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शिवराज के गढ़ में लोगों को नहीं पता मध्य प्रदेश का मुख्यमंत्री कौन है?

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भोपाल, 27 अक्टूबर। ग्राउंड रिपोर्ट की टीम इन दिनों मध्य प्रदेश के तमाम विधानसभा क्षेत्रों खास तौर से ग्रामीण इलाकों में रिपोर्टिंग कर रही है। भोपाल से शुरू हुआ हमारा काफिला पहले सीहोर पहुंचा। ये वहीं सीहोर है जिसकी चार विधानसभा सीटों (सीहोर (शहरी), आष्टा, बुदनी, इछावर) में से एक बुदनी मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का विधानसभा क्षेत्र है।

रिपोर्टिंग के दौरान हमने ग्रामिणों के साथ-साथ ऐसे लोगों से बातचीत की जो समाज में तो है लेकिन समाज उन्हें अपना हिस्सा नहीं समझता। कुछ ऐसे ही लोगों में से है सीहोर में कचरा बीनने वाले इंदर। इंदर शादीशुदा है घर परिवार भी है। कचरा बीनकर एक सौ पचास रुपये से दो सौ रुपये तक रोज कमा लेते हैं। आधार कार्ड और वोटर आईडी तो है लेकिन वे कहते हैं कि वोट डालने जाऊंगा तो रात में घर पर चूल्हा नहीं जलेगा।
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सरकार पीएम और सीएम आवास योजना तो चला रही है लेकिन कहां और किस के लिए चला रही है इंदर को नहीं पता। न तो उन्हें सरकार की योजनाओं के तहत राशन मिल रहा है न ही उज्जवला योजना के नाम पर गैस चूल्हा। सपाक्स भी आर्थिक आरक्षण की मांग तो कर रही है लेकिन उसमें इंदर जैसे लोग किस पैमाने में फिट बैठते हैं किसी को नहीं पता।

इंदर चाहते हैं कि आवास योजना के तहत उन्हें भी मकान मिले। लेकिन फोग परफ्यूम लगाकर दफ्तर जाने वाले सरकारी बाबू उन्हें देखकर दूर से ही चलता कर देते हैं। दस्तावेज पूरे हैं आवास योजना के लिए पैमाने में भी फिट हैं लेकिन कोई सरकारी मुलाज़िम 20 हजार रुपये लिये बिना इनकी फाइल आगे नहीं बढ़ाना चाहता। हांलाकि यह समस्या सीहोर के इंदर जैसे कई अन्य लोगों की भी हैं।

‘विधायक बनने के बाद कार का शीशा नीचे नहीं उतरा’
समाज शुरू से ही इंदर जैसे लोगों को हेयदृष्टी से देखता आया है, फिर अपनी फॉर्च्यूनर से घूमने वाले सीहोर से निर्दलीय विधायक सुदेश राय से कौन ही उम्मीद करें। करना भी नहीं चाहिये… क्योंकि, कुछ लोग कहते हैं कि विधायक बनने के बाद कभी विधायकजी की कार का शीशा नीचे नहीं उतरा। बता दें कि सुदेश राय सीहोर के एक मात्र सिनेमा हॉल लीसा टॉकिज और क्रिसेंट वॉटर पार्क के मालिक हैं, उनके कई और भी कारोबार हैं।
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बहरहाल, इंदर को मैन इस्ट्रीम मीडिया के बारे में भी ठीक से नहीं पता। सोशल मीडिया जैसे फेसबुक, ट्वीटर, व्हाट्स ऐप की उनसे क्या बात करतें। ये वही सोशल मीडिया साइट है जिस पर आईटी सेल के माध्यम से सरकार करोड़ो रुपये खर्च कर अपनी और अपनी योजनाओं का महिमामंडन करती है। बदस्तूर कर रही है। करना भी चाहिए। काम ठीक से हो न हो लेकिन ब्राडिंग एकदम होना चाहिए।

सीहोर विधानसभा से ग्राउंड रिपोर्ट का वीडियो देखें-

अमेरिका जैसी सड़के सिर्फ अमेरिका में
ब्राडिंग के जरिए शहरी, मेट्रोपोलियन, 4जी और वाईफाई की जकड़ में दिन रात रहने वाले सोशल मीडिया यूजर्स की मानसिकता भी ऐसी ही बनने लगती है कि सरकार बहुत अच्छा काम कर रही है, लेकिन भोपाल से 41 किलोमीटर दूर सीहोर, सीहोर से 45 किलोमीटर दूर आष्टा और आष्टा से 46 किलोमीटर कन्नोद-खातेगांव विधानसभा में 20-30 किलोमीटर अंदर बसे अंदर गांवो तक जब आप जाते हैं तो मिनटों का सफर घंटो में तय होने लगता है। कारण… अमेरिका जैसी सड़के सिर्फ अमेरिका में ही हैं। हमारी कार यहां ऐसे हिचकोले लेकर चली मानो मेले में टोरा-टोरा झूले का लुत्फ मुफ्त में उठा रहे हो।
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आष्टा में अब तक नहीं पहुंच पाई रेलवे
आष्टा में भी कुछ ऐसा ही हाल है। विकास तो हुआ है लेकिन लोग बीजेपी विधायक रंजीत सिंह गुणवान से खासा नाराज़ हैं। कारण… कई योजनाएं और उनकी विधानसभा क्षेत्र के काम अब भी अधूरे हैं। लोग चाहते हैं कि आष्टा का पार्वती पुल का नवीनीकरण जल्द से जल्द हो। कई जगह स्ट्रीट लाइट नहीं है।

बातचीत के दौरान चाय की दुकान पर सोशल मीडिया में मशगूल कोचिंग के लड़कों ने बताया कि, ये पुल की खराब स्थिति के चलते कुछ दिन पहले ही यहां एक्सीडेंट हुआ है, सड़के जर्जर हैं उनमें गड्ढे हैं। हैरानी की बात यह है कि शिवराज का गढ़ माने जाने वाले इस इलाके में अब तक रेल नहीं पहुंच पाई है।

आष्टा से बीजेपी विधायक रंजीत सिंह गुणवान ग्राउंड रिपोर्ट की टीम से बात चीत के दौरान।

कन्नोद में आदिवासियों ने खुद ही सुलझाई अपनी पानी की समस्या
आष्टा के बाद कन्नोद-खातेगांव से कुछ दूर चले तो इस बात को कहने में कोई आश्चर्य नहीं है कि शिवराज सरकार ने सड़कों पर बहुत अच्छा काम किया है। लेकिन इस बात को ध्यान में रखें ‘कुछ दूर’ तक। इसके बाद गाड़ी काफी देर बाद टॉप गियर में डली। कन्नोद से पहले रास्ते में एक आदिवासी नौजवान ने लिफ्ट मांगी।

कन्नोद की राजनीति और वहां की समस्याओं के बारे में उस शख्स से बातचीत हुई तो बताया कि यहां करीब एक लाख से अधिक आदिवासी वोटर हैं। सरकार से बोल-बोलकर थक गए लेकिन खुद ही अपने पानी के स्रोत बनाए हैं। वे कहते हैं कि यहां गोंडवाना लोकतंत्र पार्टी जीतेगी। हांलाकि वर्तमान में यहां बीजेपी से आषीश शर्मा विधायक हैं, जबकी कैलाश कुंडल कांग्रेस से टिकट की दावेदारी कर रहे हैं।
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पार्षद को रास नहीं कि सड़क बने
कन्नोद के कुछ ऐसे इलाकों में जाना हुआ। जहां आमतौर पर इलाके के लोग भी शायद ही कभी जाते हो। यहां रहने वाली सुशीला बाई कहती हैं कि, कुछ साल पहले यहां सड़क के लिए मटेरियल डाला गया था लेकिन पार्षद महोदय को यह रास नहीं आया और अगले दिन सारा मटेरियल उठवाकर अपने घर के सामने की सड़क बना ली।

यहां आज भी जंगल की लकड़ी के भरोसे चूल्हे जल रहे हैं
वहीं एक अन्य महिला की हालत देख के मन में सवाल आता है कि, क्या सरकार मेक इन इंडिया, डिजिटल इंडिया जैसे तमाम जुमले चांद से तोड़कर लाई हैं। यहां कई लोगों के घर में आज भी जंगल की लकड़ी के भरोसे चूल्हे जल रहे हैं। तकनीक के नाम पर सिर्फ पुराने जमाने का पीला वाला बल्ब जलता है, जबकी अब वक्त इरफान खान की सिस्का एलईडी का हो चला है। बिजली कटती है तो घासलेट जलने वाली चिमनी से एक झुग्गी रोशन हो जाती है। इन्हें नहीं पता कि इनके विधायक आशीष शर्मा है। इन्हें नहीं पता कि प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान है।

कन्नोद-खातेगांव से ग्राउंड रिपोर्ट का वीडियो देखें-

यह बड़ी ही हैरानी की बात है कि जिस पार्टी की सरकार 15 वर्षों से मध्य प्रदेश की सत्ता में हो। उस पार्टी के दिग्गज नेता शिवराज सिंह चौहान 13 वर्षों से मुख्यमंत्री हो और उन्हीं के गढ़ सीहोर की तमाम विधानसभा क्षेत्रों और उससे सटे इलाके के लोगों को यह नहीं पता हो कि उनका मुख्यमंत्री कौन है?
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यह तो वहीं बात हो गई… जब हम बचपन में राजा मंत्री चोर सिपाही का खेल खेला करते थे। राजा की पर्ची पाने पर जब हम कहते थे कि मेरा मंत्री कौन… तो अन्य तीन एक दूसरे को शक की निगाहों से देखते हैं। लेकिन वे वर्तमान में राजा भी हैं और मंत्री भी… जबकी सिपाही खुद ही शक के घेरे में हैं।

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