1 Lakh crore for MNREGA

ऐतिहासिक कदम: पहली बार मनरेगा के लिए 1 लाख करोड़ का बजट आवंटित

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Ground Report | News Desk

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन (Nirmala Sitharaman) ने आज 20 लाख करोड़ के पैकेज की आखिरी किश्त देश के सामने रखी इसमें सभी सार्वजनिक क्षेत्रों में प्राईवेट सेक्टर (Privatisation) को एंट्री और मज़दूरों के लिए कई ऐलान किये गए। सरकार ने कोरोना वायरस के कारण उत्पन्न स्थिति के मद्देनजर प्रवासी श्रमिकों के अपने-अपने घर लौटने के कारण उन्हें स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से मनरेगा (MNREGA) के लिए 40 हजार करोड़ रुपये का अतिरिक्त आवंटन किया।

5 बड़ी बातें-

01

40 हज़ार करोड़ अतिरिक्त

मनरेगा का बजट पहली बार 1 लाख करोड़ रुपए हो गया है। बजट में 60 हजार करोड़ रुपए का प्रवाधन किया गया था और अब सरकार ने 40 हजार करोड़ रुपए अतिरिक्त देने का फैसला किया है। इस तरह एक वित्त वर्ष में पहली बार मनरेगा के लिए 1 लाख करोड़ रुपए का आवंटन किया गया है।

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घर लौटे मज़दूरों को होगा फायदा

कोरोना के कारण घर लौट रहे मजदूरों को रोजगार उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी और इससे जल संरक्षण संपदा के साथ ही अन्य कार्य कराये जायेंगे। उन्होंने कहा कि इससे उच्च उत्पादकता के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी।

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क्या है मनरेगा?

महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा / MNREGA) भारत में लागू एक रोजगार गारंटी योजना है। यह योजना प्रत्येक वित्तीय वर्ष में किसी भी ग्रामीण परिवार के उन वयस्क सदस्यों को 100 दिन का रोजगार उपलब्ध कराती है जो प्रतिदिन 220 रुपये की सांविधिक न्यूनतम मजदूरी पर सार्वजनिक कार्य-सम्बंधित अकुशल मजदूरी करने के लिए तैयार हैं। 2010-11 वित्तीय वर्ष में इस योजना के लिए केंद्र सरकार का परिव्यय 40,100 करोड़ रुपए था। जिसे मोदी सरकार ने इस बजट में बढ़ाकर 60 हज़ार करोड़ कर दिया था।

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04

मनरेगा कांग्रेस की विफलताओं का जीता जागता स्मारक

मनरेगा के तहत, केन्द्र सरकार मजदूरी की लागत, माल की लागत का 3/4 और प्रशासनिक लागत का कुछ प्रतिशत वहन करती है। राज्य सरकारें बेरोजगारी भत्ता, माल की लागत का 1/4 और राज्य परिषद की प्रशासनिक लागत को वहन करती है। चूंकि राज्य सरकारें बेरोजगारी भत्ता देती हैं, उन्हें श्रमिकों को रोजगार प्रदान करने के लिए भारी प्रोत्साहन दिया जाता है। प्रधानमंत्री मोदी ने संसद में इस योजना को कांग्रेस की विफलताओं का जीता जागता स्मारक बताया था।

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मनमोहन सिंह ने की थी मनरेगा की शुरुवात

सत्ता में आने से पहले मोदी ने मनरेगा की काफी आलोचना की थी। बाद में अरुण जेटली ने बजट-दर-बजट उसमें सुधार किया। महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी स्कीम की शुरुआत मनमोहन सिंह की सरकार ने की थी।

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