मध्यप्रदेश में हमारा घर हमारा विद्यालय योजना हो रही फ्लाप

मध्य प्रदेश में ‘हमारा घर हमारा विद्यालय योजना’ हो रही फ्लाप

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स्कूल बंद हैं। घर में पढ़ने के लिए किताबें भी अभी तक नहीं मिली। शिक्षक भी घर नहीं आ रहे हैं। लॉकडाउन की वजह से सब बंद है। ये सच्चाई है मध्य प्रदेश में ‘हमारा घर- हमारा विद्यालय योजना’ की।

मध्य प्रदेश : सतना जिला मुख्यालय से करीब चार किलोमीटर चलने पर पूर्व दिशा की ओर एक रास्ता जाता है । यह पक्का रास्ता बिरहुली गांव से होता हुआ सकरिया और आसपास के गांव तक ले जाता। सड़क से ही सटे कुछ पक्के-कच्चे घर बने थे। घरों की उल्टी दिशा में नाला बहता। इसी बरसाती नाले में स्कूली बच्चों की एक टोली मस्ती के साथ मछली मार रही थी। कैमरा देखा तो भागने लगे, कुछ घर की ओर सरपट चल दिये तो कुछ ने झुरमुटों की ओट ले ली, पर 4-5 ढाढस के साथ रुके रहे।

घर में क्यों नहीं पढ़ते ? जवाब मिला – न किताब मिली, न मास्साब आते तो क्या पढ़े, इसलिए मछली मार रहे हैं। इसी टोली के शायद लीडर अंशु कोल (12वर्ष) ने बड़े अदब से कहा, ” मई नेम इस अंशु कोल, जब से लॉक डाउन लगा है तो सर जी नहीं आते। किताब-उताब नहीं दी है। तो कहां से पढ़ें ? इसलिए मछली मार कर पेट पाल रहे हैं”। गांव की आबादी करीब 2000 है जहां पांचवीं तक का स्कूल है। इसके बाद की पढ़ाई के लिए नजदीक के गांव सकरिया जाना पड़ता है। यह गांव बिरहुली से लगभग 2 किलोमीटर है।

मध्यप्रदेश के स्कूल शिक्षा विभाग ने कोरोना संक्रमण के खतरे को देखते हुए स्कूल बंद हैं, लेकिन पढ़ाई नहीं बंद की है। 6 जुलाई से यहां कक्षा एक से लेकर आठवीं तक के बच्चों के लिए हमारा घर हमारा विद्यालय योजना शुरू की है। इस योजना का ध्येय वाक्य ‘अब न रुकेगी पढ़ाई’ बनाया गया है । इसके बाद भी शिक्षक घर तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। यह हाल तब है जब उन्हे केवल पांच घरों में जाकर बच्चों ने क्या पढ़ा लिखा है यह देखने के निर्देश मिले हैं। इसके अलावा बच्चों को घर में पढ़ाई के दौरान क्या दिक्कत हुई इस पर भी चर्चा कर समाधान करना है लेकिन शिक्षकों को फुरसत नहीं मिल पा रही है।

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मध्य प्रदेश में राइट टू एजुकेशन के तहत हर साल मुफ्त में किताबें दी जाती हैं। इस साल जून माह से ही वितरण शुरू कर दिया गया था। इसके बाद भी ढंग से कार्य नहीं हो सका। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान आंकड़ा दिया गया। इस आंकड़े के अनुसार प्रदेश में मुफ्त किताब वितरण का कार्य 78.10 फीसदी हो चुका है। 3 करोड़ 38 लाख 35 हज़ार 6 सौ 17 की डिमांड की गई थी इनमे से आठों डिपो ने 2 करोड़ 64 लाख 26 हज़ार 3 सौ 18 पुस्तकें सप्लाई की हैं। रीवा डिपो में आने वाले सात जिलों में 84.20,  सागर के छह जिलों में 84.87, ग्वालियर के जिलों में 84.42, जबलपुर के आठ जिलों में 70.05, भोपाल के आठ जिलों में 69. 85, खंडवा के चार जिलों में 71.70, उज्जैन के छह जिलों में 77.48 और इंदौर के पांच जिलों में 83.57 फीसदी सप्लाई की गईं हैं।

सकरिया निवासी ज्ञानचंद गुप्ता (51 वर्ष) कहते हैं कि ” टीवी मोबाइल तक नही खरीद पाया हूँ। मास्साब आते नही है। जो पढ़ा लिखा है वह भी बेकार हो रही है। बिरहुली से सकरिया पढ़ने जाने वाले कक्षा आठवीं के छात्र नितेश यादव ने बताया कि ” मुझे किताब मिल गयी है। सर लोग पढ़ाने नहीं आते। मेरे पास मोबाइल ओबाइल कुछ नहीं है पढ़ने के लिए। सर लोगों को आर्डर है लेकिन नहीं आते हैं।

शिक्षकों भी ‘ गृह संपर्क ‘ में रुचि नहीं ले रहे। ऊपर से महंगे और लेटेस्ट फोन लेने के लिए अभिभावकों पर दबाव बना रहे हैं। इस बारे में जिला मुख्यालय से तकरीबन 20 किलोमीटर दूर ग्राम रिवार के निवासी राजेश दोहर कहते हैं कि एक दिन मास्टर साहब आये थे ।कह गए कि टच वाला मोबाइल खरीद लें। मज़दूरी करते हैं तो बताइए कैसे खरीद लें।

सर्व शिक्षा अभियान के सहायक परियोजना समन्वयक (जेंडर) रावेंद्र कुमार त्रिपाठी कहते हैं कि ” जिले में निःशुल्क पुस्तक वितरण का लक्ष्य 9 लाख 62 हज़ार 4 सौ 82 था जिसके विरुद्ध दिनांक 6 जुलाई की स्थिति में 8 लाख 85 हज़ार 5 सौ 55 पुस्तकों का वितरण किया जा चुका है। लक्ष्य का 92 फीसदी है। इसी तरह वर्क बुक का लक्ष्य 2 लाख 76 हज़ार 5 सौ 50 था। हमने 2 लाख 74 हज़ार 7 सौ 82 वितरित की जा चुकी हैं ” ।

मध्य प्रदेश सहायक परियोजना समन्वयक (एकेडमिक) रमाकांत तिवारी ने बताया कि ” हमारा घर हमारा विद्यालय शासन की महत्वपूर्ण योजना है जिसके तहत अभिभावकों को प्रेरित करना है कि घर को ही विद्यालय का रूप देना है और बच्चों को प्रेरित करें  कि जिस तरह से स्कूल 29 बजे से प्रारंभ होते हैं बच्चे भी सेल्फ स्टडी 10 बजे से प्रारंभ करें। शिक्षकों के लिए निर्देश हैं कि जिनके पास मोबाइल हैं उनसे चर्चा करें और जिनके पास नहीं हैं उन छात्रों के घर जाना है। एक दिन में पांच गृह संपर्क करने हैं।

क्या है हमारा घर हमारा विद्यालय योजना
हमारा घर हमारा विद्यालय योजना को मध्य प्रदेश के छात्र छात्राओं के शिक्षा के क्षेत्र में भविष्य को उज्जवल बनाने के लिए 27 जून 2020 को प्रमुख सचिव रश्मि अरुण शमी द्वारा और मध्य प्रदेश सरकार द्वारा एक आभासी मंच पर लॉन्च करने की घोषणा की गई थी। इस योजना के अंतर्गत मध्य प्रदेश के विधार्थियो को घरो में ही शिक्षा उपलब्ध कराया जाना है लेकिन ज़मीन पर ऐसा होता दिख नहीं रहा है। इस योजना पूरे मध्य प्रदेश में 6 जुलाई 2020 से शुरू किया जा चुका है। इस योजना के तहत 6 जुलाई से हर घर में स्कूल की घंटी सुनाई देगी और विद्यार्थियों को घर पर ही शिक्षा ग्रहण करवाई जाएगी और घरो में ही पर्यावरण जैसा स्कूल बनाया जायेगा।

योजना में क्या-क्या शामिल
इस योजना के तहत विद्यालय के शिक्षक बच्चों के घर जाकर या फोन पर संपर्क कर जानकारी लेने के निर्देश दिए गए हैं। सभी बच्चों की पढ़ाई अब घर पर ही होना है। सरकारी स्कूलों से बच्चों के पालकों को किताबें प्रदान की जाना है लेकिन अब तक कितनों को मिली है इसका डेटा अब तक नहीं है। इसके अलावा हर दिन की गतिविधि कराई जाना है। सोमवार से शुक्रवार शाम 4 से 5 बजे तक बालसभा होना है। बच्चे शाम 7 से रात 8 बजे तक खुद से स्टडी करेंगे। हर शनिवार को मस्ती की पाठशाला का आयोजन होना है। पढ़ाई रेडियो, टीवी, मोबाइल के माध्यम से होगी। लेकिन बड़ा सवाल ये है कि जहां उज्जवला के गैस कनेक्शन नहीं पहुंच पाए हैं। बिजली नहीं पहुंच पाई है उनका क्या।

ये रिपोर्ट मध्य प्रदेश से फ्रीलांस पत्रकार सचिन त्रिपाठी ने की है ।

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