#MeToo: महिला एंकर का छलका दर्द, डेस्क इंचार्ज ने पहले केबिन में बुलाया फिर की घिनौनी हरकत

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नई दिल्ली, 17 अक्टूबर। मीटू यह एक ऐसा शब्द है जिसने इन दिनों ना सिर्फ सोशल मीडिया बल्कि सड़कों पर भी क्रांति मचा दी है यह उन लड़कियों और महिलाओं की कहानी है जो कभी ना कभी, कहीं ना कहीं किसी न किसी रूप में मानसिक या शारीरिक रूप से प्रताड़ित की गई हैं।अमेरिका से सोशल मीडिया पर शुरू हुए मी टू कैंपेन ने ना सिर्फ दिग्गज हस्तियों, राजनेताओं, प्रशासनिक अधिकारियों और मनोरंजन जगत में एक बड़ी पहचान बना चुके तमाम उन लोगों को कटघरे में खड़ा कर दिया जिनकी छवि दूसरों को प्रेरणा देती रही है।

वहीं दूसरी ओर मीडिया में काम करने वाली लड़कियां और महिलाएं भी कभी ना कभी मानसिक या शारीरिक उत्पीड़न का शिकार होती हैं। अब भी हो रही हैं। ये वो महिलाएं और लड़कियां हैं जो आप तक बतौर एंकर रिपोर्टर और डेस्क पर खबर लिख आप तक न्यूज़ पहुंचाने का काम करती हैं। ये महिलाए एक पत्रकार के रूप में समाज की हर उस आवाज़ को बुलंद करती हैं जिसे कोई नहीं सुनता लेकिन अगर यही महिलाएं और लड़कियां अपने दफ्तर में इस तरह की चीजों का शिकार हो तो वह अपनी शिकायत किससे करें।

मीडिया में पैठ बना चुके कुछ पुरूष और लड़कों की पुलिस प्रशासन और राजनीति में अच्छी पकड़ के चलते शिकायत के बावजूद न तो इनकी संस्थान में कोई सुनता है और न ही पुलिस प्रशासन की ओर से इन्हें अच्छा रिस्पॉन्स मिलता है।

आज हम आपको एक ऐसी ही महिला पत्रकार की दास्तां से रूबरू करवा रहे हैं जो मीटू कैंपेन शुरू होने से पहले ही आवाज उठा चुकी थीं। लेकिन न तो उन्हें अपने स्टाफ का सपोर्ट मिला और न ही पुलिस की ओर से। बीते कई वर्षों से बतौर रिपोर्टर और एंकर एक दिग्गज मीडिया हाऊस में काम कर रही पत्रकार रुमाना अल्वी ने संस्थान में अपने सीनियर अभय उपाध्याय द्वारा की जा रही ज्यादती के खिलाफ आवाज उठाई।

लेकिन डेस्क इंचार्ज होने के चलते उनके खिलाफ संस्थान ने कोई कार्रवाई नहीं की। इसके बाद जब इस महिला पत्रकार ने पुलिस में कंप्लेंट की और महिला आयोग में शिकायक की तो उन्हें वहां से भी खाली हाथ ही लौटना पड़ा।

रुमाना फेसबुक लिखती हैं… #MeToo कैम्पेन क्या सिर्फ celebrities के लिए है?? क्योंकि चर्चा और कार्रवाई उनके सिर्फ TV पर बयान पर ही होती जा रही है। जबकि आम लड़कियां written शिकायत करती हैं फिर भी कोई कार्रवाई नहीं…। महिला आयोग भी क्या सिर्फ celebrites के लिए बना है?? Celebrities के TV पर बयान पर तुरन्त एक्शन, लेकिन आम लड़की के written शिकायत पर भी कोई एक्शन तो दूर कोई ध्यान भी नहीं दिया जाता।

क्या है मामला
यूं तो एंकर रुमाना पिछले कई महीनों से प्रताड़ना झेल रही थीं लेकिन अति होने पर पहली बार 6 जुलाई को उन्होंने अपने दर्द को सार्जनिक करते हुए फेसबुक पर एक पोस्ट किया। इसमें उन्होंने लिखा, ‘देश में लगातार महिलाओ और बच्चियों के साथ रेप की घटनाओ पर चीखने वाले मीडियाकर्मी अपने ऑफिस के अंदर काम करने वाली महिलाओं और लड़कियों के लिए कब ऐसे चीखेंगे की उन्हें इंसाफ मिले?’

अपने सीनीयर्स एचआर और मीडिया संस्थान चलाने वाले कई अधिकारियों से शिकायत के बावजूद जब समस्या का हल नहीं हुआ तो उन्होंने ठीक चार दिन बाद 10 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया के नाम फेसबुक पर एक पोस्ट लिखा। वे अपने पोस्ट में लिखती हैं…

‘सर एक संस्थान जहाँ कोई लड़की जॉब के लिए आती हो । अपने घर परिवार से दूर । ऐसे में माता पिता organization या चैनल पर ही भरोसा करते हैं कि वो उनकी बच्चियों को कुछ सिखाएगा, जिन बच्चियों को बड़े नाज़ों से पाला उनकी सुरक्षा करेगा। लेकिन वहीं काम करने वाला एक डेस्क इंचार्ज आपको केबिन में बुलाकर double meaning बातें करने लगे, और ऐसी बाते करने लगे जो शायद कोई लड़की सोशल साइट पर लिखना तो दूर किसी को बताने में भी झिझके । बार बार यही हरकत करने पर जब वो लड़की अपने इंचार्ज की शिकायत उच्चाधिकारियों से करे । और उसे जवाब मिले की वो इंचार्ज ऐसा नहीं है। बार बार बोलने पर कहा जाता है आप प्रूफ लाओ। उस लड़की को टारगेट किया जाने लगता है। बजाय इसके की उस इंचार्ज को भी बुलाकर पूछा जाए। ‘इस पूरे वाकये को आप इस पोस्ट पर क्लिक कर पूरा पढ़ सकते हैं।


इस मामले पुलिस और महिला आयोग से शिकायक करने के बावजूद अब तक कोई ठोस एक्शन नहीं लिया गया है। रुमाना ने अब कोर्ट का रुख किया है। देखना होगा कि उन्हें कब और कैसे न्याय मिलता है। हांलाकि, मीडिया संस्थान में महिलाओं के साथ होने वाली ज्यादती का यह कोई पहला मामला नहीं है लेकिन उम्मीद है कि महिला पत्रकार रुमाना अल्वी का यह कदम मीडिया में काम करने वाली महिलाओं और लड़कियों की आवाज को बुलंद करने के साथ ही मील का पत्थर साबित होगा।

नोट: रुमाना अल्वी ईनाडू ग्रुप में बतौर एंकर कार्यरत हैं। उन्होंने साफ कहा है कि उन्हें अपने संस्थान से कोई आपत्ति नहीं है। उन्हें शिकायत है तो ऐसे लोगों से जो इस तरह की हरकत कर इंसानियत और महिलाओं के लिए माहौल को गंदा बनाने का काम करते हैं।