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Migrant Labour: मजदूरों के लिए सूखा राशन और सामुदायिक रसोइयां खोलने के निर्देश

मज़दूरों को सूखा राशन और सामुदायिक रसोइयां खोलने के दिए कोर्ट ने निर्देश
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Migrant Labour News : कोरोना महामारी के प्रसाव को रोकने के लिए सरकार द्वारा लॉकडाउन लगाया जा रहा है। हर राज्य के नियम व दिशानिर्देश अलग-अलग है, ऐसे में प्रवासी मजदूरों को अपने घर वापिस जाने में कई दिक्क्तों का सामना करना पड़ रहा है। इसी बीच उनकी सहायता के लिए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र, दिल्ली, यूपी और हरियाणा की सरकारों को आदेश दिया है की वह राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) के प्रवासी मजदूरों (Migrant labour) को सूखा राशन, जैसे की आटा और दाल, दे।

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13 मई को दिए अपने इस निर्देश में कोर्ट ने ये भी ये कहा की मजदूरों से पहचान पत्र लेना अनिवार्य नहीं होगा, जिनके पास पहचान पत्र न हो वह सभी अपना पहचान का एक घोषणा पत्र दे सकते है। प्रवासी मजदूरों को खान-पान की दिक्क्त न हो इसीलिए कोर्ट ने दिल्ली, यूपी और हरियाणा की सरकारों को सामुदायिक रसोइयां ( Community kitchen ) खोलने का भी निर्देश दिया है और कहा है की फसे हुए मज़दूरों को इनके ज़रिये दिन में दो बार भोजन प्रदान कराया जाये। जो मज़दूर अपने घर जाना चाहता है उनके आने जाने के लिए उचित परिवहन की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाये। प्राइवेट बस संचालक सामान्य के मुकाबले इस वक़्त 4 से 5 गुना ज़्यादा किराया ले रहे है।

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कोर्ट ने महाराष्ट्र, गुजरात और बिहार की सरकारों को भी नोटिस भेज कर जवाब माँगा है की इस बारे में वह किस प्रकार के कदम उठाएंगे। जस्टिस अशोक भूषण और एम.आर. शाह की बेंच ने इस मामले पर सुनवाई के दौरान कहा की सरकारे इन सभी निर्देशों का तुरंत पालन करे। इस मामले की सुनवाई से पहले, अदालत ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से उन प्रवासी मजदूरों का रिकॉर्ड रखने के लिए कहा था जिनमें की उनके कौशल, पिछले रोजगार आदि का विवरण सहित ब्योरा हो, ताकि प्रशासन मदद का विस्तार कर सके। उन्हें रोजगार प्रदान करने के लिए रास्ते तलाशने के लिए भी निर्देशित किया गया था। अदालत ने इस मुद्दे पर राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से हलफनामा मांगा था, मज़दूरों की जानकारी, लेकिन जवाब अपर्याप्त निकले। इसी के चलते कोर्ट ने सरकारों को 10 दिन का समय और दिया है ताकि वह दोबारा और पर्याप्त जवाब दे सके, इस मामले पर अगली सुनवाई 24 मई को होगी।

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