Makar Sankranti 2021: मकर संक्रांति पर क्यों उड़ाते हैं पतंग, क्या है इसका इतिहास और महत्व?

Makar Sankranti 2021: Patang ka mahatva aur itihas kite importance and history on makar sankranti
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Makar Sankranti 2021: Patang ka mahatva aur itihas kite importance and history on makar sankranti: मकर संक्रांति को पतंग का पर्व भी कहते हैं। इस पर्व को देश भर में उत्साह और उल्लास से मनाया जाता है। मकर संक्रांति का पर्व प्रत्येक वर्ष जनवरी के माह में मनाया जाता है। इस पल का इंतजार केवल पतंगों के लिए नहीं बल्कि गजक-मूंगफली, और तिल गुड़ के लिए भी की जाती है। मकर संक्रांति के दिन बाजार में तिल गुड़, मूंगफली चने की भरमार रहती है साथ ही बाजार भी रंग बिरंगी पतंगों से सजा रहता है। इस दिन बाजार में लाल-पीली, हरा-गुलाबी तथा अलग प्रकार पतंगे हर किसी का मन मोह लेती है। इसके अलावा पतंगोत्सव के लिए भव्य प्रतियोगिताएं भी आयोजित की जाती है। लेकिन बहुत कम ही लोग जानते होंगे कि मकर संक्रांति के दिन पतंग क्यों उड़ाए जाते हैं। (Makar Sankranti 2021: Patang ka mahatva aur itihas kite importance and history on makar sankranti)

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पतंग उड़ाने का धार्मिक महत्व
इस त्यौहार के दिन पतंग उड़ाने का संबंध भगवान राम से बताया जाता है। माना जाता है कि मकर संक्रांति के वक्त भगवान राम ने पतंग उड़ाने की शुरुआत की थी। तमिल की तन्दनानरामायण के मुताबिक भगवान राम ने जो पतंग उड़ाई थी वह उड़कर इंद्रलोक में चली गई थी। भगवान राम द्वारा शुरू की गई परंपरा आज भी चली आ रही है। (Makar Sankranti 2021: Patang ka mahatva aur itihas kite importance and history on makar sankranti)

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पतंग शुभ संदेश का वाहक
माना जाता है कि पतंग शुभ संदेश देती हैं। पतंग खुशी, उल्लास, उत्साह तथा शुभ संदेश का वाहक है। पतंग के शुभ पर्व के दिन से घर में भी शुभ काम शुरू हो जाते हैं। पतंग को ऊंचाई तक उड़ाना और कटने से बचाने के लिए सोचना इंसान को नई सोच की प्रेरणा और शक्ति देता है।

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एकता का पाठ पढ़ाती है पतंग
पतंग को अकेले उड़ाना संभव नहीं है। एक इंसान के हाथ में डोर होती है तो दूसरे इंसान के हाथ में मांझा होती है। दोनों इंसान की भूमिका एक समान होती है। साथ ही हार जीत अंतर भी समझते हैं।

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सूरज की रोशनी के लिए
ऐसा माना जाता है कि मकर संक्रांति के दिन सूर्य देव प्रसन्न रहते हैं। इसके अलावा सर्दी के दिन सूरज की रोशनी बहुत जरूरी होती है इस कारण भी लोग पतंग उड़ाते हैं। साथ ही शरीर को विटामिन डी भी मिल जाती है।

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मकर संक्रांति का पौराणिक इतिहास
सूर्य पौष मास में धनु राशि छोड़कर मकर राशि में प्रवेश करता है। इसी कारण मकर संक्रांति मनाई जाती है। मकर संक्रांति के दिन से ही सूरज की उत्तरायण गति शुरू होती है। इसीलिए इस पर्व को उत्तरायणी से भी पहचाना जाता है। इस दिन को पिता सूर्य और पुत्र शनि के मुलाकात के रूप में भी मनाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान सूर्य अपने पुत्र शनि से मिलने खुद उसके घर जाते हैं। इसी कारण इस पर्व को मकर संक्रांति के नाम से भी पहचाना जाता है।

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