बड़ा घोटाला

सरकार-अडानी की मिलीभगत, एक और बड़ा घोटाला !

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बड़ा घोटाला : हरियाणा के कैथल में गेंहू स्टोर करने के लिए अडानी का एक साइलोज है। (स्टील का बना गोदाम) जिसकी स्टोरेज क्षमता 2 लाख टन है। अडानी ने फूड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया के साथ 20 साल का करार किया हुआ है। जिसमें FCI हर साल अडानी को किराया देता है।

गौर करने वाली बात- करार ऐसा है कि FCI, अडानी के साइलोज में 10 किलो गेंहू स्टोर करे या फिर 10 टन, किराया पूरे 2 लाख टन का देना होगा।

अब बड़ा घोटाला कहां है वो देखिए –

फरवरी 2013 में अडानी के साथ FCI का सालाना करार हुआ = 1842 रुपये प्रति टन साल का किराया अड़ानी को FCI ने दिया = 368400000 रुपये ( 36 करोड़ 84 लाख रुपये )

CAG (भारतीय लेखा परीक्षा और लेखा विभाग) के मुताबिक़ सितंबर 2013 में किराये को बढ़ाकर कर दिया गया = 2000 रुपये टन प्रति सालाना यानि 40 करोड़ रुपये सितंबर

2014 में इस किराये को बढ़ाकर कर दिया गया= 2033.44 रुपये प्रति टन सालानायानि 406688000 रुपये ( 40 करोड़ 66 लाख 88 हजार रुपये)

वहीं आम गोदाम की बात करें तो उसके लिए FCI, 50 किलो की एक बोरी स्टोर करने के लिए 5.39 रुपये देती है। यानि एक क्विंटल गेहूं के 10.78 रुपये और एक टन के हुए- 107.8 रूपये।

  • सालाना 1 टन गेहूं साधारण गोदाम में रखने का किराया= 1293.6 रुपये अडानी के साइलोज में 1 टन गेहूं रखने का किराया= 2033.44 रुपये मतलब हरियाणा सरकार ने एक साल में साइलोज के नाम पर 14 करोड़ 79 लाख 68 हज़ार रुपये ज़्यादा खर्च किए। और ये सिर्फ एक साइलोज की बात है ।
  • खेल यहां खत्म नहीं होता.. बल्कि यहां से शुरु होता है।CAG के मुताबिक- FCI ने ये करोड़ों रुपये का ये किराया अडानी को चुकाया। CAG के मुताबिक 2013-14 और 2015-16 में कैथल में अडानी का साइलोज कई बार खाली पड़ा रहा जिसका किराया FCI लगातार भरता रहा।
  • 14 अप्रैल 2014 को अडानी के कैथल साइलोज में 2 लाख टन में से 1 लाख 33803 टन जगह खाली पड़ी थी। जबकि इसका किराया FCI, अड़ानी को दे चुका था। इसी समय में FCI ने अपनी गेंहू को हरियाणा के पेहवा, पूंडरी, पाई में बने छोटे छोटे गोदामों में रखा । जिसके चलते सरकार को 6.49 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
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CAG का कहना है कि जब दो लाख टन का अडानी का साइलोज किराए पर लिया हुआ है और वो ख़ाली पड़ा है तब गेहूं वहाँ ना रखकर बाहर में किराए पर क्यों रखी गई। क्यों 6.49 करोड़ रुपये का नुक़सान हुआ। जो जवाब FCI ने लिखित रुप में दिए वे संतोषजनक भी नहीं थे।

गौर करने वाली बातें-

अडानी के देश में फिलहाल 14 बड़े साइलोज हैं जिनमें गेंहू स्टोर किया गया है। सात साइलोज का 20 साल का करार है और बचे हुए 7 साइलोज का करार 30 साल का है। करार के मुताबिक़ गारंटी स्टोरेज का पैसा देना होगा। बीते सालोें में कई बार पंजाब सरकार के कुछ नेताओं ने इस प्रश्न को उठाया कि हम पूरे साइलोज का गारंटी किराया नहीं दे सकते।

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कोई साइलोज 50 हज़ार टन का है तो पूरे 50 हज़ार टन का ही किराया देना होगा। सोचिए अडानी जैसी कंपनियों ने FCI या दूसरे कॉरपोरेशन के साथ ऐसे करार किए हुए हैं कि स्थिति कैसी भी हो, अडानी को नुकसान नहीं हो सकता। FCI में अनाज खराब होता है जैसी तस्वीरें, खबरों से एक संस्था के तौर FCI को लगातार नुकसान झेलना पड़ा।

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सरकार को चाहिए था कि इस संस्था को मजबूत करे, अनाज की बर्बादी को रोके। लेकिन सरकार ने इस नेरेटिव को ओपन मार्केट के लिए इस्तेमाल किया औऱ लाखों टन का स्टोरेज प्राइवेट प्लेयरों के हाथ में दे दिया। करोड़ों रुपये साल का किराया। पिछले कई सालों में उन्हें धीरेे धीरे स्थापित किया गया और अब सब कुछ उन्हें देने को तैयार हैं ।

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घोटाला, झूठ छिपा ना रहे.. बात से सहमत हों तो कमेंट बॉक्स में अपने दोस्तों का नाम लिखते चलें। इस बात को अपने लोगों तक पहुंचाए.. आने वाले दिनों में ऐसे कई घोटालें मैं आपको बताता चलूंगा.. तय आपको करना है ।

Why reservation is still necessary to uplift the depressed classes?

पत्रकार Abhinav Goel वॉल से…

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1 thought on “सरकार-अडानी की मिलीभगत, एक और बड़ा घोटाला !”

  1. patrakaar Bandhu use Godam ka adress hamen bhi De De jumper 1 Ton Mal so rupaye aaspaas rupaye mein Rakha jata hai़
    Patrakaar Bandhu Kyon boli wali Janata ka chutiya banaa raha hi hi Aisi galat khabren na post Karen

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