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Makar Snakranti 2021: मकर संक्रांति के लिए ये है सबसे प्रभावी और उपयुक्त सूर्य मंत्र

Makar Sankranti 2021: Why is Makar Sankranti celebrated, what is the pauranik katha?
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मकर संक्रांति के पर्व को भगवान सूर्य की उपासना का ही प्रतीक माना जाता है।इस दिन सूर्य देवता की उपासना करना बहुत ही उत्तम माना जाता है इस दिन सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण होते हैं और मकर राशि में गोचर करते हैं। शास्त्रों की मानें तो जब सूर्य दक्षिणायन की स्थिति में होता है । तो वह देवताओं की रात मानी जाती है और जब यही सूर्य उत्तरायण की स्थिति में होता है तो वह देवताओं की दिन मानी जाती है। इस स्थिति में मकर संक्रांति के दिन सूर्य का उदय होना देवताओं के लिए एक सुबह का आगाज देना होता है। सूर्य के दक्षिणायन होने से शुभ कार्य पर प्रतिबंध भी लग जाता है एक माह का खरमास इसी दक्षिणायन का प्रतीक माना जाता हैं। जैसे ही सूर्य की स्थिति बदलती है और वह उत्तरायण होते हैं। वैसे ही मांगलिक व शुभ कार्यों पर लगा प्रतिबंध भी खत्म हो जाता है यानी कि इस दिन से त्यौहारों और मांगलिक कार्यों की गतिविधि प्रारंभ हो जाती है। यदि मकर संक्रांति के द‍िन भगवान सूर्य जी के इन तीन विशेष मंत्रों में से एक भी मंत्र का पूरी श्रद्धा भक्ति विश्वास के साथ जप किया जाये तो उस व्यक्ति पर सूर्य भगवान की अपार कृपा बरसती है। सूर्य का कुंडली में मजबूत होना आपको हर कार्य में सफलता दिलाता है।धन में वृद्धि करता है और मान सम्मान प्रतिष्ठा की भी प्राप्त कर आता है।

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Makar Sankranti 2021: आखिर क्यों मनाई जाती है मकर संक्रांति, क्या है इसकी पौराणिक कथा?

मंत्र 1 
मकर संक्रांति की प्रातः काल उठकर स्‍नान करें और  उगते हुए सूर्य को जल अर्पित करें। अब कुश के आसन को लेकर पूर्व दिशा के तरफ मुख करके बैठ जाए और रुद्राक्ष की माला से नीचे दिए गए मंत्र का जप करें –
 
ऊं आदित्याय विदमहे दिवाकराय धीमहि तन्नो सूर्य: प्रचोदयात्

इस मंत्र का जाप कम से कम 5 माला जरूर करें। इस मंत्र का जप करने से व्यक्ति के जीवन में चल रही परेशानियां दूर होती है और सुख शांति का वातावरण बना रहता है । यदि इस मंत्र को नियमित रूप से प्रत्येक रविवार किया जाए तो इसका लाभ और अधिक एवं शीघ्र मिलता है।

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मंत्र 2 
भगवान सूर्य को जल अर्पित करने के लिए सबसे पहले पवित्र जल या पवित्र नदी में स्नान करने के पश्चात एक तांबे के लोटे में जल लेकर उसमें एक लाल पुष्प और एक चुटकी अक्षत मिलाकर भगवान सूर्य को जल अर्पित करना मंगलकारी होगा।

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ऊं घृणि सूर्याय नम: 

इस प्रकार जब आप सूर्य को अर्घ्य देते हो तो आपकी हर मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

मंत्र 3 
मकर संक्रांति की सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करने के बाद पूर्व दिशा में मुख करके कुश के आसन पर बैठें। एक साफ लकड़ी की चौकी लें। अब इसपर सफेद रंग का वस्त्र बिछाएं और इसके ऊपर भगवान सूर्यदेव के चित्र या प्रतिमा को स्थापित करें। इसके बाद भगवान सूर्य की पंचोपचार विधि विधान से पूजा करें और सूर्य देव को तिल व गुड़ का भोग लगाएं। पूजा में लाल पुष्प का उपयोग जरूर करें। नीचे दिए गए इस मंत्र का जाप लाल चंदन की माला से करना अत्यंत शुभकारी रहेगा।

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ऊं भास्कराय नम:

इस मंत्र का जाप आप अपने श्रद्धा अनुसार जितनी माला जाप करना चाहे उतना यथासंभव कर सकते हैं। लेकिन कम से कम पांच माला जाप करना आपके लिए मंगलकारी सिद्ध होगा। 

इसके अलावा सूर्य भगवान के इन 12 नामों का भी जाप किया जा सकता हैं।
मकर संक्रांति के दिन इन सूर्यदेव के नामों का जाप करते हुए सूर्य को अर्घ्य देने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। रोजाना प्रात:काल सूर्य नमस्कार करने से मन शांत और प्रसन्नचित्त रहता हैं.. 

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1) ॐ सूर्याय नम: । 
2) ॐ भास्कराय नम:। 
3) ॐ रवये नम: । 
4) ॐ मित्राय नम: । 
5) ॐ भानवे नम: 
6) ॐ खगय नम: । 
7) ॐ पुष्णे नम: ।
8) ॐ मारिचाये नम: । 
9) ॐ आदित्याय नम: ।
10) ॐ सावित्रे नम: । 
11) ॐ आर्काय नम: ।
12) ॐ हिरण्यगर्भाय नम: । 

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