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लॉकडाउन के चलते उच्चतम स्तर पर बेरोज़गारी…जा सकती हैं हज़ारों की नौकरियां !

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कोरोना का कहर भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए काफ़ी घातक साबित हो रहा है। लॉकडाउन की वजह से देश में बेरोजगारी दर में भारी बढ़ोतरी देखी गई है। केवल 15 दिन में बेरोजगारी दर 23 फीसदी के स्तर पर पहुंच गई है। वहीं, शहरों में बेरोजगारी 31 फीसदी पहुंच गई है । सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (सीएमआईई) द्वारा जारी इस आंकड़े के अनुसार, मार्च के महीने में पहले से ही बेरोजगारी दर ज्यादा थी लेकिन लॉकडाउन के ऐलान के बाद बेरोजगारी दर पिछले 43 महीने के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई।

श्रम भागीदारी दर अब तक के सबसे निचले स्तर

CMIE के सीईओ महेश व्यास ने इसकी वेबसाइट पर छपी रिपोर्ट में कहा, ‘मार्च 2020 में श्रम भागीदारी दर अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई। बेरोजगारी दर काफी तेजी से बढ़ा और रोजगार दर अपने अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई। रिपोर्ट के अनुसार मार्च में पूरे महीने की बात की जाए तो बेरोजगारी दर 8.7 फीसदी रही। मार्च के अंतिम सप्ताह में बेरोजगारी दर बढ़कर 23.8 फीसदी तक पहुंच गई। इसके पहले अगस्त 2016 में बेरोजगारी की दर 9.59 फीसदी थी।

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नौकरी मिलने की उम्मीद नहीं

पहली बार लेबर पार्टिसिपेशन रेट 42 फ़ीसदी के नीचे आ गई है। मार्च के महीने में ही यह 41.9 फ़ीसदी पर आ गई है। जबकि फरवरी में 42.6 फ़ीसदी के स्तर पर थी। लेबर पार्टिसिपेशन रेट में गिरावट का सीधा मतलब यह है कि जॉब मार्केट में लेबर नौकरी के लिए नहीं आ रहे हैं। यानी उम्मीद नहीं है कि उसे नौकरी मिलेगी। जो एक गंभीर संकेत है।

देश में कुल वर्कफोर्स का एक तिहाई हिस्सा केज्युअल वर्कर्स का है। अगर अर्थव्यवस्था में संकट लगातार बढ़ता रहता है, तो उनकी नौकरियों के सुरक्षित रहने के आसार कम काफी कम होते जाएंगे। गौरतलब है कि देश में 25 मार्च से ही संपूर्ण लॉकडाउन लागू है। कोरोना वायरस के संक्रमण की चेन को तोड़ने के लिए सरकार ने यह लॉकडाउन लागू किया हुआ है।