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मन की बात में किसान आंदोलन पर मौन रहे प्रधानमंत्री मोदी

PM Modi corona second wave
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प्रधानमंत्री मोदी अपने रेडियो कार्यक्रम मन की बात के ज़रिए देश में घट रही तमाम घटनाओं पर बात करते हैं। इस कार्यक्रम के ज़रिए वो देश भर में अच्छा काम कर रहे लोगों और उनकी उपलब्धियों के बारे में भी बात करते हैं। इस बार उम्मीद जताई जा रही थी कि प्रधानमंत्री मोदी अपने कार्यक्रम के ज़रिए लोगों को वैक्सीन के बारे में खुश खबरी दे सकते हैं लेकिन वैक्सीन को लेकर कोई बात प्रधानमंत्री ने नही की। साथ ही दिल्ली में चल रहे किसान आंदोलन पर भी प्रधानमंत्री मौन ही रहे। हालांकि उन्होंने नए कृषि कानून के फायदे ज़रुर गिनाए।

क्या कहा प्रधानमंत्री मोदी ने मन की बात में-

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात कार्यक्रम में किसानों को नए कृषि कानूनों के फायदे बताए हैं। उन्होंने कहा कि नए कृषि कानूनों से न सिर्फ किसानों के अनेक बंधन समाप्त हुए हैं, बल्कि उन्हें नए अधिकार और नए अवसर भी भी मिले हैं।

काफी विचार विमर्श के बाद भारत की संसद ने कृषि सुधारों को कानूनी स्वरूप दिया। इन सुधारों से न सिर्फ किसानों के अनेक बंधन समाप्त हुए हैं, बल्कि उन्हें नए अधिकार और नए अवसर भी भी मिले हैं।

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प्रधानमंत्री ने देश के नौजवानों से कहा कि मेरा नौजवानों, विशेषकर कृषि की पढ़ाई कर रहे लाखों विद्यार्थियों से आग्रह है, कि वो अपने आस-पास के गावों में जाकर किसानों को आधुनिक कृषि के बारे में और हाल में हुए कृषि सुधारों के बारे में जागरूक करें।

प्रधानमंत्री ने पराली प्रबंधन की बात करते हुए हरियाणा के कृषि उद्यमी वीरेंद्र का जिक्र किया और बताया कि पराली प्रबंधन को कैसे वीरेंद्र ने एक नई दिशा दिखाई है। पराली का समाधान करने के लिए वीरेंद्र ने पुआल की गांठ बनाने वाली स्ट्रॉ बैलर मशीन खरीदी। इसके लिए उन्हें कृषि विभाग से आर्थिक मदद भी मिली।

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देश में खड़ा हो रहा इतिहास का सबसे बड़ा किसान आंदोलन

आपको बता दें के कई राज्यों के किसान दिल्ली में जमा होना शुरु हो गए हैं। हरियाणा और पंजाब के किसानों को सरकार ने दिल्ली में दाखिल होने से रोकने के लिए सभी प्रयास किए लेकिन किसान सारी रुकावटों को पार करते हुए आंदोलन करने दिल्ली आ गए हैं। अब तक सरकार इन किसानों को बिचौलिया और विपक्षी पार्टी द्वारा भड़काया हुआ बता रही थी। लेकिन अब देश के दूसरे राज्यों में भी किसान विरोध करने लगे हैं। हाल ही में मध्यप्रदेश में भी बड़ी संख्या में किसानों ने मंडी खत्म करने का आरोप लगाते हुए आंदोलन किया। अन्य राज्यों के किसान भी दिल्ली की बॉर्डर पर पहुंचने लगे हैं। सरकार द्वारा बातचीत का रास्ता खोला गया है। लेकिन हालात देखते हुए ऐसा लगता नहीं की सरकार अपना कानून वापस लेगी और किसान बिना अपनी मांग मनवाए आंदोलन खत्म करेंगे।

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