इटारसी-होशंगाबाद विधानसभा: क्या एक बार फिर पूजे जाएंगे ‘साहब’ या होगा बाबू जी के सर’ताज’?

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होशंगाबाद इटारसी | सौरभ दुबे

मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव 2018 के मद्देनज़र ग्राउंड रिपोर्ट की टीम इन दिनों नर्मदांचल के आस-पास के इलाकों का दौरा कर रही है। होशंगाबाद विधानसभा सीट अपने आप में महत्वपूर्ण हैं। वर्तमान में इस सीट पर बीजेपी नेता और विधानसभा अध्यक्ष सीतासरण शर्मा का कब्जा है लेकिन टिकिट बंटवारें के दौरान बिगड़े चुनावी समीकरण के चलते मामला बिगड़ गया है।

इटारसी और होशंगाबाद के ग्रामीण और शहरी इलाकों को मिलाके वोटिंग के लिहाज से यहां 2 लाख 5 हजार के करीब मतदाता है। यह इलाका नर्मदा नदी के तटीय इलाकों से सटा हुआ है। इस सीट पर दोनों दिग्गजों की राजनीतिक और सामाजिक दृष्टी पर पढ़िए इटारसी-होशंगाबाद से हमारे विशेष संवाददाता सौरभ दुबे की खास रिपोर्ट।

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बीजेपी के खिलाफ कांग्रेस को मिला मजबूत दावेदार
दरअसल, इस सीट से अब बीजेपी के बागी नेता 5 बार सांसद पूर्व केंद्रीय मंत्री और शिवराज सरकार में दो बार मंत्री रहे सरताज सिंह कांग्रेस की ओर से चुनावी दंगल में दाव आजमा रहे हैं। कांग्रेस के पास डॉक्टर सीताशरण शर्मा के खिलाफ अब तक कोई इतना मजबूत दावेदार नहीं था जितना सरताज को माना जा रहा है। सरताज के आने से क्षेत्र में कांग्रेस का कुनबा तो भारी हुआ ही है साथ ही इसे रणनीतिक जीत भी माना जा रहा है।

प्रदेश में एन्टी-इंकंमबेंसी की खबरें, लेकिन यहां लोगों में विधायक का भय
मध्य प्रदेश के कई इलाकों में लोगों से बातचीत के दौरान एन्टी इन्कबेंसी की कई बाते सामने आईं। वहीं इटारसी होशंगाबाद भी इससे अछूता नहीं है, लेकिन यहां स्थिति थोड़ी अलग है लोग इस बार बीजेपी नहीं बल्कि विधानसभा अध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण पद पर आसीन व्यवहार कुशल, सौम्य, मृदुभाषी, साफ छवि के नेता डॉक्टर सीताशरण शर्मा से भय खाये हुए लगते हैं। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि शर्मा से लोगों को किस बात का भय है वो खुद भी नहीं जानतें।

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कांग्रेस ने बनाया भयमुक्त वातावरण को मुद्दा
वहीं कांग्रेस भी अपने प्रचार के दौरान इन्हीं बातों को जोरशोर से प्रचारित कर रही है कि इटारसी शहर में भयमुक्त वातावरण बनाना है तो सरताज सिंह को वोट दें। वहीं भाजपा के बहुत से नेता जो डॉक्टर सीताशरण शर्मा से नाराज बताये जा रहे थे अब दूसरे विधानसभा क्षेत्र में भाजपा प्रत्याशी का प्रचार करने चले गये हैं। व्यापारी वर्ग सरकार की नोटबंदी और कभी न समझ आने वाली जीएसटी से परेशान हैं, तो वहीं किसान वादाखिलाफी से।

क्यों नाराज़ हैं लोग
शर्मा के खिलाफ आम जनता कैमरे पर बोलने से बच रही हैं लेकिन कुछ लोग खुलकर विरोध कर रहे हैं। सबसे ज्यादा लोगों की नाराज़गी इस बात से है कि यहां का एकमात्र सरकारी अस्पताल अब भी सबसे बदहाल है और यहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी है और निजी अस्पतालों की स्थिति भी बहुत अच्छी नहीं है।

सीताशरण के पास है ये ‘रामबाण’
डॉक्टर सीताशरण शर्मा का सबसे बड़ा प्लस पॉइंट क्षेत्र की जनता से सतत संपर्क और युवाओं में उनकी पकड़ को माना जा रहा है। लोगों का कहना है कि सार्वजनिक कार्यों के साथ-साथ उन्होंने स्वेच्छानुदान के माध्यम से गरीबों के हितों में बहुत काम किया है। वहीं दूसरी और सरताज सिंह स्वच्छ छवि के नेता तो हैं लेकिन पिछले 10 सालों से सिवनी मालवा से विधायक रहने के चलते इटारसी होशंगाबाद के लोगों से उनका संपर्क लगभग टूटा हुआ था जिसका खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ सकता है।

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शर्मा की ये नाकामी बनी किस्सागोई
स्थानीय समीकरण को देखें तो विधानसभा में बतौर स्पीकर ज्यादा बोलने वाले विधायकों को चुप कराने वाले सीतासरण शर्मा को जनता अब चुप कराने के मूड में नज़र आ रही है। शर्मा की सबसे बड़ी नाकामी यह है कि इटारसी होशंगाबाद जैसे इलाके में अब तक ऐसा कोई कॉलेज नहीं बन पाया है जहां युवा बेहतर शिक्षा हासिल कर सकें। यहां से अधिकतर युवा करीब 95 किलोमीटर दूर राजधानी भोपाल का रुख करते हैं। कई बार ये युवा शिक्षा और रोजगार के लिए रेलवे के जरिए रोजाना अप-डाउन करते हैं, साथ ही रोजगार की स्थिति भी यहां देश-प्रदेश की तरह बदतर ही नज़र आती है।

सरताज के आने से व्यक्तिगत हुआ मुकाबला
सरताज सिंह राजनीति के धुरंधरों में से एक हैं। इतिहास के पन्नों को पलटें तो पता चलता है कि सीताशरण को राजनीति में लाने वाले सरताज ही हैं। लेकिन शर्मा के विधायक बनने के करीब ढाई साल बाद ही शर्मा और सरताज के रिश्तों में खटास आ गईं। सरताज 5 बार सांसद, केन्द्रीय मंत्री, प्रदेश में वन मंत्री होने के साथ ही उनके पास ब्यूरोक्रेसी की अच्छी समझ हैं। सरताज के आने के बाद यहां न सिर्फ कांग्रेस में गुटबाजी खत्म हुई है बल्कि आत्मविश्वास भी बढ़ा है। सरताज के आने से यहां मुकाबला दलगत न हो कर व्यक्तिगत हो गया है। पॉलिटिकल एक्सपर्ट बताते हैं कि इस बार कांग्रेस के पास एक बड़ा चेहरा है। पहले यहां मुकाबला एकतरफा होता था, लेकिन अब यहां स्थिति बीजेपी वर्सेज सरताज सिंह हो गई हैं।

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सरताज की नाकामी और जीत का रामबाण 
सरताज इससे पहले तक सिवनी मालवा सीट से चुनाव लड़ते आए हैं, लेकिन बीजेपी से टिकट कटने के बाद वे कांग्रेस के टिकट से इटारसी-होशंगाबाद सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। वे दिग्गज नेताओं में से एक हैं लेकिन क्षेत्र की जनता के लिए बड़ा काम जैसे उद्योग या युवाओं के लिए रोजगार जैसी कोई खास व्यवस्था करवाने में नाकाम साबित हुए हैं। हांलाकि कांग्रेस जी जान से कैम्पेनिंग कर रही है। शर्मा के विरोधी भी दबी आवाज में और पर्दे के पीछे से सरताज को समर्थन करते दिखाई दे रहे हैं। इस बार एन्टी-इन्कबेंसी का फायदा कांग्रेस को हो सकता है। हांलाकि देखना होगा कि जनता एक बार फिर शर्मा को मौका देती हैं या फिर सरताज को अपना सिरमौर चुनती हैं।

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