मोदी सरकार की इजाज़त से अडानी की कंपनी के लिए काटे गए 40 हज़ार से ज़्यादा पेड़ : रिपोर्ट

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ग्राउंड रिपोर्ट । न्यूज़ डेस्क

बढ़ते प्रदूषण की रोकथाम के लिए जहां और पेड़ लगाए जाने की ज़रूरत है, वहीं उद्योगपतियों के फायदे के लिए पेड़ कटवाए जा रहे हैं। ताज़ा मामला ओड़िशा से सामने आया है। यहां अडानी समूह की एक कंपनी के कोयला प्रोजेक्ट के लिए 40 हज़ार से ज़्यादा पेड़ कटवा दिए गए।

डाउन टू अर्थ की रिपोर्ट के मुताबिक झारसुगुड़ा और संबलपुर जिलों में नेयवेली लिग्नाइट कॉरपोरेशन (एनएलसी) इंडिया लिमिटेड द्वारा परियोजना का संचालन किया जा रहा है। संबलपुर के मुख्य वन संरक्षक की साइट निरीक्षण रिपोर्ट के अनुसार, इसके लिए 1,30,721 पेड़ों की कटाई होगी।

पेड़ों की कटाई की इजाज़त अडानी समूह से जुड़ी कंपनी को मोदी सरकार ने दी है!

कोयला खदान के लिए रास्ता बनाने के लिए 9 दिसंबर, 2019 को ओडिशा के संबलपुर जिले के तालाबीरा गांव में लगभग 40,000 पेड़ काट दिए गए हैं। इस वर्ष 28 मार्च को केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने एक ओपन कास्ट कोयला खनन परियोजना के लिए 1,038.187 हेक्टेयर वन भूमि देने की सहमति दी थी। एनएलसी ने 2018 में अडानी ग्रुप के साथ माइन डेवलपमेंट और ऑपरेटर कॉन्ट्रैक्ट साइन किया था। जिस क्षेत्र को कोयला खदान के लिए दे दिया गया है, वहां के जंगल की रक्षा और संरक्षण तालाबीरा गांव के वनवासियों द्वारा किया जाता है।

झारसुगुड़ा और सम्बलपुर के 1031 हेक्टेयर में फैले पेड़ो को काटा जाना भी तय

ग़ौरतलब है कि इन पेड़ों की कटाई की इजाज़त अडानी समूह से जुड़ी कंपनी को केंद्र की मोदी सरकार ने दी है। इसी साल 28 मार्च को केंद्रीय वन मंत्रालय ने पेड़ों को काटे जाने की मंज़ूरी दी थी। जिसके बाद झारसुगुड़ा और सम्बलपुर के 1031 हेक्टेयर में फैले पेड़ो को काटने का रास्ता साफ़ हो गया। स्थानीय मीडिया की रिपोर्ट्स को मानें तो यहां अब तक सवा लाख से ज़्यादा पेड़ काटे जा चुके हैं।

इस जंगल पर लगभग 3,000 लोग निर्भर हैं

खिन्दा खेड़ा के निवासी हेमंत कुमार राउत ने कहा, ‘हमने 50 से अधिक वर्षों से इस जंगल की रक्षा की है। इस जंगल पर लगभग 3,000 लोग निर्भर हैं, जो लगभग 970 हेक्टेयर क्षेत्र में है। अब इन पेड़ों को सरकार कोयले के लिए काट रही है।’