महाराष्ट्र बाढ़ विभीषिका प्राकृतिक नहीं मानव निर्मित आपदा ! मामला कोर्ट में।

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ग्राउंड रिपोर्ट। मुंबई

महाराष्ट्र में पिछले दिनों बाढ़ से मची विभीषिका को लेकर मुंबई हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है जिसमें आरोप है कि यह बाढ़ प्राकृतिक नहीं बल्कि मानव निर्मित थी। याचिका में कहा गया कि समय रहते संबंधित महकमे के अधिकारियों ,मंत्रियों और तंत्र ने यथोचित कदम नहीं उठाए जिसकी वजह से सांगली, कोल्हापुर जिलों के अलावा कई गांवों के लोगों को विभीषिका का सामना करना पड़ा।

सोशल एक्टिविस्ट डॉ. संजय लाखे पाटिल द्वारा दायर याचिका के अनुसार कोल्हापुर के जिलाधिकारी ने 1 अगस्त को ही राज्य के संबंधित महकमे को इत्तिला दे दी थी कि अलमट्टी डैम का पानी तुरंत न छोड़ा गया तो इलाके में जल भराव हो सकता है और स्थिति अनियंत्रित हो सकती है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कर्नाटक सरकार से तुरंत बातचीत कर एहतियातन एक्शन लेने की जरूरत थी जो डिजास्टर मैनेजमेंट डिपार्टमेंट ,संबंधित विभाग ने नहीं लिया।याचिका में आरोप है कि संबंधित महकमे की लापरवाही के चलते बाढ़ ने भयानक रूप ले लिया। इतना ही नहीं इस डिपार्टमेंट ने 2005 में तय किए गए निर्देशों का पालन भी नहीं किया। याचिका में मांग की गई है इन लापरवाहियों के मद्देनजर इस बाढ़ को प्राकृतिक आपदा की जगह मानव निर्मित आपदा के रूप में देखा जाए। संबंधित विभाग के मंत्री ,अधिकारियों और तंत्र की भूमिका की जांच की जाए और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।

याचिका में बाढ़ ग्रस्त इलाकोंं के राहत कार्य भी कठघरे में है। याचिका के मुताबिक बाढ़ ग्रस्त इलाकों के अंतिम इंसान और जानवर तक राहत कार्य पहुंचना चाहिए था लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसमें भी लापरवाही बरती गई।
डॉक्टर संजय लाखे पाटिल के अनुसार यदि कोर्ट इस मामलेे के सभी आयामों को लेकर गंभीरतापूर्वक विशेष टीम गठित कर जांच करेगी तो इस विभीषिका के जिम्मेदार कौन हैं यह बात सामने आ सकेगी। इतना ही नहीं इससे भविष्य में इस तरह की पुनरावृति को भी रोका जा सकेगा। याचिका के मुताबिक सांगली, कोल्हापुर के 6लाख से अधिक लोगों को स्थानांतरित किया गया। 26 लोगों को जान से हाथ धोना पड़ा। बाढ़ की विभीषिका में पौने दो सौ के करीब गाय, भैंस, बछड़े व भेड़ों की मौत हो गई और 11 हजार के करीब मुर्गीयां मर गई।