क्या “आत्मनिर्भर भारत” भी “मेक इन इंडिया” की तरह गायब हो जायेगा?

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Kanishtha Singh, Ground Report:

मेक इन इंडिया 2015 में शुरू किया गया था, आपने कई जगह वह मशीनों वाला शेर भी देखा होगा. शुरुआत काफी चमकदार थी. लेकिन धीरे धीरे वह शेर केवल कुछ ही वस्तुओ के रैपर पर दिखने लगा. और फिर पीएम मोदी आत्मनिर्भर भारत ले आये.

देशभर में नरेंद्र मोदी 2.0 यानी मोदी सरकार की वर्षगांठ के चर्चे है. लेकिन एक साल पहले पीएम मोदी के नेतृत्व में दूसरी बार सरकार का गठन हुआ तो देश की अर्थव्यवस्था के सामने कई तरह की चुनौतियां थीं. पिछले कार्यकाल के अंतिम दिनों से ही देश की अर्थव्यवस्था पटरी से उतरनी शुरू हो गई थी. जीडीपी का आंकड़ा लगातार गिरता जा रहा था. अर्थव्यवस्था सत्ता में आने के एक साल बाद तक बेडोल रही और तभी कोरोना जैसा बड़ा संकट आ गया.

मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में अर्थव्यवस्था को नोटबंदी और जीएसटी जैसे बड़े झटके लगे जिसका असर अप्रैल-जून 2018 तक रहा और आज भी कहीं न कहीं असर कायम है. देशभर में बढ़ती बेरोजगारी, गिरती जीडीपी, निवेशों की धीमी गति, कोरोना के तूफ़ान के बीच पीएम ने जनता से अपने संबोधन के भाषण में 20 लाख करोड़ रुपये के पैकेज को “आत्मनिर्भर भारत” के लक्ष्य की दिशा में एक बड़ा कदम बताया. लेकिन उनके हर भाषणों की तरह ये एलान भी महज़ भाषण भर में सिमट कर रह गया.

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उन्होंने कहा कि यह अभियान हर एक देशवासी के लिए, हमारे किसान, श्रमिक, लघु उद्यमि, स्टार्ट उप्स से जुड़े नौजवान सभी के लिए नए अवसरों का दौर लेकर आएगा. कई लोगों को आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया का अन्तर समझ नहीं आया. विशेषज्ञों का कहना है कि यह मेक इन इंडिया से आगे का रास्ता है. पीएम मोदी संकट के इस समय भी नए-नए शब्दों से जनता का मनोबल बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं. अब आत्मनिर्भर भारत का रास्ता बता के पुराने अभियानो की चर्चा भुलावा दी.

पीएम का कहना है कि आज अपने पैरों पर खड़े होना ही समय की मांग है, जिसका आत्मनिर्भर भारत अभियान ही एक मात्र उपाय है.

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आप इस बात से भी भ्रमित हो सकते हैं कि स्वदेशी आंदोलन और आत्मनिर्भर भारत में क्या अंतर है? आलोचक यह भी कह रहे हैं कि संकट के इस दौर में सरकार संरक्षणवाद को बढ़ावा दे रही है. वैसे भी यह आशंका जताई जा रही है कि कोरोना संकट के बाद अब दुनिया भर में संरक्षणवाद को बढ़ावा मिलेगा. कई लोगों को यह भी नहीं समझ आता कि एक तरफ सरकार हर सेक्टर में एफडीआई बढ़ा रही है, तो यह भला आत्मनिर्भरता को बढ़ाने वाला कैसे होगा?

लेकिन सरकार इन आलोचनाओं से बेपरवाह नज़र आयी. उसने कोरोना संकट को अवसर में बदलते हुए ऐसे तमाम क्रांतिकारी आर्थिक सुधार कर दिए हैं, जिनकी कॉरपोरेट जगत वर्षों से मांग कर रहा था. तो मोदी सरकार 2.0 के दो साल पूरा होने पर यानी अगले एक साल में यह पता लग जाएगा कि सरकार के इन क्रांतिकारी सुधारों से अर्थव्यवस्था को कितना सहारा मिलता है.

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आत्मनिर्भर भारत के अधिकतर फैसले पुराने थे, इन फैसलों की घोषणा सरकार बजट 2020 में कर चुकी थी. अब उन्हें दोहराना सरकार की नाकामी माना जाए?

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