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Monkeypox : मंकीपॉक्स से बचने के क्या उपाय हैं; जान लीजिए

Monkeypox

Monkeypox outbreak : मंकीपॉक्स ने भारत में दस्तक दे दी है। केरल के बाद अब राजधानी दिल्ली में मंकीपॉक्स का पहला केस सामने आया है। चपेट में आए दिल्ली के 34 वर्षीय व्यक्ति का विदेश यात्रा का कोई इतिहास सामने आया नहीं आया। युवक हिमाचल की यात्रा से दिल्ली वापस लौटा था।

मरीज़ दिल्ली के मौलाना आज़ाद अस्पताल में भर्ती है। देश में अब तक मंकीपॉक्स (Monkeypox) के 4 मामले सामने आ चुके हैं। 3 केस केरल और अब चौथा दिल्ली में मिला। उधर WHO ने मंकीपॉक्स को ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी बता दिया है।

Monkeypox : मंकीपॉक्स का पहला केस केरल से आया

मंकीपॉक्स का पहला मामला देश में जुलाई में पाया गया। जब संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) से लौटे एक 35 वर्षीय युवक में मंकीपॉक्स (Monkeypox) के संक्रमण की पुष्टि हुई थी। चपेट में आए युवक का इलाज केरल के तिरुवनंतपुरम के मंजेरी मेडिकल कॉलेज में चल रहा है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने आपात बैठक केक बाद मंकीपॉक्स (Monkeypox) को ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी घोषित कर दिया है। कोरोनावायरस के शुरूआत में भी  WHO ने इसे ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी घोषित किया था। जिसके बाद दुनिया ने क्या तबाही देखी। लोग उसे कभी भुला नहीं सकेगी। इस घोषणा के बाद दुनियाभर की सरकारों की चिंता बढ़ गई है।

Monkeypox : क्या है मंकीपॉक्स वायरस ?

कम्युनिटी मेडिसिन दिल्ली एम्स (AIIMS) के डॉ हर्षल साल्वे का कहना है कि, मंकीपॉक्स वायरस अधिकतर अफ्रीकन देशों में पाए जाते रहे हैं। मंकीपॉक्स (Monkeypox) एक तरह का वायरस है। मंकीपॉक्स 70 के दशक से अफ्रीकन मुल्कों पाया जा रहा है। लेकिन वर्तमान में ये अन्य देशों में तेज़ी से फैलता नज़र आ रहा है।

डॉ हर्षल साल्वे आगे बताते है कि मंकीपॉक्स (Monkeypox) नामक यह बीमारी किसी भी वायरल फीवर की तरह होती है। इसमें बुखार, बदन दर्द, सर दर्द के साथ ही कोशिकाओं में सूजन आ जाती है। यह बीमारी जानवरों से इंसान में फैलती है और अब इसका इंसान से इंसान में भी ट्रांसमिशन हो रहा है।

मंकीपॉक्स से बचने के क्या उपाय हैं ?

डॉ हर्षल साल्वे के मुताबिक, मंकीपॉक्स (Monkeypox) का ट्रांसमिशन ह्यूमन तो ह्यूमन भी होता है। आपको इस समय यात्रा में सावधानी बरतनी होगी। अगर आप यात्रा पर हैं तो कोशिश करें कि भीड़-भाड़ से बचने का प्रयास करते रहें। हाथ मिलाना,गले लगना जैसी चीज़ों से बचना चाहिए। यात्रा पर हैं तो हाथ में दस्ताना पहन सकते हैं।

अगर कोई मंकीपॉक्स (Monkeypox) की चपेट में आ गया है तो घबराने की ज़रूरत नहीं है। यह रेस्पिरेट्री ड्रॉपलेट और बॉडी फ्लूइड से फैलता है। मंकीपॉक्स सेल्फ लिमिटिंग भी है। इस बीमारी के फैलने का खतरा उन्हें है, जो मरीज के संपर्क में आते हैं।

अगर सही समय पर मरीज को आइसोलेट कर दिया जाए तो ये बीमारी फैल नहीं सकेगी। ये चार हफ्ते बाद खुद ही अपने आप ख़त्म भी हो जाती है। रिसर्च में सामने आया है कि इसकी फर्टिलिटी रेट है। डॉ हर्षल साल्वे कहते हैं जागरुकता ही इस बीमारी से आपको चपेट में आने से रोक सकती है।

मंकीपॉक्स का बच्चों में ख़तरा अधिक

मंकीपॉक्स (Monkeypox) की चपेट में आने का बच्चों को ख़तरा अधिक है। इसकी एक बड़ी वजह यह भी है कि देश में फिलहाल स्मॉल पॉक्स का टीकाकरण नहीं हुआ है। जिन लोगों को यह टीका लग चुका उन सब की उम्र 50 से 60 वर्ष के करीब है। सरकार अब व्यापक स्तर पर अब इस टीकाकरण के लिय विचार कर रही है।

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