महाराष्ट्र में सूखा पीड़ित गांव ने इच्छामृत्यु की अनुमति मांगी

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एम एस नौला | महाराष्ट्र

महाराष्ट्र के कई हिस्सों में सूखा अपने चरम दो पर है। मराठवाड़ा, विदर्भ, के अलावा खानदेश की स्थिति अकाल के चलते भयावह है। हिंगोली जिले के एक तालुका सेनगाव के ताकतोडा गांव का दर्द और आक्रोश इस बात से समझा जा सकता है कि उन्होंने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीसको पत्र भेजकर पूरे गांव को बेचने की अनुमति मांगी है या फिर इच्छा मृत्यु की अनुमति मांगी है।

यहां तो किसानों को किसी तरह की सुविधा नहीं मिली है। गांव के 1000 किसानों में से जैसे-तैसे 35 किसानों को फसल बीमा मिला है। आक्रोशित किसानों ने गांव बेचने का पोस्टर ग्राम पंचायत के कार्यालय पर चिपका दिया है।

गांव वालों ने बुधवार को एक सभा बुलाई। गांव वालों ने इस सभा में मांग की है कि उनकी फसल बीमा, सरकारी कर्ज , गैरसरकारी कर्ज आदि माफ कर दिया जाय या गांव बेच दिया जाय। या फिर कम से कम सामुहिक इच्छा मृत्यु की अनुमति दी जाय। इन्हीं मांगों को लेकर गांव के स्कूल और ग्राम पंचायत को ग्राम वासियों ने बंद कर दिया है । अकाल और बेरोजगारी से त्रस्त होकर गांव के लोगों ने यह कदम उठाया है। लगातार अकाल और प्रशासन की अनदेखी के कारण ग्रामीण जनता किस तरह हताश है, यह इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है।

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सूखे का पांचवा साल

ताकतोडा की जनसंख्या लगभग 3000 के करीब है। यहां के लोगों का जीवन निर्वाह का संसाधन मुख्य रूप से खेती से जुड़ा हुआ है। पिछले 4 वर्षों से गांव में लगातार सूखा पड़ा हुआ है जिसके चलते कई लोग गांव छोड़कर जाने को विवश हैं। लेकिन ऐसे भी कई लोग हैं जो अपनी जड़ से अलग नहीं होना चाहते। जुलाई खत्म होने को है लेकिन अभी भी इंद्र देवता रुष्ट ही बैठे हैं। यदि समय पर बारिश नहीं हुई तो बोई फसल सूख जाएगी। और यह पांचवा वर्ष होगा गांव वाले सूखे की मार झेलने के लिए विवश होंगे।

सरकारी बैंकों के नियम कानूनों के चलते किसान फसल कर्ज के लिए गैर सरकारी बैंक और साहूकारों के पास जाने के लिए मजबूर हैं। प्राइवेट बैंक और साहूकारों से कर्ज लेकर उन्होंने जो खेती की है बारिश नहीं होने के चलते यदि सूख गई तो उनकी चिंता है , ‘पुराना कर्ज नहीं चुका पाए हैं अब तक नया कर्ज कैसे चुका पाएंगे?’फसल बीमा योजना बहुत दूर की कौड़ी है इन किसानों के लिए।

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मांगे क्या है गांव वालों की:

किसानों का सारा कर्ज माफ़ किया जाए। सरकारी और गैर-सरकारी कर्ज। फसल बीमा दिया जाए। हिंगोली जिले को केंद्रशासित घोषित किया जाए।एम आई डी सी जैसी योजनाएं शुरू की जाए। किसानों के कर्ज माफ करने के वादे को महाराष्ट्र सरकार ने अपनी प्राथमिकता बताते हुए बार बार आश्वस्त किया है किसानों को।सत्ता में भागीदारी निभाने वाली शिवसेना किसानों के हित की बात करती रही है। वाकई सरकार किसानों के बारे में सोचती तो आज गांव वालों को गांव बेचने या फिर सामुहिक इच्छा मृत्यु की गुहार नहीं लगानी पड़ती।

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