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इन 5 बिंदुओं में समझें आखिर क्यों MCU में मची है खलबली?

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आयुष ओझा | भोपाल

मध्य प्रदेश में सत्ता बदलते ही प्रशासनिक व्यवस्था भी तेजी से बदल रही है। विश्वविद्यालयों और संस्थानों में भी बदलाव की लहर है। वहीं भोपल स्थित एशिया की सबसे पहली जर्नलिज्म यूनिवर्सिटी माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय में भी गाज गिरनी शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री कमलनाथ ने बीजेपी के कार्यकाल के दौरान हुए घोटालों की जांच के लिए जांच की समिति गठित की है। जांच समिति गठित होते ही माखनलाल विश्वविद्यालय में खलबली का माहौल है।

माखनलाल में फर्जी नियुक्तियों सहित कई मामलों की जांच
इस समीति की कमान जनसंपर्क विभाग के अपर मुख्य सचिव एम. गोपाल रेड्डी देख रहे हैं। इसके अलावा इस जांच समीति में CMO ओएसडी भूपेंद्र गुप्ता और संदीप दीक्षित जैसे अधिकारियों को भी जिम्मेदारी दी गई है। जांच समिति बीजेपी शासन के दौरान हुई भर्तियों, गड़बड़ियों और घोटालों सहित अन्य मामलों की जांच कर करीब 15 दिन के अंदर अपनी रिपोर्ट पेश करेगी।

‘कुठियाला युग’ में भी हो चुके हैं फर्जीवाड़े
इस मामले में पहले भी माखनलाल पत्रकारिता विश्वविद्यालय सवालों के घेरे में रहा है। प्रो. बृजकिशोर कुठियाला के कुलपति रहने के दौरान हुई नियुक्तियों और पदोन्नतियों में अनियमितताओं और भ्रष्टाचार का मामला लोकायुक्त से लेकर हाईकोर्ट तक पहुंच चुका था। वहीं यूनिवर्सिटी के तत्कालीन रजिस्ट्रार प्रो. संजय द्विवेदी पर भी चुनाव कैंपेनिंग के आरोप चुके हैं। 

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पाठ्यक्रम, शैक्षणिक सामग्री में खास विचारधारा की जांच
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, जांच समिति विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम, शैक्षणिक सामग्री में किसी विशेष विचारधारा के पक्ष में किए गए बदलाव भी जांच कर सकती है। कांग्रेस कई मौकों पर पहले भी बीजेपी पर माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय को संघ की विचारधारा का गढ़ बनाने के आरोप लगाती रही है। माखनलाल के कई छात्र लाइब्रेरी खास विचारधारा को बढ़ावा देने वाली किताबों की उपलब्धता होने की बात की नाराज़गी सोशल मीडिया साइट जैसे ट्वीटर, फैसबुक जाहिर कर चुके हैं।

UGC नियमों के उल्लंघन की भी जांच
जांच समिति साल 2003 के बाद से विश्वविद्यालय द्वारा यूजीसी के मापदण्डों के उल्लंघन की मिली शिकायतों के साथ इस बात की भी जांच करेगी कि क्या इस दौरान कुछ व्यक्ति विशेष या समूहों विशेष को फायदा पहुंचाने के लिए गैरजरूरी कामों पर खर्च तो नहीं किया गया या किसी खास व्यक्ति को मिलने वाला वेतन या मानदेय यूजीसी के नियम के विरूद्ध किए गए है।

कुलपति, कुलाधिपति, कुलसचिव बदले गए
MCU से कुछ दिन पहले ही जगदीश उपासने ने कुलपति के पद से इस्तीफा दे दिया था। कुलाधिपति लाजपत आहूजा और कुलसचिव की भी बदली कर दी गई है। बता दें कि साल 2003 में भी दिग्विजय सरकार के समय कुलपति रहे शरदचंद्र को प्रदेश में भाजपा सरकार आने के बाद कुलपति पद से इस्तीफा देना पड़ा था।

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बहरहाल, इस पूरे मामले पर राजनीति भी तेज होती दिख रही है, बीजेपी प्रवक्ता राहुल कोठारी ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि, मुख्य सचिव द्वारा जांच करने के लिए बनाई गई समिति को अवैधानिक है। कोठारी ने कहा कि, विश्वविद्यालय के कुलाध्यक्ष भारत के उपराष्ट्रपति हैं। जबकी महापरिषद के सदस्तय मुख्यमंत्री सहित अन्य सदस्य। महापरिषद की बैठक के बिना इस तरह की जांच न्यायसंगत नहीं है।