MCU Bhopal vice chancellor Brij Kishore Kuthiala fraud in journalism niversity

भोपाल : कुठियाला ने सरकारी पैसे से खरीदी महंगी शराब, WiFi के लिए तरसते रहे बच्चें, 5 खास बातें…

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भोपाल, 5 मार्च। मध्य प्रदेश में सत्ता बदलते ही सरकारी संस्थानों और विश्वविद्यालयों पर उच्च पदों पर बैठे अधिकारियों पर गाज गिरना शुरू हो चुकी है। पिछले लंबे अरसे से विवादों में रहे एशिया के पहली मीडिया विश्वविदायालय में चल रही गड़बड़ियों की जांच की मांग के बाद आई रिपोर्ट में एक बाद एक सनसनीखेज खुलासे हो रहे हैं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के तत्कालीन कुलपति बृज किशोर कुठियाला द्वारा की गई गड़बड़ियों की पढ़ें 5 खास बातें…

1.) फंड की कमी बताकर बच्चों को किया गुमराह –
विश्वविद्यालय में हुई धांधलियों और आरोपों की फेहरिस्त काफी लंबी है। बच्चों को बेहतर माहौल, बेहतर शिक्षक देने की मांग लंबे अरसे से उठती रही हैं, लेकिन कभी फंड की दिक्कत तो कभी तकनीकि खामियों का जिक्र कर उन्हें गुमराह किया गया। बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर, टेलीविजन, अत्याधुनिक कंप्यूटर और वाईफाई जैसी कई बैसिक चीजों के लिए बच्चें समय-समय पर आवाज़ उठाते रहे लेकिन फंड की कमी बताकर उनकी मांगों को टाल दिया गया।

2.) सरकारी पैसे से चुकाया शराब का बिल –
हाल ही में आई जांच समिति की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि, तत्कालीन कुलपति बृज किशोर कुठियाला ने सरकारी पैसों का गलत खर्च करते हुए शराब का बिल चुकाया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 40 पन्नों की जांच रिपोर्ट बताती है कि पूर्व कुलपति कुठियाला ने लाखों रुपये शराब पर उड़ाए हैं। 3000 रुपये से लेकर 5000 रुपये तक की कई इंपोर्टेड कीमती रेड वाइन का बिल सरकारी पैसों से चुकाया गया।

3.) रिसर्च के नाम पर 1 करोड़ 7 लाख बर्बाद –
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पत्रकारिता में देश के प्रमुख विश्वविद्यालयों में से एक माखनलाल यूनिर्सिटी में भाषाई जर्नलिज्म में रिसर्च के नाम पर करीब 1 करोड़ 7 लाख रुपए से ज्यादा की पैसे खर्च कर दिए गए। खास बात यह है कि पांच साल में पूरे होने वाले इस प्रोजेक्ट में किताबें छापी ही नहीं गईं।

4.) परीक्षा के नाम पर 9 करोड़ की धांधली –
कुठियाला के राज में परीक्षा के नाम पर नागपुर की एक संस्था ‘न्यासा’ को करीब 9 करोड़ रुपए का भुगतान किया गया। जबकि एक्सपर्ट की मानें तो राजधानी भोपाल की ही संस्था इस परीक्षा को इससे कम राशि में कर सकती थी। जांच रिपोर्ट में यह भी पाया गया है कि किसी भी पाठ्यक्रम में छात्रों की संख्या इतनी नहीं पाई गई कि इतनी बड़ी राशि का भुगतान किया जाए।

5.) CM को सौंपी रिपोर्ट, EWO को मामला देने पर विचार –
जांच के बाद इन्वेस्टिंग कमेटी ने अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंप दी है। खबर है कि, आर्थिक अपराध शाखा यानी EOW (इकॉनोमिक ओफेंस विंग) को यह मामला सौंपा जा सकता है। बता दें कि जांच समिति के अध्यक्ष एम गोपाल रेड्डी (एसीएस जनसंपर्क) और सदस्य संदीप दीक्षित और भूपेंद्र गुप्ता हैं।

इस पूरे मामले में जांच कमेटी के सदस्य भूपेन्द्र गुप्ता ने नेशनल हेराल्ड से बातचीत में बताया कि, जांच के दौरान फंड में कई अनियमितता, गड़बड़िया और नियुक्तियों, भर्तियों में धांधली और बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हुआ है। हमने जांच मुख्यमंत्री को सौंप दी है। इस मामले को EOW को देेने के लिए विचार किया जा रहा है।