तबलीग़ी जमात पर बेनकाब हुए अंताक्षरी खेलने वाले मीडिया के मंसूबे, चला रहा है फेक न्यूज़ की फैक्ट्री…

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ग्राउंड रिपोर्ट, नेहाल रिज़वी :
देश में जब दिल्ली के निज़ामुद्दीन में स्थित तबलीग़ी जमात के बने मरकज़ में फंसे लोगों की ख़बर निकल कर सामने आई और तबलीगी जमात में शामिल छह लोगों की कोविड-19 से मौत का मामला सामने आया, तब से ही भारतीया मीडिया ने तबलीग़ी जमात की आड़ में देश के मुस्लमानों पर फेक न्यूज़ की बमबारी कर दी । मीडिया ने चंद लम्हों में इसको हिंदू-मुस्लिम का मामला बना कर परोसना शुरू कर दिया । सरकार से सवाल पूछने के बजाए नेशनल चैनल पर अंताक्षरी खेलने वाली मीडिया को जैसे ही मुस्लमानों से जुड़ा कोई मामला मिला उसने देश भर के मुस्लमानों की छवि को धूमिल करना शुरू कर दिया । कोरोनावायरस जैसी जानलेवा बीमारी को भारत में फैलाने का ज़िम्मेदार मुस्लमानों को ठहराना शुरू कर दिया ।

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इस देश का मुस्लमान भी तबलीग़ी जमात की लापरवाहियों का समर्थन नहीं करेगा, लेकिन जिस तरह से मीडिया के एक बड़े हिस्से ने कोरोना जैसी जानलेवा महामारी को भी सांप्रदायिक खेल में तब्दील कर दिया है, वह भयावह है। कुल मिलाकर देश में ऐसा माहौल बनाने का प्रयास हो रहा है जैसे कोरोना तबलीग़ की वजह से फैल रहा है, या वे जानबूझकर फैला रहे हैं। हद तो ये है कि इस प्रचार में धार लाने के लिए तमाम झूठ गढ़े जा रहे हैं जिसे मीडिया का बड़ा हिस्सा भी प्रसारित करने में जुटा है। इस झूठ में देश का प्रिंट मीडिया भी पीछे नहीं है। देश के तमाम बड़े अख़बारों ने भी जमात को लेकर फेक न्यूज़ परोसना शुरू कर दिया।

मांसाहारी खाने के लिए उत्पात मचा रहे हैं हिरासत में लिये गये तबलीगी जमात के लोग, ऐसी भी ख़बरें सोशल मीडिया में ख़ूब फैलाई गईं। लेकिन इसकी सच्चाई तब सामने आई जब मांसाहारी भोजन और खुले में शौच जैसी ख़बरें किसी और और ने नहीं, एक ज़माने में हिंदी के चुनिंदा प्रखर और सत्यनिष्ठ अख़बारों में दर्ज किये जाने वाले अमर उजाला ने इसे छापा। इसका भी खंडन पुलिस ने आधिकारिक रूप से कर दिया लेकिन हिंदी पट्टी के बड़े अख़बारों ने भी फर्ज़ी खबरों को बेहद ही प्रमुखता से छाप कर परोसा।

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देशभर में मुस्लमानों को लेकर नफरत फैलाने वालों ने सोशल मीडिया के प्लेटफार्म फेसबुक, व्हाट्सएप और ट्विटर पर फर्ज़ी वीडियो क्लिपों में मुसलमानों को भारत में कोरोनावायरस फैलाने का जिम्मेदार बताकर फैलाना शुरू कर दिया। तथ्यों की जांच करने वाली कुछ वेबसाइटों ने बताया है कि मानो ऐसा प्रातीत हो रहा है कि किसी सोची समझी साज़िश के तहत इतनी तेज़ी से फर्जी खबरें फैलाई हों। जिस तेज़ी से फर्ज़ी खबरें फैलाई गई, उस तेजी से इन खबरों का भंडाफोड़ करना बहुत मुश्किल है ।

सबसे अधिक चौकाने वाली बात जो सामने आई उसे आप खुद देखें और सझने की कोशिश करे कि मुस्लमानों से नफरत में बड़े-बड़े संपादक भी भीड़ का हिस्सा बन गए । ज़रा ऊपर की तस्वीर ग़ौर से देखिये, भारत में हिंदी टीवी पत्रकारिता के पितामह एस.पी.सिंह के चेले दीपक चौरसिया किस शान से प्रयागराज की एक घटना को तबलीगी जमात  से जोड़ रहे हैं जिसका वहां की पुलिस खंडन कर रही है। देश ऐसा पहली बार देख रहा है कि संपादक स्तर के पत्रकार के दावों का खंडन पुलिस कर रही है। ऐसी झूठी ख़बरें लाखो की संख्या में सक्रिय व्हाट्सऐप ग्रुप्स में पहुँचीं जबकि खंडन की परवाह किसे। फ़र्ज़ी ख़बरें किसी मक़सद से गढ़ी जाती हैं ।

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इस्लामोफोबिक फर्जी खबरों में तूफान की तरह हुई वृद्धि

फैक्ट चेक करने वाली एक वेबसाइट “फैक्टली” के संस्थापक राकेश डुब्बुडू का कहना है कि- मार्च महीने के मध्य से देश में सोशल मीडिया में कोविड-19 के बारे में तूफान की तरह फेक न्यूज़ में बढ़ोतरी हुई है। डुब्बुडू ने कहा कि अभी हाल तक कोविड-19 से संबंधित अधिकांश फर्जी खबरों का स्वर धार्मिक नहीं था। लेकिन 30 मार्च से सोशल मीडिया पर इस्लामोफोबिक फर्जी खबरों में अचानक से तूफान की तरह वृद्धि हुई है मानो कोई पहले से ही तैयारी कर के बैठा हो। जब से निजामुद्दीन की घटना पब्लिक डोमेन में आई तबसे मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाने वाली फर्जी खबरों की बाढ़ आ गई है।

ज़ी न्यूज़ उत्तर प्रदेश उत्तराखंड ने ट्विटर पर एक ख़बर डाली कि ‘फ़िरोज़ाबाद में 4 तबलीग़ी जमाती कोरोना पॉज़िटिव, इन्हें लेने पहुंची मेडिकल टीम पर हुआ पथराव’। सोशल मीडिया पर इसका भी जमकर प्रसार हुआ। बाद में फ़िरोज़ाबाद पुलिस ने इस ख़बर का खंडन कर दिया और लिखा: ‘आपके द्वारा असत्य और भ्रामक ख़बर फैलायी जा रही है, जबकि जनपद फ़िरोज़ाबाद में न तो किसी मेडिकल टीम एवं न ही एम्बूलेंस गाड़ी पर किसी तरह का पथराव नहीं किया गया है।आप अपने द्वारा किये गये ट्वीट को तत्काल डिलीट करें।’

8 से 15 मार्च तक निजामुद्दीन में तबलीगी जमात द्वारा आयोजित एक सम्मेलन के लिए दो हजार से अधिक जमाती इकट्ठा हुए थे। दिल्ली सरकार द्वारा 200 से अधिक लोगों के जमा होने पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद भी यह सम्मेलन दो दिनों तक जारी रहा। रिपोर्टों से पता चलता है कि 13 मार्च का आदेश धार्मिक संगठनों के लिए नहीं था। इस कार्यक्रम के आयोजकों ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया कि 21 मार्च को रेल सेवाओं को रद्द करने के कारण दक्षिण भारत और विदेशों से आए कई प्रतिनिधि दिल्ली में ही फंस गए थे।

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पुलिस ने जमात के कार्यालय को कर दिया सील

19 मार्च को सम्मेलन में भाग लेने वाले दस इंडोनेशियाई नागरिकों ने तेलंगाना में कोविड-19 का परीक्षण कराया जो सकारात्मक निकला। इसके बाद देश के विभिन्न हिस्सों से दर्जनों जमातियों को कोरोनावायरस पॉजिटिव पाया गया। तब से इस सम्मेलन में शामिल रहे कुछ लोगों की मौत हो चुकी है। 30 मार्च को दिल्ली पुलिस ने जमात के कार्यालय को सील कर दिया और उसके नेताओं पर आपराधिक षड्यंत्र और महामारी रोग अधिनियम के तहत अन्य दंड प्रावधानों सहित विभिन्न अपराधों के आरोप दर्ज किए।

4 अप्रैल को न्यूज़ 18 ने ख़बर चलाई कि दुबई से मध्य प्रदेश के मुरैना लौटे एक व्यक्ति से 11 लोगों को कोरोना वायरस फैल गया है। ख़बर की हेडिंग के साथ जो फीचर तस्वीर लगायी गयी उसमें तीन व्यक्ति बैठे दिखायी देते हैं। उन सभी ने टोपियां पहनी हुई हैं और कुर्ता पाजामा पहना हुआ है। तस्वीर भी ऐसी जैसे किसी झरोखे से छिपकर खींची गयी हो। मतलब साफ़ था कि पाठक खबर की लिंक देखेगा तो उसके मन में यही छवि बनेगी कि मामला मुसलमानों या तबलीग़ी जमात से जुड़ा हुआ है। जबकि ख़बर के अंदर मामला कुछ और था, और व्यक्ति की कोई पहचान नहीं बतायी गयी थी। बाद में यह सामने आया कि उस व्यक्ति का नाम सुरेश है और दुबई में काम करता है। इस तरह भी मीडिया ने मुस्लमानों की छवि को धूमिल करने का काम जारी रखा।

मीडिया के एक वर्ग द्वारा तब्लीग़ी जमात से जुड़ी भ्रामक खबरों के फैलाने का सिलसिला अब भी जारी है। इस अनैतिक खेल में न्यूज़ एजेंसी ANI भी साफ तौर पर उतर गई है। उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा फेक न्यूज़ के खिलाफ अभियान में बहुत से ऐसे चेहरे सामने आ रहे हैं जिन्होंने इन भ्रामक खबरों के प्रचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। मंगलवार को न्यूज़ एजेंसी ANI ने नोएडा के क्वारन्टीन सेंटर से जुड़ी ख़बर को तब्लीग़ी जमात से जोड़कर चलाया और उस ख़बर को कई बड़े पत्रकारों द्वारा तब्लीग़ी जमात को निशाना बनाते हुए रिट्वीट भी किया गया।

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आप ( ANI ) भ्रामक खबर चला रहे हैं : DCP

ANI न्यूज़ एजेंसी ने नोएडा सेक्टर 5 के हरोला में क्वारन्टीन किए गए लोगों से जुड़ी ख़बर को मंगलवार रात 10 बजकर 27 मिनट पर डीसीपी गौतम बुद्ध नगर, संकल्प शर्मा के हवाले से ट्वीट किया था। जिसमें ये दावा किया गया था कि तब्लीग़ी जमात के संपर्क में आने वालों को क्वारन्टीन किया गया है।डीसीपी नोएडा के आधिकारिक ट्वीटर हैंडल से रात 1 बजकर 10 मिनट पर ANI की उस भ्रामक खबर को टैग करते हुए लिखा गया कि, “बताए गए स्थान पर उन लोगों को क्वारन्टीन किया गया है जो लोग पॉजिटिव लोगों के संपर्क में आए थे। डीसीपी के बयान में तब्लीग़ी जमात का उल्लेख नहीं किया गया है। आप कथन को गलत तरीके से पेश कर रहे हैं और फेक न्यूज़ फैला रहे हैं।”

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मीडिया के एक बड़े वर्ग द्वारा पिछले कुछ दिनों से तब्लीग़ी जमात को लेकर फैलाए गए भ्रम की साम्प्रदायिक प्रतिक्रिया के चलते दिल्ली, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों से मुस्लिम फेरीवालों, सब्ज़ी की दुकान लगाने वालों को तब्लीग़ी और कोरोना संक्रमित कह कर उनके साथ की गई अभद्रता के कई मामले सामने आए हैं। राजस्थान में यूपी के फेरीवालों को धमकाया गया है, दिल्ली में सब्ज़ी बेचने वालों को हिन्दू आबादी वाले क्षेत्र में आने से मना किया गया है और उत्तर प्रदेश के मुज़फ्फरनगर में कई स्थानों पर मुसलमानों के फल, सब्ज़ी इत्यादि बेचने का विरोध किया गया है।

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जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने सुप्रीम कोर्ट में दायर की याचिका

वहीं, देश में बढ़ते कोरोना संक्रमण के लिए तब्लीगी जमात के लोगों को जिम्मेदार बताने के खिलाफ जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। जमीयत का आरोप है कि मीडिया का एक वर्ग मार्च में हुए निजामुद्दीन मरकज के कार्यक्रम को लेकर नफरत फैला रहा है। इसलिए केंद्र को निर्देश दिया जाए कि वह मुस्लिमों को लेकर फैलाई जा रहीं फेक न्यूज पर रोक लगाए और इनके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। जमीयत के वकील एजाज मकबूल ने याचिका में कहा है कि तब्लीगी के कार्यक्रम में हुई एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना के लिए पूरे मुस्लिम समुदाय को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। इन दिनों सोशल मीडिया में कई तरह के वीडियो और फेक न्यूज शेयर की जा रही हैं। जिनसे मुस्लिमों की छवि खराब हो रही है। इनसे तनाव बढ़ सकता है, जो साम्प्रदायिक सौहार्द्र और मुस्लिमों की जान पर खतरा है। साथ ही यह संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लंघन भी है।