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Maha Shivratri 2021: पार्वती से विवाह या कैलाश पर्वत के साथ एकात्म हो गए थे महादेव, महाशिवरात्रि से जुड़े 4 रोचक तथ्य

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Maha Shivratri 2021: आज पूरी दुनियाभर में महाशिवरात्रि मनाई जा रही है। भगवान महादेव शिव से जुड़ा महाशिवरात्रि (Maha Shivratri 2021) के पर्व पर श्रद्धालु शिव मंदिरों में रुद्राभिषेक करते हैं, जबकी अधिकतर लोग शिवरात्रि के मौके पर व्रत भी करतें हैं। वहीं महाशिवरात्रि खास क्यों हैं इस बारे में ईशा फाउंडेशन प्रमुख सदगुरु जग्गी जी महाराज बताते हैं कि इस रात का खास महत्व है और इसका हम बेहतर तरीके से इस्तेमाल कर सकते हैं।

सदगुरू क्या कहते हैं
इस बारे में सदगुरू कहते हैं कि हमारी भारतीय संस्कृति में साल के 365 दिन उत्सव मनाए जाने की परंपरा है। इसे ऐसा कहें कि साल में सभी दिन उत्सव मनाने के लिए कुछ न कुछ बहाना चाहिए। कभी हम ऐतिहासिक घटनाओं को याद करते हैं तो कभी जीत को याद करते हैं। खास मौके जैसे कि कटाई, बुआई का जश्न मनाकर स्वागत करते हैं। हर परिस्थिति के लिए हमारे पास हर तरह का त्योहार है, लेकिन महाशिवरात्रि इन सबसे अलग है और उसका खास महत्व है। (Maha Shivratri 2021)

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महाशिवरात्रि इतनी खास क्यों और ये क्यों मनाते हैं
सनातन हिंदू धर्म में फाल्गुन महीने में आने वाली महाशिवरात्रि (Mahashivratri) का सबसे खास महत्व होता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। शास्त्रों के मुताबिक, महाशिवरात्रि की रात भगवान शिव करोड़ों सूर्यों के समान प्रभाव वाले ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रकट हुए थे। इसके बाद से हर साल फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को महाशिवरात्रि का त्योहार मनाया जाता है। (Maha Shivratri 2021)

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पार्वती सती का पुनर्जन्म
ऐसी भी मान्यता है कि मां पार्वती सती का पुनर्जन्म है। मां पार्वती शिवजी को पति के रूप में प्राप्त करना चाहती थी। मां पार्वती ने महादेव को प्रसन्न करने के लिए कई प्रयत्न और घोर साधना की थी और इसी दिन उनका विवाह संपन्न हुआ था।

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कैलाश पर्वत के साथ एकात्म
मान्यता यह भी है कि, महाशिवरात्रि आध्यात्मिक पथ पर चलने वाले साधकों के लिए खासा महत्व रखती है। साधकों के लिए यह वह दिन होता है जब वे कैलाश पर्वत के साथ एकात्म हो गए थे। यौगिक परंपरा में महादेव को पूजा नहीं जाता बल्कि उन्हें आदि गुरु की मान्यता दी गई है वो पहले गुरु जिनसे ज्ञान उत्पन्न हुआ और सारे संसार को ज्ञान मिला। सदियों तक ध्यान में तल्लीन होने के बाद वे आज ही के दिन कैलाश पर्वत के साथ एकात्म हो गए थे।

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