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नोटबंदी की तरह ही ‘असफल’ रहा मोदी सरकार का लॉकडाउन ?

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Ground Report | News Desk

देश में पिछले 24 घंटे में कोरोना वायरस संक्रमण के सबसे अधिक 8,909 नये मामले सामने आए हैं जिसके बाद कुल संक्रमितों की संख्या बुधवार को 2,07,615 हो गयी, वहीं 217 लोगों की मौत के बाद मृतकों का आंकड़ा बढ़कर 5,815 हो गया है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि देश में 1,01,497 लोगों का उपचार चल रहा है और अब तक 1,00,302 लोग स्वस्थ हो चुके हैं।

बेअसर रहा लॉकडाउन ?

केंद्र सरकार ने कोरोना वायरस के संक्रमण को व्यापक स्तर पर फैलने से रोकने लिए लगभग 3 महीने का सख्त देशव्यापी लॉकडाउन लगाया । जनता कर्फ्यु के बाद पीएम मोदी ने देश के नाम अपने संबोधन में कहा था कि कोरोना कि चेन को तोड़ने के लिए कम से कम 21 दिन का समय लगता है । मगर अब देश में 5.0 लॉकडाउन जारी है और कोरोना मरीज़ों की संख्या में प्रतिदिन रिकार्ड बढ़ोत्तरी हो रही है ।

लॉकडाउन के कारण नौकरियां जाने की वजह से देश में एक ‘नया गरीब वर्ग’ उभर कर सामने आता दिख रहा है । इस नये वर्ग में करीब 95 प्रतिशत परिवारों की आजीविका छिन गई है। इसके अलावा लॉकडाउन ने गरीबी रेखा से नीचे जीवन बसर करने वाले 98 प्रतिशत परिवारों की आय के साधन छीन लिए हैं। 97 प्रतिशत दिहाड़ी मजदूरों की आय बंद हो गई है।

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मिनिस्ट्री आफ हाउसिंग एंड अर्बन अफेयर्स की संस्था द नेशनल इंस्टीट्यूट आफ अर्बन अफेयर्स ने देश के 12 शहरों की झुग्गी बस्तियों में यह सर्वे किया है। इतनी बड़ी संख्या में लोग गरीबी की तरफ जा रहे हैं। इससे बचाने के लिए सरकार के पास अभी सिर्फ यही प्लान है कि हमसे कर्ज ले लो।

भारत में दुनिया का सबसे बेरहम लॉकडाउन लगा

लॉकडाउन को लेकर कुछ दिन पहले एक सर्वे आया था कि भारत ने दुनिया का सबसे सख्त, सबसे बेरहम लॉकडाउन लागू किया। क्या इस लॉकडाउन का कोई फायदा हुआ? बड़े पैमाने पर देखें तो कोरोना के प्रसार की गति धीमी करने में कुछ मदद मिली। सैकड़ों प्रवासी मज़दूर इस लॉकडाउन के काऱण मौत के मुंह में चले गए ।

आज लॉकडाउन खुलने तक 2 लाख केस हो चुके हैं, 5500 मौतेंं हो चुुकी हैं, तो कहना होगा कि लॉकडाउन फेल हो चुका है। इस दौरान कोई कारगर रणनीति नहीं बनाई जा सकी। तीन दिन से हर रोज 8000 से अधिक नये केस आ रहे हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार लॉकडाउन के कारण देशभर में अब तक 400 से अधिक लोगों की मौत हुई है ।

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तो क्या अब ये माना जाए कि केंद्र सरकार द्वारा लॉकडाउन का फैसला अंधेरे में तीर चलाने जैसा था ? सरकार ने देश के ग़रीब वर्ग को ध्यान में न रखते हुए लॉकडाउन का फैसला लिया ? मौजूदा समय कोरोना की रफ्तार देखकर लगता है कि लॉकडाउन पूरी तरह से बेअसर रहा और केंद्र सरकार के इस फैसले से लाखों ग़रीब मज़दूर परिवार लावारिस और बे-घर हो गए ।

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