मिज़ोरम भूकंप

बीते 4 दिन में चार बार भूकंप से हिला मिज़ोरम

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देश में लगातार अगल-अलग क्षेत्रों में भूकंप के झटके महसूस किये जा रहे हैं। पिछले दो माह में दिल्ली में 7 बार भूकंप के हल्के झटके महसूस किए गए थे। मिज़ोरम में बीते 4 दिनों में चार बार भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं। मिज़ोरम में बुधवार सुबह एक बार फिर से भूकंप का झटका महसूस किया गया। इस बार रिक्टर स्केल पर तीव्रता 4.1 रही है।

नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी के मुताबिक, मिजोरम में चम्फाई से  31 किलोमीटर दक्षिण में बुधवार सुबह 8.02 मिनट पर भूकंप आया। मिजोरम में रविवार, सोमवार, मंगलवार को भी भूकंप के झटके महसूस किए जा चुके हैं। इस दौरान कई इमारतों को भी नुकसान पहुंचा है।

सबसे पहले रविवार शाम को राजधानी आइजोल के 25 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में करीब 16 बजकर 16 मिनट पर भूकंप आया था। इसके बाद 12 घंटे के भीतर चम्फाई में 5.5 रिक्टर पैमाने का भूकंप आया। वहीं, मंगलवार को एक बार फिर से 3.7 तीव्रता का झटका महसूस किया गया था।

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देश के अलग-अलग हिस्सों में लगातार भूकंप

पिछले कुछ महीनों में देश के विभिन्न हिस्सों में कई भूकंप आ चुके हैं। दिल्ली-एनसीआर, झारखंड, कर्नाटक, जम्मू-कश्मीर, गुजरात समेत कई राज्यों में भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं। हरियाणा के रोहतक में से 15 किलोमीटर दक्षिण पूर्व में शुक्रवार (19 जून) सुबह 5:37 बजे रिक्टर स्केल पर 2.3 तीव्रता का भूकंप आया था। इससे एक दिन पहले गुरुवार को भी हरियाणा के रोहतक से 15 किलोमीटर दक्षिण पूर्व में भूकंप के झटके महसूस किए गए थे। रिक्टर पैमाने पर इसकी तीव्रता 2.1 मापी गई थी।

दिल्ली में क्यों आते हैं इतने भूकंप?

दिल्ली-एनसीआर का इलाक़ा सीस्मिक ज़ोन-4 में आता है और यही वजह है कि उत्तर-भारत के इस क्षेत्र में सीस्मिक गतिविधियाँ तेज़ रहती हैं। जानकार सीस्मिक ज़ोन-4 में आने वाले भारत के सभी बड़े शहरों की तुलना में दिल्ली में भूकंप की आशंका ज़्यादा बताते हैं. ग़ौरतलब है कि मुबई, कोलकाता, चेन्नई और बेंगलुरु जैसे शहर सिस्मिक ज़ोन-3 की श्रेणी में आते हैं। जबकि भूगर्भशास्त्री कहते हैं कि दिल्ली की दुविधा यह भी है कि वह हिमालय के निकट है जो भारत और यूरेशिया जैसी टेक्टॉनिक प्लेटों के मिलने से बना था और इसे धरती के भीतर की प्लेटों में होने वाली हलचल का ख़मियाज़ा भुगतना पड़ सकता है।

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