Sat. Dec 7th, 2019

groundreport.in

News That Matters..

भारतीय जनता(पार्टी) और जनता की लड़ाई में मूकदर्शक बनी कांग्रेस

1 min read
Sharing is Important
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

रिपोर्ट, अविनीश मिश्रा

जैसे-जैसे चुनाव के दिन नजदीक आ रहे हैं वैसे वैसे मध्यप्रदेश का राजनीति तापमान बढ़ता जा रहा है। तमाम तरह के मीडिया चैनल से लेकर सर्वे एजेंसी तक भागदौड़ कर जनता की मूड जानने में लगी है कि किसका किस दल की ओर झुकाव है? लेकिन जनता इसबार ताश के फेंटे हुए पत्ते का इक्के की तरह है जो अचानक ही ये गेम बदल देना चाहती है।

लेकिन राजनीति हलकों में सबसे बड़ा सवाल है की इसबार लड़ाई किसके किसके बीच है? क्योंकि राजनीति का एक सिद्धांत है। ‘Opposition is the next position !’ यानि सत्ताधारी दल भाजपा और विपक्षी दल कांग्रेस के बीच ! कुछ राजनीतिक विश्लेषक इसमें एक दो दल का नाम और जोड़ देते हैं। लेकिन मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार नितिन दुबे ऐसा नहीं मानते हैं। वो कहते हैं ” देखिए इस बार शिवराज की लड़ाई उस जनता से है जिसने उसे एक किसान पुत्र से प्रदेश की सबसे बड़ी गद्दी सौंपी थी। कांग्रेस इस लड़ाई में कहीं है ही नहीं। इसके पीछे का कारण नितिन दुबे बताते हैं। सारा माजरा 2008 से शुरू हुआ। दिग्विजय सिंह चुनावी आज्ञातवास पर थे। सुरेश पचौरी के हाथ में कमान थी और उसपर जमकर टिकट बेचने का आरोप लगा। जिसके बाद कैडर का जो मूल कार्यकर्ता था वो पार्टी से छीटक गया। लेकिन कांग्रेस नेता माणक अग्रवाल इसे सिरे से नकारते हैं और कहते हैं। 2008 में जो हुआ वो पार्टी को बदनाम करने की साज़िश थी। पार्टी के जांच में ऐसा कुछ भी नहीं मिला। तो फिर सुरेश पचौरी इस बार सक्रिय क्यों नहीं है? इस पर वे कहते हैं. सक्रिय कैसे नहीं है? पार्टी ने उन्हें चुनाव प्रबंधन समिति का भार सौंपा है जिसे वे बखूबी निभा रहे हैं।

लेकिन कांग्रेस भले ही इस पर कुछ भी कहे लेकिन वो इस बात को नकार नहीं सकती की दिग्विजय के शासन से जली जनता पर 2008 में पचौरी ने और घी डाल दिया।

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Copyright © All rights reserved. Newsphere by AF themes.