मानसिक विकलांगता है, व्यक्तिगत खुन्नस में राष्ट्र की उपलब्धि का अपमान

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विचार |सौरभ कुमार

प्रधानमंत्री मोदी के “मैन वर्सेस वाइल्ड” के शो का प्रोमो आने के बाद ट्रोलर्स का गैंग फिर से सक्रिय हो गया है। आरोप वही पुराने हैं और वही पुराने आरोप जो गलत साबित हो चुके हैं दोबारा लगाए जा रहे हैं। क्या यह हिटलर कि वही नीति है जिसके तहत यह कहा जाता है कि अगर किसी झूठ को सौ बार दोहराया जाए तो सच हो जाता है। इसमें कोई संदेह नहीं कि भारत के युवा वर्ग का एक बड़ा तबका इस प्रोपगैंड़ा की चपेट में आ चुका है और झूठ से फर्क नहीं पड़ता, फर्क पड़ता है तो बस इस बात से कि एक व्यक्ति को एक संगठन को गलत साबित कर सके।

अपनी जीवनी “मीन कैम्फ (मेरा संघर्ष)” में प्रोपेगेंडा को परिभाषित करते हुए हिटलर लिखता है कि “प्रचार की सच्चाई और निष्पक्षता की जाँच नहीं करनी चाहिए और जब तक दूसरे पक्ष से अनुकूल हो न्याय के सिद्धांत नियमों के अनुसार ही किसी गलत नारे/आरोप को प्रस्तुत करना चाहिए और फिर उसे सच्चाई का केवल वही हिस्सा पेश करना चाहिए जो उसके अपने पक्ष में हैं। जनता की ग्रहणशील शक्तियां बहुत कमजोर हैं और उनकी समझ छोटी है। दूसरी ओर वह जल्दी भूल जाते हैं, इस तरह सभी प्रभावी प्रचार कुछ सीमित बिंदुओं पर होने चाहिए और संभव हो तो उन्हें स्टीरियोटाइप सूत्रों में यथासंभव व्यक्त जाना चाहिए। इन नारों आरोपों को तब तक लगातार दोहराया जाना चाहिए जब तक कि अंतिम व्यक्ति उस विचार को समझना जाए जो आगे रखा गया है। एक प्रचारक द्वारा संदेश के विषय में किए गए हर परिवर्तन को हमेशा एक ही निष्कर्ष पर जोर देना चाहिए।”

केदारनाथ की गुफा में प्रधानमंत्री की तस्वीरें सामने आने के बाद भी यही प्रक्रिया शुरू हुई थी इस फोटोशूट को नौटंकी करार दिया था। उनके ध्यान से यह बात उतर गई थी कि 2013 में केदारनाथ में हुई तबाही के बाद लाखों लोगों ने अपने जान-माल से हाथ धोया था। हम सब यह अच्छे से जानते हैं कि केदारनाथ जैसे धार्मिक स्थलों पर सालभर पर्यटक और भक्त बाबा भोलेनाथ के दर्शन के लिए आते हैं उनकी यह यात्रा उनकी धार्मिक आस्था के लिए तो महत्वपूर्ण है मगर उसके साथ ही इसी धार्मिक पर्यटन से आसपास रहने वाले हजारों लोगों का रोजगार चलता है।

केदारनाथ धाम में लगने वाली हजारों दुकानें और उनके परिवारों का एकमात्र आय का श्रोत यही पर्यटन है। कई अखबारों और सरकार के रिपोर्ट के अनुसार इस पर्यटन में 2013 के बाद 85% की गिरावट आई और 6 सालों के बाद भी आने वाले भक्तों की संख्या 2012 के आंकड़े तक नहीं पहुंच पाई थी। उसके बाद केदारनाथ में प्रधानमंत्री की तस्वीर सामने आईं, ज्यादातर तस्वीरें लॉन्ग शॉट में कैप्चर की गई थी ताकि तस्वीर को देखने वाला यह समझ सके कि केदारनाथ में निर्माण का कार्य पूरा हो चुका है और केदारनाथ दोबारा बाहें फैलाए उनका इंतजार कर रहा है।

इसके बाद केदारनाथ में पर्यटन दोबारा शुरू हुआ और आश्चर्य की बात है कि इस बार पर्यटन में अप्रत्याशित उछाल देखा गया पर्यटकों की संख्या में 50% तक की वृद्धि दर्ज की गई।

जब कोई राष्ट्राध्यक्ष इस तरह के किसी फोटोशूट वीडियो या कार्यक्रम में शामिल होता है तो वह एक व्यक्ति के तौर पर नहीं एक राष्ट्र के प्रतिनिधि के तौर पर शामिल होता है सारे विश्व की निगाहें उस पर होती और जब हमारे पास एक ऐसा प्रधानमंत्री हो जब इतना अच्छा एडवरटाइजिंग मैकेनिज्म हमारे पास उपलब्ध हो तब उसका इस्तेमाल ना करना हमारे लिए बेवकूफी हो और इस बात पर मुझे पूरा विश्वास है कि हमारा राष्ट्र हमारा देश बेवकूफ तो कतई नहीं है।

मैन वर्सेस वाइल्ड के प्रधानमंत्री मोदी का प्रोमो आने के बाद से सोशल मीडिया में दोबारा उन्हें ट्रोल किया जा रहा है, अगर आपको याद हो तो ऐसा ही एपिसोड मैन वर्सेस वाइल्ड का बराक ओबामा के साथ भी आया था। उस शो का उद्देश्य ग्लोबल वार्मिंग के खतरों से दुनिया को परिचित करवाना था, और यह कामयाब रहा। दुनिया भर से अरबों लोगों ने इस शो को देखा और अमेरिका ने बखूबी इसका इस्तेमाल अपने देश के स्टैंड को स्थापित करने के लिए किया ।

आज प्रधानमंत्री मोदी केंद्र में हैं, मगर अफसोस हमारा देश इस तरह नकारात्मकता की गिरफ्त में जड़ दिया गया है, कि लोग इसमें अवसर नहीं अवसाद ढूंढ रहे हैं। काज़ीरंगा पार्क बाढ़ की चपेट में आया है, अब तक 50 से ज्यादा जानवरों के मौत की खबर आ चुकी है। देश का एक बड़ा नेशनल पार्क प्रकृति का कोप झेल रहा है, जैव विविधता का एक बड़ा केंद्र तबाह हो गया है।

ऐसे में अगर देश का प्रधानमंत्री पुरे विश्व का ध्यान हमारे देश की तरफ खींचने में सक्षम है तो यह बात गर्व की होनी चाहिए, ट्रोल की नहीं।

इस लेख में व्यक्त किये गए विचार लेखक के निजी विचार हैं। इस लेख में ग्राउंड रिपोर्ट ने किसी तरह का कोई बदलाव नहीं किया है।