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Milkha Singh : इन तीन खास मौकों पर फूट-फूटकर रोए थे ‘द फ्लाइंग सिख’

Milkha singh Death
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Milkha Singh Death: भारतीय खेल के इतिहास में आज बेहद दुःखद दिन है। 91 साल की उम्र में “द फ्लाइंग सिख” के नाम से चर्चित मिल्खा सिंह का शुक्रवार को निधन(Milkha Singh Death) हो गया। उनकी काफी समय से ताबियत नासाज़ थी। वे कोरोना पॉजिटिव हुए थे लेकिन उनकी रिपोर्ट निगेटिव आई थी। अचानक सबके चाहिते एथलीट की मत्यु की खबर सुनकर प्रधानमंत्री मोदी और खेल जगत के अन्य लोगों ने दुख जताया है।

कैसे हुआ मिल्खा सिंह का निधन

दरअसल मिल्खा सिंह(Milkha Singh) कोरोना वायरस से संक्रमित हुए थे, लेकिन उनकी रिपोर्ट निगेटिव आई। रिपोर्ट आने के बाद स्वास्थ संबंधी परेशानियों के कारण 19 मई को उन्हें चंडीगढ़ के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। स्वास्थ्य में सुधार आने पर 30 मई को उन्हें डिस्चार्ज किया गया, लेकिन 3 जून को फिर से अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। मत्यु(death) होने के एक दिन पहले गुरुवार को उनको तेज बुखार था, लेकिन बताया जा रहा है कि उनका निधन(Death) आक्सीजन लेवल कम होने की वजह से हुआ।

फ्लाइंग सिख के बारे में कुछ खास बातें

  • मिल्खा सिंह(Milkha Singh) दिल्ली में कुछ दिन के लिए अपनी शादीशुदा बहन के परिवार के साथ रहे थे। तभी बगैर टिकट ट्रेन में यात्रा करने की वजह से उन्हें कुछ दिन तिहाड़ जेल में भी गुजारने पड़े। उस समय उनकी बहन ने अपने गहने बेचकर मिल्खा को जेल से बाहर निकाला था। इसके बाद वो पुराना किला में रेफ्यूजी कैंप में और शहादरा की पुर्नवास बस्ती में रहने लगे।
  • मिल्खा सिंह को फ्लाइंग सिख का नाम पाकिस्तान में मिला था। 1958 के कॉमनवेल्थ गेम्स में मिल्खा सिंह ने आजाद भारत के लिए पहला स्वर्ण पदक जीता था।
  • 1960 में एक रेस में पदक जीतने से चूक गए थे उसी साल पाकिस्तान के अतर्राष्ट्रीय एथलीट प्रतियोगिता के लिए उन्हें बुलाया गया। जीत पर तब के पाकिस्तानी राष्ट्रपति फील्ड मार्शल अयूब खान ने उन्हें ‘फ्लाइंग सिख’ का नाम दिया। उन्होंने मिल्खा सिंह से कहा कि ‘आज तुम दौड़ नहीं उड़ रहे हो, इसलिए हम तुम्हें ‘फ्लाइंग सिख’ का खिताब देते हैं।
  • सेवानिवृत्ति के बाद मिल्खा सिंह खेल निर्देशक पंजाब के पद पर रहें। वे पद्म श्री की उपाधि से भी सम्मानित हुए। उनके पुत्र जीव मिल्खा सिंह गोल्फ़ के खिलाड़ी हैं। उनकी पत्नी निर्मल कौर भी बॉलीवाल की कप्तान रह चुकी हैं।

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अपनी जिंदगी में तीन बार रोया हूँ मैं

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मिल्खा सिंह से बातचीत के दौरान उन्होंने कुछ पल साझा किए जिसमें उन्होंने बताया कि अपनी ज़िंदगी में सिर्फ तीन बार दुख में रोया हूँ मैं। पहली बार जब विभाजन के समय 1947 में हम अपना गांव (गोविंदपुरा, आज के पाकिस्तानी पंजाब में मुजफ्फरगढ़ शहर से कुछ दूर पर बसा गांव) नहीं छोड़ना चाहते थे। हमने विरोध किया तो इसका अंजाम विभाजन के कुरुप सत्य के रूप में हमें भुगतना पड़ा। चारो तरफ खूनखराबा था। उस वक्त मैं पहली बार रोया था।

दूसरी बार 1960 के रोम ओलिंपिक में एक गलती के कारण वह चार सौ मीटर रेस में सेकेंड के सौवें हिस्से से पदक से चूक गए थे। उस वक्त भी वह रो पड़े थे।

तीसरी बार जब उनका मुकाबला एशिया के सबसे तेज धावक माने जाने वाले अब्दुल खालिक से था। इसमें जीत हासिल करने के बाद उन्हें उस वक्त पाकिस्तान के राष्ट्रपति फील्ड मार्शल अय्यूब खान की ओर से ‘फ्लाइंग सिख’ का नाम मिला। तब उनकी आंखों से आँसू छलक गए थे।

कुछ दिन पहले हुई पत्नी की मत्यु

मिल्खा सिंह की पत्नी निर्मल कौर ने अपने समय में भारतीय वॉलीबॉल टीम की कमान संभाली थी। आपको बता दें कि दोनों 1955 में श्रीलंका के कोलंबो में पहली बार मिले थे। मिल्खा सिंह को निर्मल कौर से पहली नजर का प्यार हो गया था। लेकिन निर्मल के परिवार को रिश्ता रास नहीं आया। तब पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रताप सिंह कैरों ने दोनों की शादी में मदद की थी। मिल्खा सिंह के निधन के कुछ दिन पहले ही रविवार को उनकी पत्नी निर्मल कौर की मत्यु हो गई थी।

अपनी स्टोरी जब फिल्मी पर्दे पर दिखी

मिल्खा सिंह से फिल्म में दिखाई गई प्रेम कहानी के बारे में सवाल पूछे गए तो मिल्खा सिंह ने हंसते हुए उत्तर दिया था कि यह मौका हर खिलाड़ी और एथलीट की जिंदगी में आता है कि उसे हर स्टेशन पर एक प्रेम कहानी मिलती है। मेरे जीवन में ऐसे कई पल आये हैं, जिन्हें मैं आज भी याद करता हूं और काफी खुश होता हूं। मिल्खा सिंह ने कहा कि फिल्म देखने के बाद मेरी आंखों से आंसू जारी हो गए। फरहान अख्तर ने मुझसे पूछा कि मैं रो क्यों रहा हूं। मैंने उनसे कहा कि इस फिल्म में मुझे अपना पूरा जीवन दिखाई दे गया। इससे मैं भावुक हो उठा।

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सुनील गावस्कर ने बताई कुछ अनोखी बातें

सुनील गावस्कर बतातें हैं कि मिल्खा सिंह ने अपनी पूरी जिंदगी में शायद ही कभी अपनी उपलब्धियों के बारे में बात की होगी।  वे हमेशा सामने वाले की उपलब्धियों के बारे में बात करते थे खुद से ज्यादा सामने वाले व्यक्ति को महत्व देते थे।

उन्होंने यह भी कहा कि यह सच में दुखद खबर है, बहुत ही  दुखद। भारत के सबसे महान खेल दिग्गजों में से मिल्खा सिंह थे लेकिन वह अब हमारे बीच नहीं रहे। मुझे पता है कि वह 90 के दशक में थे, अपनी फिटनेस के साथ, मुझे लगा कि वह एक शतक पूरा करने जा रहे हैं। कुछ दिन पहले ही उनकी पत्नी का भी निधन हुआ शायद इसीलिए खुद को भी उन्होंने स्वर्ग में शामिल करने का फैसला कर लिया था।

प्रधानमंत्री मोदी ने जताया दुःख

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शोक जताते हुए कहा कि भारत ने ऐसा महान खिलाड़ी खो दिया, जिनके जीवन से नए खिलाड़ियों को प्रेरणा मिलती रहेगी। मोदी ने ट्वीट किया, ‘मिल्खा सिंह जी के निधन से हमने एक महान खिलाड़ी को खो दिया, जिनका असंख्य भारतीयों के ह्रदय में विशेष स्थान था। अपने प्रेरक व्यक्तित्व से वे लाखों के चहेते थे। मैं उनके निधन (Milkha Singh Death) से आहत हूं। उन्होंने आगे लिखा ‘मैने कुछ दिन पहले ही मिल्खा सिंह जी से बात की थी। मुझे नहीं पता था कि यह हमारी आखिरी बात होगी। उनके परिवार और दुनिया भर में उनके प्रशंसकों को मेरी संवेदनाएं हैं।

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