ऐसे मैथ्स बन जाएगी आपकी दोस्त!

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विचार, कार्तिक सागर समाधिया

गणित जिसे अंग्रेजी में मैथ्स (mathematics) कहते हैं, बच्चों के लिए सबसे बड़ी मुश्किल क्यों हो जाती। दरअसल, जिस नंबर के डर से हम गिनती करना छोड़ देते हैं या फिर जिसकी वजह से हमें मार पड़ती है मनोविज्ञान उसी का बीच में से रास्ता निकाल लेता है। जिसे बैलेंस थ्योरी के नाम से भी जाना जाता।

यह बीच का रास्ता असल में वो रास्ता होता है जहाँ गणित से पिंड छुड़ाना शुरू कर देते हैं। जैसे कुछ समझने वाले कांसेप्ट को बिना समझे रट लेना। अक्सर गणित को प्रिय सब्जेक्ट बनाने और न बनाने की कहानी शुरू होती है प्राइमरी एजुकेशन से… अमूमन इस विषय को लेकर डर अधिक रहता है। तथ्य कहते हैं कि अगर गणित को समझने की समझ प्राइमरी क्लास में नहीं उत्पन्न हो पाती तो यह विषय एक फोबिया बन जाता है और यही फिर हमें ले जाता है बिना सोचे समझे रास्तों पर… गणित को समझने के लिए जरूरी नहीं हम किताब का सहारा लें, यह सिर्फ गणित विषय का ही सहारा लें।

गणित दरअसल सब तरफ है। हम इसको पढ़ने की शुरुआत कभी भी कहीं से भी कर सकते हैं। अगर हम किसी पार्क में बैठे हों। या फिर क्रिकेट मैच देख रहे हों, या फिर पड़ोस वाले अंकल के घर से ढेरों आम चुरा दोस्तों के हिस्सा बांटा कर रहे हों। हम देखते ऊँची ऊँची बिल्डिंग्स को, हम देखते हैं गोल चंद्रमा और सूरज को, तरह तरह की फूलों की पंखड़ियों को। मां के सर लगी गोल या तिकोनी बिंदी हो, या पिताजी का गोल सपाट टकला। हर जगह गणित है। गणित दरअसल एक खेल की तरह है। महीने भर रोजाना गुल्लक सिक्के डाल कर उन्हें इकट्ठा करना हो या फिर गुल्लक फोड़ कर सिक्के गिनना हो।

गणित सिर्फ एक विषय नहीं है। गणित जिंदगी है। गणित हमें तेज बनाती है। गणित हमें सही रास्ते पर कैसे चलना है यह बताती है। गणित हमें विराट कोहली और सचिन में फर्क करना बताती है। गणित हमें बताती है कि कैसे हम ज्यादा आम की जगह अच्छा आम खाएं। गणित हमें सिखाती है कि ज्यादा चीज के कोई मायने नहीं होते। हमारी हर बात को सही ढंग से रखने का तरीका हमें गणित सिखाती है। अगर हम गणित के जादू को अपना दोस्त बना लेंगे तो हम समझ जाएंगे क्यों गणित हमारा अच्छा दोस्त है। इसलिए बच्चों टीचर बार बार कहतें हैं कि गणित आपका सबसे सच्चा दोस्त है।