प्रदेश की कमान संभाली। आजादी के बाद प्रदेश बटने लगे और नए प्रदेश बनने लगे तो उसी दौरान हिन्दूस्तान के नक्शे के मध्य में एक प्रदेश बना नाम रखा मध्यप्रदेश। कहा भी जाता है जब मध्यप्रदेश के नक्शे को लेकर नेहरू के पास गए तो उन्होंने ने कहा था कि यह ऊंट जैसा कौनसा राज्य बना लाए।

मध्यप्रदेश उन हिस्सों को मिलाकर बना जिन्हें कई राज्य बनने के दौरान छूट गए थे। 28 नंव बर को मध्यप्रदेश में मतदान होने है दिसंबर में प्रदेश को फिर नई सरकार मिलेगी। इसी सिलसिले में Ground Report आपको मध्यप्रदेश की मुख्यमंत्री सीरीज में प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री रहे रविशंकर शुक्ल के बारे में बता रहा है।

रविशंकर का 2 अगस्त 1877 को मध्यप्रदेश के सागर जिले में हुआ। वहीं देहांत 31 दिसंबर 1956 को दिल्ली में हुआ। आइए अब आगे बात करते हैं। रविशंकर शुक्ल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रसिद्ध नेता और स्वतंत्र आंदोलन के सिपाही रहे। उन्हें मध्यप्रदेश के पुरोधा के रूप में जाना जाता है। ब्रिटिशकालीन जमाने मे जन्में रविशंकर शुक्ल के माता का पिता का नाम जगन्नाथ शुक्ल और माता श्रीमती तुलसी देवी थीं।

मिली जानकारी और रिसर्च के आधार पर रविशंकर ने अपनी पढ़ाई की शुरूआत चार साल की आयु में सुन्दर पाठशाला से की। ब्रिटिश राज में यह पाठशाला सीपी में स्थित छ पाठशालाओं में से एक थी। आठ साल तक रविशंकर ने अपनी प्राथमिक शिक्षा इसी स्कूल से ली।

माध्यमिक शिक्षा खत्म हुई तो पिताजी राजनांदगांव चले गए,छत्तीसगढ़ का राजनांदगांव हां छत्तीसगढ़। पहले मध्यप्रदेश में था 2000 में राज्य के बंटवारे के बाद छत्तीसगढ़ बना और अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने उसे एक और राज्य की मान्यता दी।

खैर आगे बढ़ते हैं। पिता के राजनांदगांव चले जाने के बाद रविशंकर अपने भाई पंडित गजाधर शुक्ल के साथ बेंगाल नागपुर कॉटन मिल में साथ काम करने लगे। कुछ साल तक मिल में काम करते रहे फिर रायपुर में चले गए। इसके बाद उन्होंने अपनी बाकि कि शिक्षा रायपुर में पूरी की। वह इंटरस्कूल के लिए रॉबर्टसन कॉलेज में गए। हां जबलपुर का रॉबर्टसन कॉलेज और फिर ग्रेजुएशन नागपुर के हिसलोप कॉलेज में पूरी की।  इसी दौरान वह राष्ट्रीय आंदोलन में भागीदार बन गए। साल 1898 में कांग्रेस के 13वें अधिवेशन में वह अपने अध्यापक के साथ अमरावती गए। फिर क्या था जुड़े रहे। पढ़ाई का सिलसिला कब कानून का वकील बना गई पता ही नहीं चला।

कुछ बातें जो और जान लो

शिक्षा खत्म करने के बाद रविशंकर शुक्ल सरायपाली आ गए। सूखा पीड़ित लोगों की मदद करने लगे। उनके इस काम के लिए उन्हें नायाब तहसीलदार बनाया गया। लेकिन 1901 को उन्होंने सरकारी नौकरी छोड़ दी और जबलपुर के हिसकारिणी स्कूल में अध्यापन कार्य शुरू किया। सोचने वाली बात नायाब तहसीलदार का पद इसलिए छोड़ा क्योंकि देश का भविष्य तैयार करना था।

1906 आत े आते पंडित जी वकालत के पेशे में उतर आए। साथ ही स्वतंत्रता आंदोलन से नाता बना रहा। इसके बाद 1926 को रायपुर जिला बोर्ड के सदस्य रहे। 1936 में प्रांतीय धारा सभा के चुनाव में शुक्ल जी जीत गए। और डॉ खरे जो उस वक्त मुख्यमंत्री थे के त्याग पत्र देने पर उनकी जगह आए और 1938 से 1939 तक मुख्यमंत्री रहे। लेकिन अब तक यह कहानी आजादी के पहले की है।

भारत आजाद हुआ राज्यों के गठन के लिए राज्य गठन आयोग बनाया गया। मुल्क की तस्वीर बनाई जा रही थी। और 1952 में पहले आम चुनाव कराए गए इसके बाद प्रथम मुख्यमंत्री बने। रविशंकर शुक्ल जी राज्य पुर्नगठन के पश्चात् गठित नए मध्य प्रदेश के सर्वसम्मति से प्रथम मुख्यमंत्री बनाए गए। शुक्ल जी की स्मृति में विधान सभा सचिवालय द्वारा वर्ष 1995-1996 से उत्कृष्ट मंत्री पुरस्कार स्थापित किया गया है।

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