मंदसौर गोलीकांड के पूरे हुए 3 साल, न्याय का है अब भी इंतजार

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Rohit Shivhare | Bhopal

मंदसौर गोलीकांड की तीसरी बरसी बीते 6 जून को थी। यह घटना मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के समय की है उसके बाद कमलनाथ मुख्यमंत्री बने और कुछ ही सालों बाद शिवराज सिंह चौहान मुख्यमंत्री पद की वापसी की हैं। पुलिस की गोली से मरने वाले किसान परिवार आज की न्याय की उम्मीद में राहें देख रहे हैं। इसके अलावा बहुत से किसानों पर आज भी इस आंदोलन से संबंधित से मुकदमे का दंश झेल रहे हैं। किसानों पर गोली बरसाने वाले पुलिसकर्मियों पर ना तो अब तक हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया और ना ही किसानों पर लादे गये फर्जी मुकदमे वापस लिए गए हैं। 3 साल पूर्व 6 जून को शिवराज सिंह चौहान के मुख्यमंत्री रहते मंदसौर में चल रहे किसान आंदोलन पर पुलिस ने बर्बर तरीके से गोली चलाई थी। 6 किसानों की मौत हुई थी। आज तक उन दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई है। मंदसौर के किसान सरयू भाई कहते हैं न्याय तो दूर की बात है उल्टा मुकदमों के द्वारा उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है हमारे 6 किसान भाइयों का इंसाफ अभी तक बाकी है।

6 जून 2017 के किसान आंदोलन के हिस्सा केदार सिरोही जो उस समय आम किसान यूनियन का हिस्सा है पर अब कांग्रेस के हिस्सा है वे उस दिन को याद करते हुए बताते हैं कि वह पूरा गोलीकांड सरकार के द्वारा ही कराया गया था। उसके बाद भी हम लोगों को इतना अधिक प्रताड़ित किया क्या हमारे नाक में उंगलियां डाल देंगे जितनी प्रताड़ना हो सकती तो इतनी प्रताड़ना की गई। तब हमें लग ही नहीं रहा था कि हम एक लोकतांत्रिक देश मे रह रहे हैं। सरकार के विरोध में ही मैंने कांग्रेस ज्वाइन की इसके साथ वे दावा भी करते हैं 21 मार्च तक मतलब कांग्रेस के शासनकाल में आंदोलनकारी किसानों पर कितने मुकदमे दर्ज थे उनमें से 80 फीसदी करके किसानों के f.i.r. वापस ले लिए गए हैं।

अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति के सदस्य भरत यादव बताते हैं कि भाजपा सरकार द्वारा किये गये मण्डी संशोधन के चलते किसानों की लूट और बढ़ गई है। 2100 रूपये क्विंटल की गेंहू की खरीद पर अमल नहीं हुआ है। व्यापारियों ने 1500 से 1700 रूपये क्विंटल पर खरीद की है। मंडियों में भी समर्थन मूल्य पर किसानों का पूरा गेंहू नही खरीदा गया है। मक्का पैदा करने वाले किसानों की हालत बहुत ही खराब है। 1760 रूपये क्विंटल समर्थन मूल्य होने के बावजूद 900 रुपये क्विंटल पर व्यापारियों द्वारा मक्के की खरीदी गांव-गांव में की जा रही है। सबकुछ शिवराज सिंह सरकार की जानकारी में होने के बाद भी सरकार मौन है। व्यापरियों पर कोई कार्यवाही नहीं कर रही है। जिन किसानों की फसलें खराब हुई थीं, उनको भी फसल बीमा का पैसा नहीं मिला है। टिड्डी पीड़ित किसानों के प्रकरण भी अब तक सर्वे के बाद तैयार नहीं हुए हैं।

जैन आयोग पर सवाल उठाते हुए नर्मदा बचाओ आंदोलन की नेत्री मेधा पाटकर कहती हैं कि मंदसौर की जो हकीकत हम जानते हैं। मैं वहां जाकर प्रत्यक्ष स्थान पर जाकर स्थिति का जायजा लेकर आई थी। अहिंसक और निरपराध लोगों पर गोली चालन हुआ था। उसके कुछ दिन पहले आकर मुख्यमंत्री वहां लोगों से बात करके गए थे। अब पता नहीं किसने निर्देश दिए थे। पर उसकी जो जांच हुई जैन आयोग के द्वारा उसमें में मैं भी एक दिन उपस्थित थी। वह आयोग बहुत ही बायस्ड था। आयोग ने हमारे जैसे लोगों को प्रजेंट करने ही नहीं दिया। आयोग की रिपोर्ट के आधार पर एक तरह से सबको निर्दोष छोड़ दिया गया। कमलनाथ सरकार से हमारी अपेक्षा थी कि कम से कम वह एफआईआर दाखिल करें। जिससे उसकी क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन हो जाए। जुड़ीशियल इंटरवीन की बात अलग होती है लेकिन वह भी नहीं हुआ। किसानों के ऊपर से अभी तक एफआईआर हटाई नहीं गई है जबकि उन्होंने तो इतना कुछ भुगता हैं।

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साथ ही उन्होंने कहा कि मंदसौर के किसानों की शहादत के बाद अखिल भारतीय किसान संघर्ष का समन्वय बना जो कि एक महत्वपूर्ण घटना थी। लेकिन मंदसौर के किसानों को तत्काल न्याय मिलना चाहिए। आज मध्य प्रदेश में वही सरकार है जो गोलीबारी के दोषी है तो वह इस घटना की निष्पक्ष जांच नहीं करेंगे। इसीलिए सभी संगठनों ने किसानों के आर्थिक दृष्टिकोण से की किसानी घाटे का सौदा ना हो मागे उठानी चाहिए। मंदसौर गोलीकांड से सीख लेते हुए हमें यह सरकारों पर दबाव बनाना चाहिए अहिंसक आंदोलनों को और मांगों को लेकर सरकार को हिंसक रूप नहीं अपनाना चाहिए और ना ही जेल में बंद करना चाहिए।

प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ में ट्विटर के जरिए वर्तमान सरकार को मंदसौर गोलीकांड के जरिए किसानों के मुद्दों पर घेरा है। कमलनाथ ने ट्विटर पर लिखा है आज के ही दिन 6 जून 2017 को प्रदेस के मंदसौर के पिपलियामंडी में अपना हक़ माँग रहे किसानों के सीने पर शिवराज सरकार में गोलियाँ दागी गयी थी , जिसमें 6 किसानों की मौत हुई थी। इस बर्बर गोलीकांड की तीसरी बरसी पर मृत सभी किसान भाइयों की शहादत को नमन , भावभीनी श्रद्धांजलि।

गोलीकांड के राजनीतिक दबाव के बाद केके जैन जांच आयोग बना। जांच की रिपोर्ट 11 जून 2018 को मुख्य सचिव को सौंपी गई। जिसमें आयोग ने पुलिस और सीआरपीएफ को क्लीन चिट दे दी थी। रिपोर्ट में उल्लेख है कि भीड़ को तितर-बितर करने के लिए और आत्मरक्षा के लिए गोली चलाना न्याय संगत था।

गौरतलब है कि 6 जुलाई 2017 को जिले में किसान आंदोलन चल रहा था किसान सड़कों पर अपने दूध फसल उचित दाम ना मिलने के कारण फेंक रहे थ। किसानों ने जगह-जगह पर चक्का जाम किया हुआ था। किसान खेत छोड़कर सड़कों पर थे। प्रदर्शनकारी किसानों पर पुलिस की फायरिंग से 5 किसानो की मौत हो गई। इसके अलावा एक अन्य किसान की पुलिस की पिटाई के बाद मौत हो गई। किसान आंदोलन के 3 साल होने के बाद भी और यह 6 किसानों के मौत के बाद के किसानों के लिए सकारात्मक कुछ भी नहीं हुआ है। पुरानी मांगे अब भी की जस की तस बरकरार है।