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मानसिक तनाव(Mental Stress) से बचाने वाले योगासन(Yoga Asana)

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Mental Stress| Yoga Asana: मानसिक तनाव (mental stress) की वजह से लोगों को डिप्रेशन(desperation) , एंग्जाइटी(anxiety), हाइपरटेंशन (hypertension),वज़न बढ़ने(weight gain), नींद न आने जैसी बीमारियों का सामना करना पड़ता है। Mental Stress: योग (Yoga) के द्वारा हम इन सभी परेशानियों से खुदको व अपने परिवार को बचा सकते हैं।

कौन से योगासन से आप रख सकते हैं अपने स्वास्थ्य का ख्याल?
एक्सपर्ट बताते हैं कि ज्यादा मानसिक तनाव से ब्लड प्रेशर और शुगर लेवल बढ़ जाता है जिससे दिल की बीमारी होने का भी खतरा होता है। जब दिमाग पर तनाव(mental Stress) की वजह से प्रेशर पड़ता है तो हमारे शरीर के ऑक्सीजन लेवल में कमी आती है। जब भी हो तनाव तो यह आसन अपनाए।

पद्मासन 

यह आसन ध्यान केंद्रित करने के लिए किया जाता है। यह आसन दिमाग शांत करता है। ऊर्जा बनाए रखता है। आजकल के समय में लोगो को मानसिक तनाव (mental stress) बहुत जल्दी होता है। किसी भी छोटी सी बात को लेकर इतना सोचते हैं कि उसका असर उनके मानसिक व शारीरिक स्वास्थ्य पर पड़ता है।

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अगर कोई बहुत थका हुआ है तो वो कुर्सी पर बैठने की जगह 20मिनट के लिए पद्मासन में बैठ सकता है। कम से कम 20मिनट इस आसन में बैठने से व्यक्ति में ऊर्जा का स्तर बढ़ता है। बहुत बार होता है कि किसी परेशानी की वजह से लोगो को नींद नहीं आती है थोड़ी देर इस मुद्रा में बैठने से उस स्ट्रेस कम होता है और नींद न आने की शिकायत भी कम हो जाती है। 

पद्मासन में बैठते समय घुटनों और टखनों को अच्छी तरह खींच कर और मोड़ कर बैठना होता है। आसन करने के वक़्त जब जोड़ों में खिंचाव पड़ता है, तो एक खास प्रकार का द्रव (श्लेष द्रव – Synovial Fluid) निकलता है। माना जाता है कि यह द्रव मांसपेशियों की अकड़न को कम करने के साथ-साथ अर्थराइटिस जैसी बीमारियों के खतरे को कम करने में मदद कर सकता है।

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पद्मासन करने का तरीका

किसी भी आसन के फायदे उसे सही ढंग से करने पर ही मिलते हैं, इसलिए जरूरी है कि उसको सही तरह से किया जाये। पद्मासन करने के लिए जमीन पर बैठ जायें फिर पैरों को सामने की ओर फैलाइए। अपनी कमर और गर्दन को बिल्कुल सीधा रखें। अब दाएं(right) पैर को मोड़ कर उसकी एड़ी को बाईं जांघ(left thai) पर रखिये। इस प्रक्रिया को दूसरे पैर के साथ भी वैसा ही करिये।

जब दोनों पैरों को मोड़कर एड़ी को क्रॉस की तरह जांघों पर रखकर अच्छे से बैठ जाये तब ज्ञानमुद्रा बनाकर घुटनों पर हाथों को रखिये। ऐसा करते वक़्त अपनी कोहनियों को सीधा रखिये। अब इस मुद्रा में कुछ देर बैठें रहें। ऐसा करते करते साँस को नार्मल तरह से लेते रहे। इस प्रक्रिया को दिन में 2 बार 3 से 5 मिनट के लिए दोहरा सकते हैं।

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सुखासन

इस आसन को करने से रीढ़ की हड्डी फैलती है और कूल्हा खुलता है। सुखासन से शरीर में ब्लड सर्कुलेशन अच्छे से होता है। यह एक ध्यान की मुद्रा है। जो लोग कठिन आसन में नहीं बैठ पाते हैं वो यह आसन आसानी से कर सकते हैं।
ये आसान बिना किसी दिक्कत के शांति, मानसिक(mental) और शारीरिक(physical) बेलेंस बनाता है। इस आसन से तनाव Stress) कम करने में मदद मिलती है।

सुखासन करने का तरीका-

सबसे पहले पैरों को शरीर के सामने फैला कर बैठ जाएं।दाएं पैर को मोड़कर पंजे को बाई जांघ के नीचे रखें फिर बाएं पैर को मोड़कर पंजे को दाहिनी जांघ के नीचे रखें। अब हाथों को घुटनों पर ज्ञान मुद्रा में रखें। सिर, गर्दन और रीढ़ की हड्डी पर बिना कोई तनाव डाले, उन्हें सीधा रखें।आँखों को बंद कर लें, पूरे शरीर को ढीला रखें। इस आसन को दस मिनट तक करे। घुटनों को जमीन के पास रखें। अगर ऐसा नही होता है तो इस आसन को आप ज्यादा देर तक नही कर पाएंगे। साथ ही, इससे कूल्हों पर अधिक भार पड़ने से पीठ में दर्द भी हो सकता है।

गरुड़ आसान

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गरुड़ आसान को ‘ईगल पोज़’ भी कहते हैं। इससे कंधे और कूल्हों से तनाव रिलीज़ होता है। ये हमारे शरीर के वो हिस्से हैं जो सबसे ज्यादा तनाव झेलते है। यह आसन हमारे कंधे, कलाई, बाजू और पैर पर ज्यादा जोर डालता है। गरूड़ आसान को करने के लिए शरीर का बैलेंस बनाये रखना जरूरी है। जब आप इस आसन को करते हैं तो आपके हिप्स और जाँघ पर ज्यादा स्ट्रेच होता है। अगर आपके टखनों, घुटनों या कोहनियों में चोट लगी है या पैरों में दर्द हो रहा है, तो ऐसे में इस आसन को बिल्कुल न करिए । गठिया रोग से पीड़ित मरीज इस आसन से दूर रहें। गर्भवती महिला को भी इस आसन को नहीं करना चाहिए। इस आसन को करते समय उनके गिरने का डर हो सकता है।

गरुड़ आसन करने का तरीका

गरुड़ासन को करने से पहले खुद को मानसिक (mental) और शारीरिक (physical) रूप से तैयार कर लेना चाहिए। पहले किसी समतल जगह पर खड़े हो जाये ताकि आपके बेलेंस बना रहे।फिर योग मैट पर ताड़ासन यानी सीधे खड़े हो जाएं। ऐसे में आप नार्मल तरीके से सांस लेते रहे। अगले स्टेप में आप घुटनों को थोड़ा मोडिये फिर दोनों हाथों को सामने की ओर करिये। अब पूरे शरीर का बेलेंस दाएं(right) पैर पर ले आएं और बाएं(left) पैर को ऊपर उठाइये। इसके बाद बाएं पैर को दाईं(right) टांग के आगे से घुमाते हुए पीछे ले जाइये। इस दौरान बाईं थाई, दाईं थाई के ऊपर रहेगी। अब अगले स्टेप में आपको दोनों बाजुओं को कोहनी से मोड़ते हुए क्रास करना है। ऐसा करते समय आपको बाईं बाजू को दाईंं बाजू के ऊपर रखना है। फिर दोनों हथेलियों को नमस्कार मुद्रा में लाने का प्रयास करिए। अब इस मुद्रा में जितनी देर हो सके खुद का बैलेंस बनाये रखें। फिर धीरे-धीरे अपनी सुरूआती अवस्था में आ जाइये। अब यही प्रक्रिया आपको दूसरी तरफ से भी करनी है। इस आसन को 3 से 5 बार किया जा सकता है।

वृक्षासन

वृक्षासन को “ट्री पोज़” भी कहते हैं।  यह सबसे आसान आसान है। जैसा कि नाम से पता चलता है कि वृक्षासन में ‘वृक्ष’ का अर्थ है पेड़ और ‘आसन’ का अर्थ है शरीर की मुद्रा। इसीलिए इस आसन में आप एक पेड़ की मुद्रा में होते हैं और उसमें बेलेंस बनाना होता है। यह शारीरिक(physical) और भावनात्मक(emotional) दोनों बेलेंस को बेहतर बनाने में मदद करता है। वृक्षासन पैरों, टखनों, पिंडलियों, काव्स, घुटनों और जांघों की मांसपेशियों को बिल्ड करने में मदद करता है। यह मुद्रा आपको रेजुवेनेशन की स्थिति में लाती है। यह पैर, पीठ और हाथों को स्ट्रेच करके आपके शरीर को फिट रखता है। वृक्षासन शरीर के अंदर संतुलन की भावना पैदा करता है। यह मानसिक कल्याण, ध्यान केंद्रित करने और एकाग्रता(focus) को बनाने में भी मदद करता है, जिससे आपका दिमाग तेज होता है। यह पैरों को मजबूत बनाता है व एंड्योरेंस को बेहतर करता है और यह पैरों की फ्लैक्सिबिलिटी को भी बढ़ाता है। वृक्षासन में लंबे समय तक सही ढंग से खड़े रहने की जरूरत होती है, जिसमें आपकी रीढ़ सीधी, आपके पैर मजबूत, और आपका ऊपरी शरीर सीधा होना चाहिए।  इससे आपको शरीर के पोश्चर को बेहतर करने में मदद मिलेगी। यह आसन सायटिका के कुछ मामलों में राहत देने के लिए भी फायदेमंद माना जाता है। यह सबसे अच्छी स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज भी है जो थाई एरिया, कमर और सीने को स्ट्रेच करने में मदद करता है। अगर आपको हाई ब्लड प्रेशर और माइग्रेन है तो ये आसान जरूर करें। इस आसन से मानसिक तनाव (mental Stress) कम करने में मदद मिलती है।

वृक्षासन करने के तरीके-

सबसे पहले जमीन पर सीधे खड़े हो जाइए फिर अपने हाथों को अपने शरीर के दोनों ओर रखिए। अब अपने दाहिने (right) घुटने को मोड़ें और दाएं पैर को अपनी बाईं (left) जांघ पर रखिये। यह ध्यान रहे कि आपके पैर का तलवा आपकी ईनर थाई पर सीधा रखा हो। इस करते वक़्त आपका बायां पैर सीधा होना चाहिए ताकि आप शरीर का बेलेंस बनाए रख सकें। जब आप इस मुद्रा में होंगे तो गहरी सांस लेते रहें। अब अपने हाथों को अपने सिर के ऊपर उठाएं, और अपनी हथेलियों को एक साथ मिलाकर ‘नमस्ते’ मुद्रा में लाइए। जब आप आसन में हों, तो आपके सामने थोड़ी दूरी पर किसी भी वस्तु पर ध्यान केंद्रित करिए। ऐसा करते वक़्त आपका पूरा शरीर स्ट्रेच होना चाहिए और रीढ़ को सीधा रखना चाहिए। अब 30 सेकेंड के लिए इस मुद्रा में रहें। आसान पूरा होने पर सांस छोड़ते हुए आसन से सामान्य स्थिति में वापस आ जाइए। अब आसन के इन्हीं स्टेप्स को दूसरे पैर के साथ दोहराइये।

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शवासन

शवासन तनाव कम करने का सबसे अच्छा तरीका है। इस आसन को कभी भी किसी भी वक़्त कर सकते हैं। यह दिखने में आसान पर सबसे कठिन आसन है। इसमें अपने मन की भावनाओं और शरीर की थकान दोनों पर एक साथ नियंत्रण (control) पाना होता है। इसे करने से डीप हीलिंग के साथ ही शरीर को अंदर तक आराम भी मिलता है। इस आसन को तब भी किया जा सकता है जब आप बुरी तरह से थके हों और आपको थोड़ी ही देर में वापस काम पर लौटना हो। शवासन  न सिर्फ आपको ताजगी ​बल्कि ऊर्जा भी देता है। इसे रोज़ 12 से 15 मिनट तक करना चाहिए। इसको करने से डिप्रेशन भी खत्म हो जाता है। शवासन शरीर को न सिर्फ रिलैक्स करता है बल्कि मेडिटेशन की स्थिति में भी ले जाता है। इससे मानसिक तनाव (mental Stress) कम करने में मदद मिलती है। इससे शरीर की कोशिकाओं और ऊतकों(tissue)  को रिपेयर होने का मौका मिलता है बल्कि स्ट्रेस से भी छुटकारा पाने में मदद मिलती है।

शवासन करने का तरीका-

सबसे पहले जमीन पर पीठ के बल लेट जाइए। लेकिन किसी तकिया या कुशन का इस्तेमाल बिल्कुल न करें। अब अपनी आंखें बंद कर लीजिए। दोनों टांगों को ध्यान से अलग-अलग करिये। इस बात का ध्यान रखें कि आप पूरी तरह से रिलैक्स हों और आपके पैरों के दोनों अंगूठे साइड की तरफ झुके हुए हों।  आपके हाथ आपके शरीर के साथ ही हों लेकिन थोड़ी दूर हों। अब हथेलियों को खुला लेकिन ऊपर की तरफ रखिये। अब धीरे-धीरे शरीर के हर हिस्से की तरफ ध्यान देना शुरू करें, शुरुआत पैरों के अंगूठे से करिए। जब आप ऐसा करने लगें, तो साँस बहुत आराम से लें। धीरे-धीरे आप गहरे मेडिटेशन में जाने लगेंगे। लेकिन जैसे ही आपको आलस या उबासी आए सांस लेने की गति तेज कर दें। आपको शवासन करते हुए कभी भी सोना नहीं है। सांस लेने की गति धीमी लेकिन गहरी रखिये। ये आपको धीरे-धीरे पूरी तरह रिलैक्स करने लगेगी। मन में ख्याल लाएं कि जब आप सांस ले रहे हैं तो वह पूरे शरीर में फैल रही है। आप और ज्यादा ऊर्जावान होते जा रहे हैं। लेकिन जब आप सांस छोड़ रहे हैं, शरीर शांत होता जा रहा है। आपका फोकस सिर्फ खुद और अपने शरीर पर ही रहेगा। बाकी सारे कामों को भूल जाइये। इस स्थिति के सामने सरेंडर कर दें और आनंद लीजिए। लेकिन ध्यान दें आपको सोना नहीं है 10-12 मिनट के बाद, जब आपका शरीर पूरी तरह से रिलैक्स हो जाए और नई ताजगी को महसूस करने लगे तो, एक तरफ को करवट ले लें। दोनों आंखों को बंद रखें। एक मिनट तक इसी स्थिति में बैठे रहें। इसके बाद धीरे-धीरे उठें और फिर पालथी मारकर या सुखासन में बैठ जाएं।  कुछ गहरी सांसें लें और आंखें खोलने से पहले आसपास चल रहे माहौल का जायजा लें। इसके बाद धीरे-धीरे आंखें खोल दें।
अब आप महसूस करेंगे कि आपका दिमाग बहुत हल्का हो गया है।

आजकल के जीवन में योग का बहुत महत्व है। इससे आपका स्वास्थ्य भी ठीक रहता है और मानसिक तनाव(mental Stress) भी खत्म हो जाता है। योग करने से आपकी आयु भी बढ़ती है। इसलिए आप की योग अपनाइये, अपना और अपने परिवार का ख्याल रखिये। अगर आपकी किसी प्रकार की दवाई चल रही है तो उसे भी लेते रहिये।

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