भ्रामक प्रचार कभी कूटनीति और मज़बूत नेतृत्व का विकल्प नहीं हो सकता: मनमोहन सिंह

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पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने लदाख में मौजूदा विवाद पर केंद्र सरकार को नसीहत दी है। 10 साल तक भारत के पीएम रहे मनमोहन सिंह ने तंज कसते हुए कहा कि भ्रामक प्रचार कभी भी कूटनीति और मजबूत नेतृत्व का विकल्प नहीं हो सकता। मनमोहन सिंह का यह बयान ऐसे वक्त में आया है जब कांग्रेस नेता राहुल गांधी लगातार गलवान विवाद पर सीधे पीएम मोदी को घेर रहे हैं।

मनमोहन सिंह समय-समय पर सरकार को आइना दिखाते रहे हैं। देश के तमाम बड़े मसलों पर मनमोहन सिंह सरकार को नसीहत के साथ-साथ दुष्परिणाम के बारे में भी आगाह करते रहे हैं। अब जबकि देश सीमा पर चीन की धोखेबाजी झेल रहा है ऐसे वक्त में राहुल गांधी समेत कांग्रेस पार्टी के साथ मनमोहन सिंह ने भी केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार को घेरा है।

15 जून को लदाख की गलवान घाटी में चीनी सैनिकों से हिंसक भिडंत में शहीद भारत के 20 वीरों को पूर्व पीएम डॉ. मनमोहन सिंह ने सलाम किया। इसके बाद उन्होंने सीधे तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को घेरा है।

मनमोहन सिंह ने पत्र जारी कर कहा है कि वर्तमान में दोनों देश के बीच स्थिति ठीक नहीं है और हम आज इतिहासस के नाजुक मोड़ पर खड़े हैं। ऐसे स्थिति में प्रधानमंत्री को अपने शब्दों और घोषणाओं द्वारा देश की सुरक्षा एवं सामरिक हितों पर पड़ने वाले प्रभाव के प्रति सदैव बेहद सावधान होना चाहिए।

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मनमोहन सिंह ने केंद्र सरकार के कूटनीतिक के नीतियों पर निशाना साधते हुए कहा कि भ्रामक प्रचार कभी भी कूटनीति तथा मजबूत नेतृत्व का विकल्प नहीं हो सकता। इसलिए सरकार के इससे बचना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि सरकार के सहयोगियों द्वारा प्रचारित झूठ के आडंबर से सच्चाई को नहीं दबाया जा सकता है।

मनमोहन सिंह ने कहा, “आज हम इतिहास के एक नाजुक मोड़ पर खड़े हैं। हमारी सरकार के निर्णय व सरकार द्वारा उठाए गए कदम तय करेंगे कि भविष्य की पीढ़ियां हमारा आंकलन कैसे करें। जो देश का नेतृत्व कर रहे हैं, उनके कंधों पर कर्तव्य का गहन दायित्व है। हमारे प्रजातंत्र में यह दायित्व देश के प्रधानमंत्री का है।”

पीएम मोदी को कर्तव्य की याद दिलाते हुए मनमोहन सिंह ने उन्हें अपने बयानों को लेकर सावधान रहने की नसीहत दी है।  मनमोहन सिंह ने कहा है कि प्रधानमंत्री को अपने शब्दों व एलान से देश की सुरक्षा एवं सामरिक व भूभागीय हितों पर पड़ने वाले प्रभाव के प्रति चिंतित होना चाहिए।

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मनमोहन सिंह ने आगे कहा कि हम प्रधानमंत्री व केंद्र सरकार से आग्रह करते हैं कि वो वक्त की चुनौतियों का सामना करें, और कर्नल बी. संतोष बाबू व हमारे सैनिकों की कुर्बानी की कसौटी पर खरा उतरें, जिन्होंने ‘राष्ट्रीय सुरक्षा’ व ‘भूभागीय अखंडता’ के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी। इससे कुछ भी कम जनादेश से ऐतिहासिक विश्वासघात होगा।

चीन के मसले पर सर्वदलीय बैठक के बाद पीएम मोदी ने कहा था, “हमारी सीमा में न तो कोई घुसा है और न ही किसी ने हमारी पोस्ट पर कब्जा किया है।” पीएम मोदी के इस बयान पर विपक्षी दलों ने सवाल उठाए तो पीएमओ को सफाई जारी करनी पड़ी। पीएमओ की तरफ से बताया गया कि एलएसी पर चीनी सेना की हरकतों की वजह से विवाद हुआ है।

चीन ने गलवां नदी घाटी क्षेत्र में में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलसीए) के इधर भारतीय भू-भाग को पूरी तरह से खाली नहीं किया है। सैन्य सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार पेट्रोलिंग प्वाइंट 14 पर ही भारत और चीन के सैनिकों के बीच में 15-16 जून को हिंसक झड़प हुई थी।

हिंसक झड़प का कारण ही भारतीय भू-भाग को चीन की घुसपैठ से मुक्त कराना था। यह गलवां नदी घाटी का किनारा ही था। चीन ने पैंगाोंग त्सो के आसपास भारतीय क्षेत्र में 8 किमी की लंबाई में सैन्य संरचना, स्थाई बंकर आदि बना लिए हैं। अप्रैल महीने से लेकर जून तक उसने लगातार इसे अंजाम दिया है। चीन की सेना फिंगर 1-3 तक गश्त करती थी। भारतीय सुरक्षा बल फिंगर 4-से 8 तक निगरानी करते थे।

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फिंगर 4 पर  आईटीबीपी की निगरानी पोस्ट थी। अब चीन के सैनिक भारतीय सुरक्षा बलों को फिंगर 4 से आगे की तरफ नहीं जाने दे रहे हैं।इस तरह से देखा जाए तो सैन्य सूत्रों के मुताबिक करीब 60 वर्ग किमी का भारतीय भू-भाग चीन के कब्जे में है और चीन इसे खाली करने या मामले को सुलझाने के बारे में कोई बात नहीं करना चाहता।

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