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बोलता हुआ गरीब किसे अच्छा लगता है?

Madhya Pradesh Guna Dalit family farmer "No Option But To Kill Self": Land Seized, Farmer Couple Drinks Pesticide
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Madhya Pradesh Guna Dalit Farmer: उन दोनों को पीटा गया, खुले आसमान में, सरेआम, लोगों के बीच और कैमरों के सामने। 14वीं सदी का यूरोप गंभीर अपराधी को लोगों में खौफ पैदा करने के लिए ऐसी सजाएं देता था। लेकिन न ये 14वीं सदी है, न ही हमारी सदी का कोई अलोकतांत्रिक और बर्बर देश और जिन्हें पीटा गया, न ही दोनों अपराधी थे। घटना मध्य प्रदेश के गुना की है।

Priyanshu | Opinion

मंगलवार को यहां एक दलित किसान दंपति की पुलिसवालों के जत्थे ने बेहरमी से पिटाई की। पुलिस उन्हें सरकारी जमीन के एक टुकड़े से हटाने के लिए पहुंची थी जिस पर उनकी फसल खड़ी थी। आहत दंपति ने बाद में कीटनाशक पी लिया। पति-पत्नी के कीटनाशक पी लेने के बाद भी न पुलिस और न प्रशासन किसी ने उनकी सुध नहीं ली। पति और पत्नी फिलहाल अस्पताल में हैं जहां महिला की हालत नाजुक है।

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फेसबुक यूजर अंकिता जैन ने लिखा, ‘मामले को समझाकर भी हल किया जा सकता था लेकिन बोलता हुआ गरीब किसे अच्छा लगता है? इस देश में गरीब किसान का बच्चा बड़ा होकर किसान नहीं बनना चाहता। करेगा भी क्या बनकर? एक दिन उसे भी मजबूर होकर या तो फांसी लगानी पड़ेगी या पेस्टीसाइड पीना होगा।’

घटनास्थल पर गए तहसीलदार निर्मल राठौर ने किसान दंपति की बर्बर पिटाई को ‘थोड़ी सख्ती’ बताया है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बुधवार देर रात जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक को पद से हटा दिया लेकिन यह कार्रवाई स्वतः होने की बजाय चौतरफा दबाव के बाद की गई। जब एक परिवार को ‘गोद में बाप का सिर रखकर बिलखते बच्चों’ की स्थिति में पहुंचा देने को प्रशासन ‘मामूली सख्ती’ मान रहा हो फिर क्या ही कहा जाए।

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न शर्म आती है, न आएगी
रवीश कुमार समेत कितनों ही कल से लिख रहे हैं, ‘गुना के कलेक्टर और एसपी को डिसमिस कर देना चाहिए। ये बीमारी ऐसे ठीक नहीं होगी। सदियों से घुसी हुई है और आजादी के बाद भी बढ़ती जा रही है। ये अफसर कुर्सी पर जाकर करते क्या हैं? क्यों नहीं तंत्र को सत्ता के गुरूर से मुक्त करते हैं। दोनों अफसरों को नौकरी से निकालने की मांग करनी चाहिए। कोई तबादला नहीं, कोई निलंबन नहीं। सीधे बर्खास्त करना चाहिए दोनों को। वैसे भी लोगों को फर्जी केस में फंसाने के अलावा इनका कोई काम तो होता नहीं। तबादला धोखा है। इन्हें बर्खास्त करना चाहिए। इन अफसरों को शर्म भी नहीं आती होगी। न आएगी।’